सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हैं जिनमें चावल के गोले बनाकर उन्हे जमीन पर पटका जा रहा है और उसे प्लास्टिक का बताया जा रहा है। अब इसकी सच्चाई देखिए
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'FAKE RICE' IS NOT PLASTIC
24 को वायरल हुआ था वीडियो
दरअसल, चंडीगढ़ में बीते 24 नवंबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दिखाया गया है कि एक युवक सेक्टर 16 हास्पिटल की कैंटीन में जाता है और वहां से खाने की एक प्लेट लेता है। प्लेट में दाल, चावल और रोटी है। चावल को उठाकर मुट्ठी में भरता है और उसे रोलकर गेंदनुमा गोला बनाता है। युवक उस गोले को मेज पर पटकता है तो गोला जमीन पर उछलता है। युवक का दावा है कि चावल में प्लास्टिक है, इसलिए वह उछलता है। वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद जीएमएसएच 16 और फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के अधिकारी हरकत में आए और कैंटीन में बिक रहे चावलों के सैंपल भरे।
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बस अड्डे की कैंटीन की भी आई थी शिकायत
यह वीडियो वायरल होने से पहले भी इसी तरह से 19 नवंबर को शिकायत आई थी कि बस अड्डे के पास की एक कैंटीन में प्लास्टिक के चावल बिक रहे हैं। उस दौरान शिकायत करने वाले युवक ने हंगामा भी किया था। बाद में फूड सेफ्टी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच के लिए सैंपल भरे। सैंपल फूड लैब में भेजे गए, मगर वहां भी कुछ नहीं मिला था। दूसरों प्रदेशों से भी ऐसी खबरें आ चुकी हैं, लेकिन अब तक किसी भी सैंपल में प्लास्टिक की बात सामने नहीं आई है।
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इसलिए उछलता है चावल का गोला
अधिकारियों का कहना है कि आजकल चावल कुकर में बनाए जाते हैं। इससे चावलों में थोड़ा बहुत पानी रहता है। चावलों में स्टार्च भी होता है। पानी और स्टार्च की मदद से चावल के रोल बनाए जा सकते हैं, क्योंकि स्टार्च चावल को बांध देता है। उसे आसानी से जमीन पर पटका जा सकता और वह उछलेगा भी। प्लास्टिक के चावलों का सवाल ही नहीं बनता। सामान्य तौर पर 40-50 रुपये किलो बिकने वाले चावल को अगर प्लास्टिक का बनाया जाए तो एक किलो चावल की लागत करीब 200 रुपये बैठेगी। ऐसे में कोई क्यों चार गुना घाटा सहकर नकली चावल बेचेगा।
तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में भी प्लास्टिक के चावल बिकने की सोेशल मीडिया में अफवाह फैलाई गई थी। बैंगलूरू स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस ने इस बारे में कुछ सैंपल टेस्ट किए थे, मगर टेस्ट में कुछ भी नहीं निकला। सभी दावे झूठे निकले। एग्रीकल्चरल साइंस यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स ने पाया कि जिन चावलों को प्लास्टिक का बताया जा रहा है उनमें प्लास्टिक का कोई तत्व नहीं है, बल्कि वे खराब क्वालिटी के हैं। नकली या प्लास्टिक के चावल बनाना संभव नहीं है।