बुलंद हौसले के बूते एक बेटी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट तक नाप डाली, लेकिन सरकार की उपेक्षा ने उसका रास्ता रोक दिया। देखिए, कौन हैं ये?
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एक ऐसी बेटी, जिसने माउंट एवरेस्ट जीता पर सरकार से हारी
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बात कर रहे हैं हरियाणा के रेवाड़ी जिले की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एंबेसडर सुनीता चौकन की। बेटी के चर्चे दूर तक हुए, परंतु आश्वासन के बाद भी उसे नौकरी नहीं मिली। मजबूरी में उसे हरियाणा की चौखट भी लांघनी पड़ी और इस समय वें देहरादून में प्राइवेट नौकरी कर रही हैं।
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एक ऐसी बेटी, जिसने माउंट एवरेस्ट जीता पर सरकार से हारी
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में सुनीता ने आरोप लगाया कि 2011 में माउंट एवरेस्ट फतह करने के बाद उनको तत्कालीन हरियाणा सरकार ने सरकारी नौकरी के तौर पर पुलिस में डीएसपी रैंक का आश्वासन दिया था, परंतु अभी तक कहीं कोई नौकरी नहीं दी।
एक ऐसी बेटी, जिसने माउंट एवरेस्ट जीता पर सरकार से हारी
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उसी दौरान एवरेस्ट फतह करने वाली एक अन्य पर्वतारोही महिला को हरियाणा पुलिस में डीएसपी बनाया भी गया। इसके बाद 2013 में खेल कोटे से एडवेंचर स्पोर्टस को हटा दिया। पूर्व की सरकार ने उसकी जिंदगी के तीन साल जाया कर दिए। अब इस सरकार से कुछ उम्मीद है।
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बेटी के ब्रांड एंबेसडर बनाए जाने पर मूल रूप से बावल के रहने वाले उसके पिता जौहरी सिंह को खुशी तो है, लेकिन दर्द उनके दिल में भी कम नहीं हैं। मंच पर ही खड़े होकर वे बेटी की शादी में आने वाली परेशानियां बयां करते हैं।