देश में फैले स्वाइन फ्लू के वायरस की पहचान हो गई है। यह पूरी दुनिया में अब तक 10 हजार लोगों की जान ले चुका है। आप भी बचकर रहें, जानिए बचाव के उपाय।
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swine flu
पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी के चलते तापमान लगातार गिरता जा रहा है और स्वाइन फ्लू के केस भी सामने आने लगे हैं। बता दें कि इस बार मैक्सिकन स्ट्रेन एच1एन1 (हिमाग्लूटिनिन वन नूरामिनिडेज वन) वायरस ने हमला बोला है। इसकी पहचान 2009 में मैक्सिको की टीम ने की थी और उस समय पूरे विश्व में 17 हजार लोगों की जान गई थी। एक डॉक्टर के भी इससे ग्रस्त होने की पुष्टि हो चुकी है और दो संदिग्ध रोहतक पीजीआईएमएस में उपचाराधीन हैं।
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swine flu
- फोटो : Amar Ujala
एच1एन1 वायरस नया नहीं है, लेकिन इस बार मैक्सिकन स्ट्रेन अटैक कर रहा है। पीसीसीएम विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी की मानें तो यह 2015-16 में आया था, इसके बाद यह बदल गया था। डॉ. चौधरी के अनुसार एच1एन1 वायरस का चाल, चलन व चरित्र समय के हिसाब से बदलता रहता है। इसकी वैक्सीन है, लेकिन 60 प्रतिशत मरीजों पर यह कारगर नहीं है। संस्थान में टैमी फ्लू की व अन्य उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसलिए अब इससे अधिक घबराने की जरूरत नहीं है, यह कॉमन फ्लू हो गया है।
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एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे होने वाली मृत्यु दर एक प्रतिशत से भी कम है। अधिकांश उन मरीजों की उपचार के दौरान मौत होती है, जिनको स्वाइन फ्लू के साथ अन्य खतरनाक बीमारी भी होती है। चिकित्सक की मानें तो स्वाइन फ्लू से एक डॉक्टर ग्रस्त हुआ था और उसका उपचार निजी अस्पताल में हुआ था। केस हिस्ट्री में वह गोवा बाय एयर गया था। अब वह ठीक है और घर जा चुका है। इसके अलावा आपात विभाग में दो संदिग्ध मरीज आए हैं। उनका सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया गया है।
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हाथ मिलाने की बजाए करें नमस्ते
डॉ. ध्रुव चौधरी बताते हैं कि बीमारी को फैलने से बचाने के लिए हाथ मिलाने की बजाए नमस्ते करके काम चलाएं। इसके अलावा खांसते समय मुंह पर कपड़ा रखें और अपना हाथ साफ रखें। टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें। इसमें सबसे अहम भीड़ व सेंट्रल एसी से बचें। हवाई यात्रा इसके फैलने का प्रमुख कारण है। डॉ. चौधरी के अनुसार, इस वायरस से सीधे बचा नहीं जा सकता, क्योंकि यह हमारे वातावरण में है। इसके लिए जरूरी है कि हम एहतियात रखें और अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाएं। इसके लिए वैक्सीन है, जिसकी कीमत 700 रुपये व इससे ऊपर है। लेकिन यह शत प्रतिशत कारगर होगी कहा नहीं जा सकता।
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इनके लिए है अधिक खतरा
डायबिटीज, फेफडे़ में संक्रमण, हार्ट, लीवर, किडनी रोगी, ब्लड डिस्ऑर्डर जैसी बीमारी वाले मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इसके अलावा बुजुर्ग, गर्भवती, पांच साल से कम आयु के बच्चे स्वाइन फ्लू की चपेट में जल्दी आते हैं। पहले यह बीमारी सिर्फ सूअरों में पाई जाती थी, लेकिन इसने इंसानों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार, स्वाइन फ्लू एक तरह का संक्रामक रोग है, जो सांस के जरिए फैलता है।
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स्वाइन फ्लू
- फोटो : concept photo
स्वाइन फ्लू और उसके लक्षण
स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीज जब छींकता है या खांसता है तो वायरस हवा में फैल जाते हैं और आसपास के लोगों को अपनी चपेट में ले लेते हैं। संक्रमित होने के एक सप्ताह बाद इसके लक्षण नजर आते हैं। स्वाइन फ्लू मरीज के श्वसन तंत्र को बुरी तरह से प्रभावित करता है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज में तेज बुखार, ठंड लगना, गला खराब होना, मांसपेशियां व सिर में तेज दर्द होने के लक्षण पाए जाते हैं। इसके अलावा शरीर में कमजोरी होना भी इस बीमारी का लक्षण है।
कैसे करें बचाव
बचाव के लिए बुखार, खांसी, जुकाम पीड़ितों से दूर रहें। इसके अलावा अगर आपके आसपास कोई छींकता है या खांसता है तो नाक व मुंह पर रुमाल रख लें। अपने हाथ-मुंह को दिन में साबुन के साथ जरूर साफ करें। बीमारी के लक्षण नजर आते ही सबसे पहले अस्पताल में टेस्ट करवाने के बाद उपचार लें। ज्यादा से ज्यादा गर्म पानी पीने की कोशिश करें। इसके अलावा आलू, चावल व दही का प्रयोग कम से कम करें।