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लॉकडाउन का एक साल : कोरोना ने सिर्फ छीना ही नहीं, ये आदतें भी सिखाई, जानते हैं आप

Fri, 26 Mar 2021 09:37 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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कोरोना ने बदला जीने का अंदाज। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
कोरोना ने हमसे सिर्फ छीना ही नहीं, बल्कि बहुत कुछ सिखाया भी। कोरोना काल में कई सकारात्मक बदलाव आए है। तमाम अच्छी आदतें सीखने को मिलीं। इन आदतों की वजह से हमने न सिर्फ कोरोना को हराया बल्कि दूसरी बीमारियों को पास फटकने नहीं दिया। जो लोग ऑनलाइन, सोशल मीडिया जैसे शब्दों से नाक सिकोड़ते थे, वह लोग अपने बनाए वीडियो को रिश्तेदारों व दोस्तों के बीच शेयर करने लगे। फिटनेस के प्रति झुकाव भी देखा गया। अच्छी आदतों से ही देश का नवनिर्माण होता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि समय के साथ आपने आपको बदलने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। एक नजर डालते हैं उन आदतों पर, जिन्हें पिछले एक साल के दौरान लोगों ने अपनाया। 
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हाथ धोना - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
हाथ धोने की आदत
कोरोना वायरस ने लोगों को हाथ धोने की आदत सिखा दी है। अब लोग दिन में कई बार सैनिटाइजर या साबुन से हाथ को साफ कर रहे हैं। आज से एक साल पहले तक ऐसा नहीं था। यहां तक कि कुछ खाने से पहले भी लोग हाथ तक नहीं धोते थे। कोरोना संकट की वजह से अब लोगों को समझ में आ चुका है कि हाथ का साफ रहना कितना जरूरी है। इससे फायदा यह हुआ है कि बीते साल पेट से संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या में काफी गिरावट आई है।
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छींकना - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
छींकते या खांसते वक्त आसपास वालों का ख्याल रखना
छह महीने पहले लोग मनमाने तरीके से जोर-जोर से छींकते देखे जा सकते थे। इस दौरान वे इस बात का भी ध्यान नहीं रखते थे कि उनके आसपास लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा। कोरोना संकट के दौरान बरती जाने वाली अतिरिक्त सावधानी का असर यह हुआ है कि अब लोग रुमाल, टिश्यू पेपर, मास्क या कोहनी के सहारे बहुत संभलकर छींकते या खांसते दिखाई देते हैं।

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योग - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
एक्सरसाइज व योग की ओर बढ़ा रुझान
स्वास्थ्य से संबंधित कई एजेंसियों ने कहा है कि कोरोना से बचाव के लिए शरीर को अंदर से मजबूत रखना जरूरी है। इसके लिए पौष्टिक खाने के साथ शरीर को चुस्त-दुरस्त रखना होगा। नतीजा यह रहा कि सवेरे और शाम को पार्क व मैदानों में लोगों की भीड़ दिखने लगी है। लॉकडाउन में कई लोगों ने घर के अंदर योग व एक्सरसाइज की आदत डाल ली थी, जो अब भी बरकरार है।
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कम पैसे में खर्च चलाना - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
कम खर्च में जीवन यापन करना
लॉकडाउन ने यह भी सिखा दिया है कि कम खर्च में भी जीवन बसर किया जा सकता है। अब ज्यादातर लोग अधिक खर्च करने से बच रहे हैं। पैसे सिर्फ उन्हीं चीजों पर खर्च कर रहे हैं, जो जरूरी है। दरअसल, लॉकडाउन के दौरान कई लोगों की नौकरी चली गई या कई लोगों को कम वेतन में गुजारा करना पड़ा। इससे लोग भविष्य के प्रति आशंकित हुए और कम खर्च करने की आदत डाली।
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तकनीक का इस्तेमाल - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
तकनीक सीखने की ललक
लॉकडाउन ने उन लोगों को भी तकनीक के करीब ला दिया, जो पहले कहा करते थे कि सोशल मीडिया, मोबाइल यह सब फिजूल की चीजें हैं। ऑनलाइन एजुकेशन इसका बड़ा उदाहरण है। शिक्षक से लेकर बच्चे तक सभी को जूम क्लासेज, गूगल मीट व वेबिनार के बारे में पता चला गया। बुजुर्ग लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने अकाउंट बनाए और देश-दुनिया से जुड़कर अपनी भावनाएं साझा कीं। यू-ट्यूब पर वीडियो डाले। वीडियो से नई चीजें सीखना भी अब इन लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है।
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बागवानी की आदत - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
बागवानी की आदत
कोरोना व लॉकडाउन की वजह से लोग प्रकृति के करीब आए हैं। खासकर लोगों में घरों के अंदर बागवानी की आदत बढ़ी है। कोरोना काल में लोगों ने अपने घरों में औषधि के साथ सब्जी व फलदार पौधे लगाने शुरू किए। बाहर से सब्जी खरीदने के बजाय लोगों ने अपने घरों में ही लौकी, करेला, बैगन, टमाटर व कद्दू उगाए। किचन, बालकनी व टैरेस गार्डन के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ा है।
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साइक्लिंग - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
साइकिल का चलन
कोरोना के दौरान साइकिल चलाने का चलन बहुत बढ़ा है। जिम व फिटनेस सेंटर बंद होने पर लोगों ने फिटनेस के लिए साइकिल को शान की सवारी बनाई। सुबह-शाम सड़कों पर साइकिल चलाने वालों की अच्छी खासी तादाद देखी जा रही है। कुछ समय पहले शहर में पहली बार ब्रांडेड साइकिल खरीदने के लिए लोगों को इंतजार भी करना पड़ा।
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