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अमेरिका में हरियाणा के भैंसों की धूम: 12 से 14 लाख रुपये महीने की कमाई, सेब, बादाम व काजू हैं सेहत का राज

Sat, 26 Feb 2022 12:10 AM IST
ajay kumar संजय वर्मा, अमर उजाला, भिवानी (हरियाणा)
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भिवानी पशु मेला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरियाणा मुर्राह नस्ल के लिए जाना जाता है। इसके नाम का डंका तो देश के अन्य राज्यों में ही नहीं, बल्कि अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी बज रहा है। रोहतक जिले के बोहर गांव के देसी शेरू के सीमन ने विदेशी भैंसों की नस्ल भी सुधार दी है। अमेरिका के पशु वैज्ञानिकों ने शेरू की सीमन से करीब मुर्राह नस्ल के 600 भैंसों की तादाद कर ली है। शेरू के बेटे बादल, राका और टाइसन ने तो बोहर के पशु पालक देवेंद्र कोच को ही मुर्राह रतन अवॉर्ड दिला दिया। वहीं मेले में आए मुर्राह भैंसे की सेहत का राज सेब, बादाम और काजू की विशेष खुराक है। हरियाणा के मुर्राह के तो विदेशी वैज्ञानिक भी कायल हैं।
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ताज के साथ पशुपालक कुलदीप फौगाट। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भिवानी में शुक्रवार को शुरू हुए राज्य स्तरीय पशु मेले में प्रदेश भर से पशु पालक अपने-अपने पशुओं को लेकर पहुंचे हैं। मेले में पहले ही दिन इतने पशु आ गए, जिसकी वजह से सभी को हाट के टोकन तक नहीं मिले। अधिकतर पशु पालक निर्माणाधीन कन्या स्कूल भवन के आसपास ही अपने पशुओं को खुले में लेकर डेरा डालने पर मजबूर हो गए। बोहर निवासी देवेंद्र कोच ने बताया कि 2014 में शेरू मुर्राह भैंसा के सीमन का दो हजार स्ट्रो सीआईआरबी के माध्यम से अमेरिका भेजा था। जिसके अब वहां 600 से अधिक बच्चे हैं। शेरू का बादल साढ़े पांच साल का वयस्क मुर्राह भैंसा है। जिसका हर माह 12 से 14 लाख रुपये का सीमन बिक जाता है। 
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सफेद रंग का घोड़ा मंगल को देखने के लिए जुटी लोगों की भीड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अब तक 70 लाख रुपये का सीमन बिक चुका है। जिसकी कीमत भी करीब ढाई करोड़ आंकी जा रही है। बादल 2020 और 2021 हरियाणा ब्रिड चैंपियन का खिताब अपने नाम कर ढाई लाख का इनाम अपने नाम कर चुका है। बादल का बेटा सूर्या दो साल दो माह का है, यह भी मेले में पिता के साथ आया है। देवेंद्र ने बताया कि उसके पास करीब 60 मुर्राह पशु हैं। उसे सोनीपत के गन्नौर में चौथी एग्रो लीडरशिप सीमेंट में राष्ट्रपति के हाथों मुर्राह रतन अवॉर्ड भी मिल चुका है। उसने मुर्राह ब्रीडिंग पर 36 साल तक रिसर्च किया है। अब तक उसकी 225 भैंसें दुग्ध प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। शेरू का बेटा टाइसन तीन बार ब्रीड चैंपियन रह चुका है। राका भी पंजाब में धूम मचा चुका है। बादल के सीमन से हर माह 12 से 14 लाख की कमाई हो जाती है।

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मेले में आई बछड़ी गौरी व उसकी मां लक्ष्मी के साथ पशुपालक महिला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शैतान गधे की शैतानी से हो रहा मनोरंजन
मेले में गधा शैतान भी आया है, उसकी शैतानी मेले में भी सभी का मनोरंजन कर रही है। गांव तिगड़ाना के रामभगत ने बताया कि शौतान नौ साल का है, उसकी ऊंचाई 60 इंच है। उसे घोड़ी और गधी से क्रॉसिंग कराई जाती है। रामभगत ने उसे मेले में छोटे बच्चे के तौर पर ढाई लाख रुपये में खरीदा था। अब उसकी कीमत दस लाख से अधिक है। 
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हैदराबादी नस्ल के बकरे शेरू के साथ लोहारू के पशुपालक रघुवीर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शेरू बकरे के कुनबे का लगा मेला 
मेले में लोहारू लक्ष्मी गॉट फार्म के संचालक रघुवीर ने बताया कि सोजत हैदराबादी ब्रीड का बकरा शेरू खूबसूरती के लिए मशहूर है। उसे अहमदाबाद से सवा लाख में खरीदकर लाया था। उसका अब पूरा कुनबा है। उसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।
 
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बादल के साथ मुर्रा रतन अवार्डी देवेंद्र कोच बोहर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ताज की सेहत का राज
दादरी के लोहड़वाड़ा के पशुपालक कुलदीप फौगाट ने बताया कि 25 माह का मुर्राह भैंसा ताज पंजाब में प्रथम आ चुका है। आठ माह बाद उसका सीमन बिक्री लायक हो जाएगा। उसे रोजाना दस किलो दूध, पांच किलो सेब, आधा किलो बादाम व आधा किलो सप्ताह में काजू खिलाता हूं। उसकी चमक बरकरार रखने के लिए रोजाना मालिश होती है। रोहतक के डोब निवासी रवींद्र ने बताया कि राका डोब का सीमन हर माह 20 लाख रुपये में बिक जाता है। तीन साल दो माह के इस मुर्रा झोटे की कीमत एक करोड़ से अधिक है।
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गांव तिगड़ाना निवासी अपने मालिक रामभगत के साथ शैतान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मंगल की रफ्तार का नहीं मुकाबला
चेतक घोड़े की तरह ही डेरा कारी मेला इंदोखरा धाम के महंत राकेश गिरी महाराज का सफेद रंग का घोड़ा मंगल है। उसकी रफ्तार का कोई मुकाबला नहीं है। उसे देखने के लिए भी काफी लोगों की भीड़ जुट रही है। मेले में खेड़ी सांपला निवासी विजयपाल की बछड़ी गौरी अपनी मां लक्ष्मी के साथ आई है। उसके साथ हरियाणा नस्ल के नंदी भोला और शिवा भी है। ये सूखा इलाके में भी अच्छा दूध देने के लिए जानी जाती है।
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