सलमान खान की फिल्म जुड़वा तो आपने देखी होगी, अब 'जुड़वा' की सच्ची घटना अब सामने है, जहां जानें दो हैं लेकिन शरीर एक। देखिए
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sohna mohna
दो जानें और दो मुंह, लेकिन पेट एक ही। सोणा-मोहणा दुनिया के इकलौते ऐसे जुड़वा भाई हैं, जिनमें कोई छोटा-बड़ा नहीं है। एक को खिचड़ी पसंद है, तो दूसरे को खीर। दोनों एक साथ दो अलग-अलग व्यंजन खाते हैं, लेकिन पेट एक ही है।
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एक को चाय पसंद तो दूसरे को कॉफी। एक देर रात तक टीवी देखना चाहता है तो दूसरा जल्दी सोना चाहता है, लेकिन दोनों मजबूर हैं। दोनों भाइयों के बीच इस बात पर समझौता हो गया है कि कोई ऐसी चीज न खाई जाए, जिससे पेट खराब हो जाए। दोनों को जागना पड़ता है। एक को देर रात तक जागना अच्छा लगता है, तो दूसरे को सोना। ऐसे में शामत पेट और लात की आती है। दोनों लड़ते भी हैं, लेकिन चलते एक साथ हैं।
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दोनों ने मंगलवार को अपना 15वां जन्मदिन मनाया। ऑल इंडिया पिंगलवाड़ा चैरिटेबल ट्रस्ट की संचालिका डॉ. इंद्रजीत कौर ने बताया कि वे बच्चों को दिल्ली से अमृतसर लाई थी। दोनों आज खुश हैैं। डॉ. इंद्रजीत के अनुसार सोणा-मोहणा दो चेहरे, चार हाथ अलग-अलग दो दिमागों के कंट्रोल से अलग-अलग चलते हैं। पैर दो हैं, इसलिए एक समय में दो दिमाग अलग-अलग दिशाओं में उन्हें दौड़ने पर मजबूर करते हैं।
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आपस में जुड़े भाई सोहणा और मोहणा
पेट एक है, लेकिन स्वाद दो। सोहणा सर्दी में चाकलेट खाता है तो मोहणा चाय पीता है। दिल्ली के सुचेता कृपलानी अस्पताल में 13 जून 2013 बच्चों ने जन्म लिया। डॉक्टरों ने कहा था कि ऐसे बच्चों को सिर्फ वाहेगुरु ही जिंदगी दे सकते हैं, साइंस कहती है कि 24 घंटे के भीतर ऐसे बच्चे जिंदा नहीं रहते।
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आपस में जुड़े भाई सोहणा और मोहणा
यह बात पिंगलवाड़ा तक पहुंची। डॉ. इंद्रजीत ने बताया कि जब वे पहली बार सोहणा-मोहणा से मिली तो उन्हें लगा कि कुदरत की इस खूबसूरत देन को जिंदा रखने के लिए जरूरत पड़ी तो अपनी सांसें भी दे दूंगी। वाहेगुरु का नाम लेकर पिंगलवाड़ा ने सोहणा-मोहणा को ‘पिंगलवाड़ा के सपू’ का खिताब दिया। मंगलवार को सोहणा-मोहणा के 15वें जन्मदिन पर बच्चों को चाकलेट बांटी गई। उन्होंने कहा कि बच्चों ने बटर चाकलेट खाने की इच्छा जताई। इन बच्चों की किडनी, लीवर, ब्लेडर जुड़े हुए हैं, जबकि सिर, छाती, दिल, फेफड़े व रीढ की हड्डी अलग-अलग है।
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आपस में जुड़े भाई सोहणा और मोहणा
बड़े प्रतिभावान होते हैं ऐसे बच्चे : डॉ. शुक्ला
प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. अमित शुक्ला का कहना है कि ऐसे बच्चे बहुत प्रतिभावान होते हैं। साइंस कहती है कि ऐसे बच्चे जिंदगी को आम इंसानों से कहीं बेहतर सोच सकते हैं। ऐसे बच्चे दो लाख बच्चों में एक होते हैं, अधिकांश बच्चे 24 घंटे में ही दुनिया छोड़ देते हैं। उनका कहना है कि सोहणा-मोहणा वाहेगुरु जी के जाप और पिंगलवाड़ा के आंगन का फूल बनकर खिल रहे हैं। इन बच्चों पर मेडिकल साइंस के लिए रिसर्च करानी चाहिए।
बीजी के पीजी में सोहणा-मोहणा
डॉ. इंद्रजीत कौर को बच्चे बीजी कहते हैं। डॉक्टर का कहना है कि यह मेरा पीजी है। पेइंग गेस्ट और ऐसे पेइंग गेस्ट जिनसे में ममता का किराया वसूलती हूं, लेकिन खुशियों का आंगन देकर मां और बाप दोनों का प्यार देती हूं। आज सोहणा ने चाकलेट मांगी थी तो मोहणा जिद करने लगा कि खीर खानी है। दोनों का पेट एक है लड़ाई केवल खाने-पीने की होती है, लेकिन समझौता विचारों का नहीं होता।