एशिया के सबसे उम्रदराज (एशियाटिक) हाथी राजमंगल का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह इन दिनों छतबीड़ जू जीरकपुर में था, देखिए तस्वीरें।
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एशिया का सबसे उम्रदराज हाथी 'राजमंगल'
राजमंगल की उम्र 70 साल थी, जिसे साल 1997 में छत्तबीड़ चिड़ियाघर में लाया गया था। आमतौर पर एशियाई हाथियों की औसत आयु लगभग 60 साल होती है, लेकिन राजमंगल 70 साल को पार कर चुका था। उम्र अधिक होने के कारण अप्रत्याशित व्यवहार और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण पिछले 2 वर्षों से उसका प्रदर्शन बंद कर दिया गया था। बाद में राजमंगल को डॉक्टरों की देखरेख में रखा जाने लगा। छतबीड़ प्रबंधकों के अनुसार, राजमंगल दिन-प्रतिदिन कमजोर हो रहा था।
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उम्र अधिक हो जाने के कारण उसकी रोजाना गर्म पानी से फोमेंटेशन और तेल मालिश होती थी। सोमवार सुबह 2.15 बजे के बाद उसकी सांसें धीमी हो गई। वहीं, डॉक्टरों की टीम के प्रयासों के बाद भी उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। सुबह करीब 8.30 बजे के बाद राजमंगल चुप हो गया। इसके बाद जू अधिकारियों ने सुबह 9.30 बजे देखा तो वह अपनी अंतिम सांसें ले चुका था। राजमंगल को 50 साल की उम्र में छतबीड़ चिड़ियाघर में लाया गया था।
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पिछले 2 वर्षों से उसने अन्य हाथियों की तरह इधर-उधर घूमना बंद कर दिया है। उसे पशु चिकित्सकों की निगरानी रखा गया था। राजमंगल की जांच के लिए पंजाब और आईवीआरआई यूपी के विशेषज्ञों की टीम भी यहां बुलाई गई। दो दिन पहले वह कमजोरी के कारण खुद खड़ा होने में असमर्थ हो गया था। इसके बाद उसे हाइड्रोलिक क्रेन और नायलॉन बेल्ट की मदद से उठाया गया। इसके बाद ही उसने सामान्य आहार और पानी लिया। राजमंगल को फिजियोथैरेपी दी जा रही थी।
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राजमंगल की सोमवार सुबह 2.15 के बाद सेहत ज्यादा खराब हो गई, जिसके बाद उसके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। वहीं, 8.30 बजे उसकी सांसों की रफ्तार कम होती गई, जिसके बाद सुबह 9.30 बजे राजमंगल ने अपनी आखिरी सांस ली। - मधुकर सुधागर, डायरेक्टर, छतबीड़ चिड़ियाघर, जीरकपुर
राजमंगल का एक बेटा भी था
इस समय जू में राजमंगल की मौत के बाद तीन फीमेल हाथी ही बचे हैं। राजमंगल अपने बाड़े का सबसे गुस्सैल हाथी रहा है। वह पहले बाड़े में काफी हंगामा मचाता था। उसके साथ फीमेल हाथी माया, हेमा और पार्वती रहती थीं। राजमंगल को 1997 में रोहतक से छतबीड़ जू में लाया गया था। राजमंगल और हेमा के संबंध से उनका एक बेटा वीरू हुआ था। कुछ साल पहले वीरू को चारे में बैठे सांप ने काट लिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद राजमंगल को ज्यादा गुस्सा आने लगा था। अब वह उम्र के अंतिम पड़ाव में काफी कमजोर हो गया था। यहां तक कि उससे उठा भी नहीं जाता। ऐसे में उसे उठाने के लिए क्रेन का सहारा लिया जाता था।