पठानकोट एयरबेस पर जनवरी 2016 में हुए आतंकी हमले के बाद से विवादों में आए SP सलविन्दर सिंह की छुट्टी हो सकती है। लेकिन पंजाब पुलिस का ये एसपी सवालों में है क्यों, इस इनसाइड स्टोरी में देखिए पूरा सच
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पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले से ठीक दो दिन पहले 31 दिसंबर और 1 जनवरी की दरमियानी को गुरुदासपुर के एसपी सलविंदर सिंह का आंतकवादियों ने उनके गनर व कुक के साथ उस वक्त अपहरण कर लिया था, जब वे धार्मिक स्थल के दर्शन करके लौट रहे थे।
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एसपी के साथ गुरदासपुर के जूलर राजेश वर्मा और उनके कुक मदन लाल थे। सेना की वर्दी में पांच अपराधियों ने गुरुवार आधी रात के बाद को इनका अपहरण किया था। आतंकियों ने एसपी सलविंदर सिंह और उनके लवाजमे को उन्हें करीब 15 किलोमीटर दूर ले जाकर एक-एक करके छोड़ दिया गया। यही नहीं, वहशी आतंकियों ने अपहरण स्थल से कुछ ही दूरी पर 24 वर्षीय युवक इकागर सिंह की तेजधार हथियार से हत्या कर दी गई।
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अपहरणकर्ताओं ने एसपी को तो अपहरण के बाद छोड़ दिया गया, लेकिन उनके गनर को आतंकवादी कुछ दूर घायल अवस्था में जंगल में फेंककर चले गए थे। तब एसपी ने दिया था यह बयान : एसपी सलविंदर सिंह ने कहा था कि उन्हें पठानकोट के गांव कोहलियां और कठाना के बीच से अगवा किया था। अगवा करने वालों की संख्या पांच थी। उनके पास एक 47 भी थे।
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अपहरणकर्ताओं ने करीब पंद्रह किमी दूर ले जाकर पहले उन्हें, इससे कुछ दूरी पर कुक को और अंत में जूलर को छोड़ दिया। अपहरणकर्ताओं ने एसपी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया, लेकिन राजेश वर्मा व मदन लाल को तेजधार हथियारों से घायल कर दिया। घटनास्थल से कुछ दूरी से एसपी की गाड़ी भी बरामद हुई थी। जिस स्थल से एसपी को अगवा किया गया, उसी के नजदीक से 24 वर्षीय युवक इकागर सिंह का शव भी मिला। शव से जाहिर होता है युवक की तेजधार हथियारों से हत्या की गई है।
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यहीं से कुछ दूरी पर युवक की इनोवा कार भी बरामद हुई है। अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटे एसपी ने अपने अपहरण की शंका आतंकियों पर जताई, लेकिन पंजाब पुलिस ने उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। पंजाब सशस्त्र पुलिस की 75वीं बटालियन में सहायक कमांडेंट के तौर पर पदस्थ सलविंदर को आतंकवादी हमले से कुछ दिन पहले ही गुरदासपुर के पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) पद से स्थानांतरित किया गया था और अनुशासनहीनता के आरोप लगे थे।
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पंजाब पुलिस को लगा कि शायद एसपी मनगढ़ंत कहानी रच रहे हैं। पंजाब में ड्रग का कारोबार तेजी से फैल रहा है। इन ड्रग कारोबार के आड़ में ही पाकिस्तान के आतंकी संगठन भारत में दहशत फैलाते हैं। सलविंदर ने पूछताछ में यह कबूल किया था कि ड्रग्स की हर खेप की एवज में उन्हें हीरे की ज्वैलरी मिलती थी। उसका ज्वैलर फ्रैंड राजेश इन डायमंड का टेस्ट कर बताता था कि ये नकली हैं या असली?
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खबरों के मुताबिक ड्रग्स की खेप के बदले गोल्ड या डायमंड लेते थे और इसी स्टोर के जरिए बेच देते थे। सवाल यह भी उठा कि सलविंदर और उनका दोस्त राजेश वर्मा क्या 31 दिसंबर को बॉर्डर के पास धार्मिक स्थल के दर्शन करने गए थे?
