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बोल मेरे पांसे... पंजाब में किसकी सरकार?

Mon, 06 Feb 2017 05:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बोल मेरे पांसे - फोटो : अमर उजाला
पंजाब विधानसभा चुनाव में शनिवार को जनता ने 77.37% मतदान कर अपना फर्ज निभा दिया है। अब सभी नज़रें 11 मार्च के चुनाव नतीजों पर हैं।  देखना है कि ऊंट किस करवट बैठता है? किस्मत के पांसे किस पर मेहरबान होते हैं? 117 विधानसभा सीटों के नतीजे आने के बाद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और ‌शिअद-भाजपा गठबंधन में से किसकी सरकार बनेगी? यह सवाल सबके मन में है। राजन‌ीतिक ‌विश्लेषक आंकड़ों और रूझान का हिसाब लगा रहे हैं। इस आंकलन में जो छह संभावनाएं बनती हैं वह इस तरह हैं...
 
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कांग्रेस की सरकार
वर्ष 2012 के चुनाव में कांग्रेस को 40 फीसदी से ज्यादा वोट मिला था। तब पीपीपी ने भी कांग्रेस के वोट में कुछ सेंध लगाई थी। इस बार समीकरण बदले नज़र आ रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के पक्ष में मत प्रतिशत की मामूली सी बढ़ोतरी भी उसे आसानी से पूर्ण बहुमत दिला सकती है। पिछली बार कांग्रेस को दोआबा और माझा में मुंह की खानी पड़ी थी। इस बार अमृतसर में सिद्धू फैक्टर सिर चढ़कर बोल सकता है। जालंधर और होशियारपुर में भी कहानी पलटती है तो कांग्रेस के हाथ दस साल बाद बड़ी लाटरी लग सकती है। 
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आप की सरकार
पिछले विधानसभा चुनाव में आप परिदृश्य में नहीं थी, मगर 2014 के लोकसभा चुनाव में चार सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी ने इतिहास रच दिया था। पार्टी ने 24.4 फीसदी वोट हासिल कर पंजाब में तीसरे विकल्प की नई हवा खड़ी की। मालवा के गांवों में जिस तरह आप ने पंथक वोटों पर पकड़ बनाई है, उससे शिअद की पारंपरिक जमीन में सेंध लगती नजर आई। एनआरआई के जरिए पार्टी ने दोआबा में भी मेहनत की है। यह पार्टी छुपा रूस्तम साबित हो सकती है और कोई भी चमत्कार करने में सक्षम है।

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शिअद-भाजपा हैट्रिक
राजनीतिक विश्लेषकों को इसकी संभावना काफी कम नज़र आ रही है। मगर पंजाब में सड़कों और बिजली को लेकर हुए ढांचागत विकास पर अगर जनता भरोसा जताती है या सस्ते घी-चीनी का चुनावी वादा जनता के सिर चढ़कर बोला तो शिअद और भाजपा गठबंधन एक बार फिर  पंजाब में सरकार बनाकर हैट्रिक लगा सकता है। अगर आम आदमी पार्टी शहरों में कांग्रेस वोट काटने में सफल रहती है तो भी ‌गठबंधन को लाभ मिल सकता है।
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आप की सरकार
अगर त्रिशंकु विधानसभा में आप की सीटें 45 से ज्यादा रहती हैं और कांग्रेस तथा शिअद-भाजपा गठबंधन 40 से कम पर सिमटते हैं तो ऐसे में भाजपा और शिअद राष्ट्रपति शासन चाहेंगे, मगर कांग्रेस इससे बचने के लिए आम आदमी पार्टी को बाहर से समर्थन की घोषणा कर सकती है। दिल्ली में केजरीवाल की पहली सरकार को कांग्रेस ने इस तरह से बाहर से समर्थन दिया था। हालांकि ऐसी सरकार कब तक चलेगी, यह कहना मुश्किल है।
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कांग्रेस की सरकार
अगर त्रिशंकु विधानसभा में कांग्रेस की सीटें 50 के आसपास और आप की 45 से ज्यादा रहती हैं तो कांग्रेस के समर्थन से बनने वाली आप की सरकार को रोकने के लिए कांग्रेस को सबसे बड़ा दल हाेने के नाते मुद्दों पर आधारित बाहर से समर्थन की बात शिअद गठबंधन कर सकता है।  ऐसी सरकार की उम्र भी ज्यादा लंबी नहीं होगी। जनाधार की लड़ाई में पानी आैर नशे जैसे मुद्दों पर समर्थन की बैशाखी हटाई जा सकती है। 
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राष्ट्रपति शासन
अगर 11 मार्च के नतीजे इस तरह पांसा फेंकते हैं कि कांग्रेस और शिअद-भाजपा गठबंधन को 40-40 से ज्यादा सीटें मिलती हैं आैर आम आदमी पार्टी 30 से नीचे रह जाती हैं। ऐसे में इसकी संभावना ब‌हुत कम हैं कि आम आदमी पार्टी किसी को समर्थन देगी। इन हालात में शिअद और भाजपा भी चाहेंगे कि राष्ट्रपति शासन लागू हो और राज्य में फिर से चुनाव करवाए जाएं।

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चुनाव में यदि किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता है तो सरकार बनाने के लिए उसका रास्ता पूरी तरह साफ होगा। इस स्थिति में उक्त राजनैतिक दल बहुमत के आधार पर सरकार बनाने का दावा पेश करेगा।
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लेकिन अगर किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है और त्रिशंक विधानसभा की स्थिति सामने आती है तो सभी राजनैतिक दलों को अपनी सीटों के आधार पर रणनीति बनाते हुए फैसला लेना होगा। जबकि राज्य में राष्ट्रपति शासन का भी एक विकल्प खुला होगा।
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