न समाज की सुनी, न परंपरा आड़े आने दी। पिता की अंतिम इच्छा जो पूरी करनी थी। 3 बेटियों ने ही निभाया बेटे का फर्ज। तस्वीरें।
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पिता की अर्थी को तीन बेटियों ने दिया कंधा
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के रोहतक के डेयरी मोहल्ले की तीन बेटियों ने भी पिता की अंतिम इच्छा के लिए हिंदू धर्म की मान्यता को तोड़कर उनका अंतिम संस्कार किया। इस काम में बहू ने भी अपनी तीनों ननद का साथ दिया।
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पिता की अर्थी को तीन बेटियों ने दिया कंधा
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जानकारी के मुताबिक डेयरी मोहल्ला निवासी बिजली मैकेनिक बलबीर सिंह का बेटा दो साल से घर से लापता है। ऐसे में पिता की भी अंतिम इच्छा थी कि उसकी बेटियां ही मौत के बाद अर्थी को कंधा दें। बमुश्किल से परिवार का गुजर बसर चल रहा था।
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पिता की अर्थी को तीन बेटियों ने दिया कंधा
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परिवार में सबसे बड़ी बेटी किरण है। इसके अलावा दो और बेटियां कमलेश और गीता हैं। तीनों की शादी हो चुकी है। बेटा राधेश्याम शादी समारोह में डीजे किराए पर देने का काम करता था। दो साल पहले वह लापता हो गया। ऐसे में घर में बहू बिंदू और पोता अरमान ही रह गए।
पिता की अर्थी को तीन बेटियों ने दिया कंधा
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कुछ दिन पहले से बीमार चल रहे बलबीर सिंह ने अचानक दम तोड़ दिया। मौत की सूचना पर किरण, कमलेश व गीता पहुंच गई। तीनों बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा देने की बात कही। परिवार व समाज के लोगों ने विरोध किया, लेकिन तीनों बेटियां पीछे नहीं हटीं और अर्थी को कंधा दिया।