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एसपी सलविंदर सिंह के साथ राजेश वर्मा भी थे। उन्हें घायलावस्था में ही आतंकियों ने छोड़ दिया था। राजेश वर्मा ने बयान दिया था कि आतंकी संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की मौत का बदला लेने आए थे। कार में सवार सेना की वर्दी पहने छ: आतंकवादियों में से चार हथियारों से लैस तथा दो बिना हथियार के थे। वो गाड़ी चला रहा था इसलिए आतंकवादियों ने उसे एसपी समझ लिया और अपने साथ ले गए तथा एसपी और कुक को रास्ते में फेंक दिया।
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इन्होंने जूतों के फीतों से उसके हाथ पैर बांधकर पठानकोट के पास गला रेतकर मरा समझकर फेंक दिया। खूफिया एजेंसियों को बताई थी बात : राजेश वर्मा ने बयान दिया था कि मैंने पुलिस तथा खुफिया एजेंसियों को पूरी बात बताई लेकिन किसी ने उसकी बात पर यकीन नहीं किया, बल्कि पंजाब पुलिस ने उसे जलील किया। सारे दिन वह यही रट लगाता रहा कि वे आतंकवादी थे लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया।
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राजेश वर्मा का कहना है कि 'इतना बड़ा हमला होने से बच जाता यदि मेरी बात पर एतबार कर लिया गया होता'। आतंकियों के अपहरण से सलविंदर सिंह का जिंदा बच जाना भी कई सवाल खड़े करता है। एसपी का कहना है कि आतंकी उन्हें पहचान नहीं पाए, इसलिए उन्हें जिंदा छोड़ दिया गया। एनआईए को पूछताछ में एसपी और उनके रसोइए के बयानों में विरोधाभास मिला।
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पठानकोट आतंकी हमले के बाद एसपी सलविंदर सिंह ने कहा था कि उन्हें आतंकवादियों ने अगवा किया था। आतंकवादियों ने उन्हें घने जंगल में फेंक दिया और उनकी नीली बत्ती लगी आधिकारिक एसयूवी लेकर फरार हो गए थे। बाद में आतंकी इसी एसयूवी में सवार होकर पठानकोट पहुंचे। एसपी की वह एसयूवी पठानकोट में वायुसेना ठिकाने से करीब 1.5 किमी दूर पाई गई थी। जांच एजेंसी को एसपी के बयानों पर शक हुआ है। उन्होंने कई बार अपने बयान बदले हैं, जिसमें उन्होंने आतंकियों की संख्या बार-बार अलग-अलग बताई है।
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एक वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते उनके पास पहले से ही आतंकियों की घुसपैठ की खुफिया सूचना थी। उसी शाम पंजाब पुलिस ने आतंकी हमले की आशंका जताते हुए सभी पुलिस अधिकारियों को रात में निगरानी रखने के निर्देश दिए थे। सलविंदर सिंह का कहना है कि जिस समय उनका अपहरण किया गया, उस समय वे पठानकोट के धार्मिक स्थल के दर्शन कर लौट रहे थे, लेकिन गुरुवार देर रात अपने एक ज्वेलर दोस्त और कुक के साथ उनके भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास बिना सुरक्षा गार्ड के जाना उन पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आतंकियों की संख्या भी हर बार पूछताछ में अलग-अलग बताई।
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Pathankot Attack
एनआईए ने तलाशी में एसपी की गाड़ी से एक चाइनीज वायरलेस सेट रिकवर किया, जिसका डाटा आतंकियों ने डिलीट कर दिया है। डाटा को दोबारा निकालने के लिए इसे तकनीकी निगरानी करने वाली खुफिया एजेंसी (एनटीआरओ) के फारेंसिक लैब में भेजा गया
हालांकि जांच के बाद सलविंदर एनआईए की चार्जशीट में गवाह बनाया गया था लेकिन गृह मामलों की स्थायी संसदीय समिति ने हैरानी व्यक्त की थी कि आतंकी सलविंदर को साथ क्यूं लेकर गए थे। इस समिति ने यह भी कहा था कि सरकार आतंकियों के सीमा पार से प्रवेश में ड्रग स्मगलरों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।