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तस्वीरें: बेहद घातक होगा वायुसेना का ‘वार’, पढ़ें- क्या है विजयी, विकराल, विनाशक मिशन

Sat, 07 Mar 2020 02:13 AM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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राफेल - फोटो : अमर उजाला
मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर इंडियन एयरफोर्स का ‘वार’ अब और घातक होगा। भारतीय वायुसेना अपनी ताकत व दक्षता को और बढ़ाएगी। जिससे न केवल आसमान के रास्ते सरहदों की सुरक्षा ज्यादा पुख्ता होगी, बल्कि सरहद पार से सुनियोजित आतंकवाद को भी करारा जवाब मिलेगा। इसके लिए भारतीय वायुसेना अपनी फ्लीट में स्क्वाड्रन की संख्या और बढ़ाने की तैयारी कर रही है। हालांकि बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद से ही एयरफोर्स की दक्षता व ताकत को बढ़ाने पर काम चल रहा है। लेकिन सूत्रों के अनुसार अब इसके लिए एयरफोर्स ज्यादा गंभीर है। इसके लिए जहां दूसरे देशों की वायुसेना के साथ इंडियन एयरफोर्स की ज्वाइंट एक्सरसाइज का दौर जारी है। वहीं एयरफोर्स भारतीय सेना और नौसेना के साथ भी मिलकर युद्धाभ्यास का दायरा भी बढ़ाएगी।
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अपाचे हेलिकॉप्टर - फोटो : ani
विजयी, विकराल, विनाशक छवि बनाने में जुटी एयरफोर्स
कुछ दिन पहले ही इंडियन एयरफोर्स की यूनाइटेड किंगडम की रॉयल एयरफोर्स के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास ‘इंद्रधनुष’ भी संपन्न हुआ है। इस दौरान भारतीय वायुसेना ने अपनी बेस डिफेंस ड्रिल, सर्च एंड सेनेटाइज ड्रिल, ज्वाइंट फायर एंड मूव ड्रिल समेत अन्य कुशलता को निखारा है। खास बात यह कि भारतीय वायुसेना के जवानों को आईइडी हैंडलिंग ड्रिल के जरिए भी और ज्यादा प्रशिक्षित किया जा रहा है। ताकि आईइडी (इमप्रोवाइज्ड एक्सपलोसिव डिवाइज) बम के खतरों से चौकन्ना और महफूज रहा जा सके।
 
 
 
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चिनूक - फोटो : IAF
भारतीय वायुसेना इन दिनों दुश्मन के लिए अपनी विजयी, विकराल और विनाशक छवि बनाने में जुटी है। इसी उद्देश्य से वायुसेना अपनी ताकत और दक्षता बढ़ाने के विभिन्न अभियानों पर काम कर रही है। देखा जाए तो भारतीय वायुसेना के बेड़े से पुराने जहाजों के रिटायर होने के बाद एयरफोर्स का फ्लीट साइज 33 स्क्वाड्रन रह गया था। मगर आज एयरफोर्स के पासा करीब 42 स्क्वॉड्रन की मजबूती है। ये दुनिया में चौथी सबसे बड़ी एयरफोर्स है। लेकिन ये सिलसिला अभी और आगे बढ़ेगा, जिसकी तैयारियों में भारतीय वायुसेना गंभीरता से जुट चुकी है। हाल ही में वायुसेना की कुछ नई स्क्वाड्रन तैयार की गई हैं।

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चेतक हेलीकॉप्टर - फोटो : HAL
इसमें वायुसेना ने वेस्टर्न एयर कमांड के अधीनस्थ चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन में एमआई 26 (चिनूक) की नई स्क्वाड्रन, हिंडन एयरफोर्स स्टेशन में एवीआरओ 748 एम हेलीकॉप्टर की, पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन में खतरनाक अपाचे की नई स्क्वॉडन, ईस्टर्न एयर कमांड के अधीनस्थ छाबुआ एयरफोर्स स्टेशन में हेलीकॉप्टर की दो यूनिट, बागदोगरा एयरफोर्स स्टेशन में एचएएल चेतक की यूनिट, साउदर्न एयर कमांड के अधीनस्थ तंजावुर में सुखोई 30एमकेआई की नई स्क्वॉड्रन, साउथ-वेस्टर्न एयर कमांड के अधीनस्थ जामनगर एयरफोर्स स्टेशन में एचएएल चेतक की यूनिट गठित की गई है। वहीं अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में राफेल विमान की स्क्वाड्रन तैनात की जाएगी।
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AH-64E (I) अपाचे गार्डियन हेलिकॉप्टर - फोटो : PTI
भविष्य में और भी स्क्वाड्रन के गठन की तैयारी है। पिछले दिनों दुर्गम चोटी लेह हवाई पट्टी पर भी बर्फीले मौसम के बावजूद इंडियन एयरफोर्स ने बायो फ्यूल के साथ एएन-32 विमान की लैंडिंग करवाकर नया इतिहास रचा था। चिनूक हेलीकाप्टर भी इन दिनों अपनी हेली-लिफ्ट क्षमता बढ़ाने में जुटा है। चिनूक की यह एक्सरसाइज दुर्गम चोटियों में चल रही है। दरअसल, चिनूक के आने के बाद भारतीय वायुसेना की ताकत पहले ही बढ़ चुकी है, क्योंकि चिनूक किसी भी दुर्गम इलाके में जवानों की पलटन व अन्य सैन्य उपकरणों को पहुंचाने में सक्षम है। अब चिनूक अपनी इसी हेली-लिफ्ट क्षमता को बढ़ाने में लगा हुआ है।
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