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SP बोले, अगर मेरी बात मानी होती तो न होता आतंकी हमला

Wed, 06 Jan 2016 09:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
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आतंकी हमले से पहले अगवा हुए एसपी सलविंदर सिंह ने कहा है कि अगर उनकी बात पर यकीन किया जाता तो यह हमला टल सकता था।
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एसपी ने बताया कि 31 दिसंबर की रात को वह अपने नौकर और एक दोस्त ज्वैलर राजेश के साथ नरोट जैमल सिंह में मजार पर माथा टेककर लौट रहे थे। फतेहपुर कोलियां के पास आर्मी की वर्दी पहने कुछ हथियारबंद लोगों ने गाड़ी रुकवाई और उनका अपहरण कर लिया।
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अपहरणकर्ता आपस में हिंदी, उर्दू और पंजाबी में बात कर रहे थे। हालांकि वह उनकी बातचीत नहीं सुन पाए, क्योंकि उनके हाथ पांव बांधकर उनको गाड़ी की पिछली सीट पर धकेल दिया गया था। थोड़ी दूर आगे जाकर उन्हें और उनके नौकर के हाथ-पांव और आंखों पर पट्टी बांध कर गाड़ी से बाहर फेंक दिया गया।

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आरोपी राजेश को अपने साथ ले गए। काफी मशक्कत के बाद वह अपने हाथ-पांव खोलने में सफल हुए। जैसे ही उन्होंने अपने आंखों से पट्टी हटाई तो देखा कि आसपास जंगल है। वह पास में एक नाला पार करके वह गांव सिमली पहुंचे और वहां से किसी तरह थाना कानवां गए।
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एसपी के मुताबिक वहां उन्होंने पुलिस को पूरी आपबीती सुनाई लेकिन पता नहीं क्यों पुलिस ने उनकी बात का विश्वास नहीं किया। एसपी सलविंदर सिंह ने एसएसपी गुरदासपुर गुरप्रीत सिंह तूर पर भी कई आरोप लगाए। एसएसपी गुरदासपुर उनसे रंजिश रखते हैं। जब उनसे इस रंजिश के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब सिर्फ एसएसपी तूर ही दे सकते हैं।
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एसपी सलविंदर सिंह ने फोन पर बताया कि उनका तबादला भी रंजिशन किया गया है। उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। कुछ महिला कर्मचारियों ने उन पर सख्ती बरतने और ड्यूटियां गलत लगाने के खिलाफ उनके खिलाफ जो शिकायत दी थी, उसकी जांच में उनका बयान तक नहीं लिया गया। यह कार्रवाई एकतरफा हुई है। वह किसी मामले में संलिप्त नहीं है।
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वो शख्स और कोई नहीं बल्कि गुरदासपुर के एसपी का दोस्त राजेश था जो उस दिन उनके साथ था जब एसपी को आतंकियों ने किडनैप किया था। आतंकी उसे चाकू मारकर उसे मरा समझकर खेतों में फेंककर  भाग गए थे।

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राजेश ने बताया कि एसपी सलविंदर की गाड़ी को वह ही चला रहा था। कोलियां गांव के पास उनकी गाड़ी को आर्मी की वर्दी पहने 4 आतंकियों ने रुकने का ईशारा किया। मैने सोचा कि आर्मी चैकिंग है, इसलिए गाड़ी रोक दी। गाड़ी रुकते ही आतंकी उसकी कनपटी पर बंदूक रख अंदर घुस आए और एसपी के हाथ बांधकर पिछली सीट पर रसोइये मदनलाल के साथ उन्हें पिछली सीट पर बैठा दिया।

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राजेश के मुताबिक गाड़ी में आतंकी पंजाबी में बात कर रहे थे। कह रहे थे, जिसकी कार छीनी, उसे तो मार दिया। टारगेट तक पहुंचने में और समय बर्बाद नहीं कर सकते। बात करते करते इतने में एसपी और कुक में उन्होंने गाड़ी के बाहर फेंक दिया। उससे पूछा कि यह कौन थे? जब उसने एसपी सलविंदर का परिचय दिया तो आतंकियों को नहीं पता था एसपी कौन होता है?

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राजेश ने आगे बताया कि आतंकी के पूछने पर उसने बताया कि एसपी पुलिस का बड़ा अफसर होता है। उनमें से एक ने पाकिस्तान फोन कर बताया कि जो गाड़ी उन्होने छीनी थी, वह बड़े अफसर की थी। इस पर दूसरी तरफ से उन्हें सलविंदर को मारने के निर्देश मिले। आतंकियों ने गाड़ी वापस मुड़वाई और उस जगह पहुंचे जहां सलविंदर सिंह को फेंका गया था।
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राजेश ने बताया कि जब ढूंढ़ने पर सलविंदर सिंह न मिले तो आतंकियों ने वापस गाड़ी में बैठकर मुझे अकालगढ़ की ओर मुड़वा लिया। अकालगढ़ में गाड़ी खेतों में रुकवाकर उसके गले पर चाकू मार दिया। आतंकी मुझे मरा समझ एयरफोर्स की बाउंड्री वाल की ओर भाग गए। मैंने गर्दन पर शर्ट का टुकड़ा बांधा और गुरुद्वारे जा रहे आदमी के फोन से जीजा राजकुमार को कॉल की। राजकुमार ने पुलिस को सूचित किया।”
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