आप जो दूध पी रहे हैं, वह कहीं सिंथेटिक या नकली तो नहीं। संभल जाएं, आप बहुत बड़े खतरे में हैं इसलिए असली-नकली की पहचान होना बहुत जरूरी है, ऐसे करें।
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फेस्टिवल सीजन शुरू होते ही दूध की डिमांड बढ़ गई है। नकली मिठाइयां, पनीर और घी बनाने वाले गिरोह भी सक्रिय हो गए हैं। दूसरी तरफ, सेहत विभाग मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। अब तक राज्य के कई जिलों में ऐसे नकली सामान बनाने वाले लोग पकड़े भी जा चुके हैं, जो सर्फ, पॉम ऑयल, एसिड व अन्य हानिकारक पदार्थों का इस्तेमाल कर खाद्य पदार्थ तैयार कर रहे थे। सेहत विभाग की तरफ से ऐसे लोगों के खिलाफ केस दर्ज करवाए जा रहे हैं। साथ ही उन्हें गिरफ्तार तक किया जा रहा है।
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- फोटो : डेमो
दूसरी तरफ सेहत मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा पहले ही साफ कर चुके हैं कि अब मिलावटखोरों को बख्शा नहीं जाएगा। तुरंत सैंपलों की रिपोर्ट लेकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सेहत विभाग की तरफ से तंदरुस्त मुहिम के तहत रोजाना छापेमारी की जा रही है। विभाग की तरफ से अब तक 700 से ज्यादा दुग्ध उत्पादों के सैंपल लिए गए हैं। इनमें से 450 से ज्यादा सैंपल फेल हो चुके है। कुछ दिन पहले मोहाली में पकड़े गए नकली मिठाइयां व पनीर बनाने वाले गिरोह के सदस्यों ने खुलासा किया था कि उनका टारगेट छोटे दुकानदार होते हैं।
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डेमो
- फोटो : डेंमो
सस्ता होने के चलते दुकानदार खरीदते हैं इसे
मिलावटखोर कम लागत में मिलावटी सामान तैयार कर उसे सस्ते में दुकानदारों को बेचते हैं। यह सामान असली सामान की तुलना में काफी सस्ता होता है। इससे दुकानदारों को काफी फायदा होता है। बड़े फायदे के लिए दुकानदारों मिलावटी सामान खरीदते और बेचते हैं। बलौंगी पुलिस द्वारा पकड़े गिरोह से पता चला था कि वह 170 रुपये के हिसाब से मिलावटी पनीर बेचते थे जबकि मार्केट में असली पनीर 225 रुपये तक बिकता है।
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दूध चेक
- फोटो : SELF
खाना तो दूर छूने से हो सकता है इंफेक्शन
सेहत विभाग व पुलिस की जा रही चेकिंग में सामने आया है कि जिस जगह पर मिलावटी मिठाइयां व अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। वहां पर बैक्टीरियल काउंट सबसे अधिक होते हैं। ऐसे में इन मिठाइयों को खाना तो दूर छूने तक से इंफेक्शन हो सकता है।
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synthetic milk, mewat
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे करें सिंथेटिक दूध की पहचान
दूध को सुंघने पर अगर साबुन की महक आती है तो समझ लीजिए आपका दूध मिलावटी है। असली दूध में कोई गंध नहीं होती। दूध की एक या दो बूंद को चिकनी लकड़ी या पत्थर की सतह पर टपकाकर देखिए। अगर दूध बहता हुआ नीचे आ जाता है और सफेद धार सा निशान बना लेता है तो समझ लें दूध असली है। दूध में स्टार्च की मिलावट जांचने के लिए दूध में कुछ बूंदे टिंचर आयोडिन की डालें। अगर दूध का रंग नीला हो जाता है, तो समझ लीजिए उसमें स्टार्च की मिलावट है।
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एनडीआरआई करनाल 13 रुपये की किट ने लांच की है, जिससे दूध की गुणवत्ता का पता लगाया जा सकेगा। गुरुवार को मिल्क डे के अवसर पर राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के मिल्क पार्लर पर दूध में माल्टोडेक्सट्रिन की मिलावट की जांच की किट लांच की गई। मिलावट खोरों से निपटने के लिए डैलमो रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने इस स्ट्रीप बेसड किट को मार्केट में उतार दिया है। संस्थान के निदेशक डॉ. आरआरबी सिंह ने कहा कि इस किट के मार्केट में आ जाने से कुछ हद तक मिलावट पर अंकुश लगेगा।
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उन्होंने वर्ल्ड मिल्क डे की बधाई दी और क्वालिटी मिल्क फार हेल्दी लाइफ का स्लोगन दिया। डॉ. आरआरबी सिंह ने कहा कि किसानों की मेहनत और वैज्ञानिकों की सूझबूझ की बदौलत आज हिंदुस्तान 160 मिलियन टन दूध उत्पादन करके विश्व में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 7 से 8 प्रतिशत दूध ही सहकारिता क्षेत्र में प्रसंस्कृत किया जाता है। दुनिया के कुल दूध उत्पादन में 18 प्रतिशत योगदान हिंदुस्तान का है।
कंपनी के संयोजक मनोज कुमार मौर्य तथा बब्बर सिंह ने बताया कि इस समय एक स्ट्रीप की कीमत 13 रुपये रखी गई है। लोगों के रुझान को देखते हुए इसके दाम कम किए जा सकते हैं। ये स्ट्रीप एक प्लास्टिक की बोतल में रखी गई, एक बोतल में 100 स्ट्रीप हैं। एक स्ट्रीप की कीमत 13 रुपये है। इस स्ट्रीप की मैन्यूफैक्चरिंग डॉ. एके सिंह की देखरेख में टीबीआई-एनडीआरआई में ही की जा रही है।