एक छुट्टी और पिकनिक पर जाने का मूड है, तो चंडीगढ़ के पास इन छह जगहों पर जा सकते हैं। यहां से आप एक दिन में ही पिकनिक मनाकर वापस आ सकते हैं।
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पिकनिक स्पॉट
शायद ही याद हो कि कब एक दिन के लिए परिवार के सदस्य या दोस्त घर का खाना बनाकर दूर किसी ऐसी जगह पर गए हों, जो शहर के शोरगुल से दूर प्रकृति के गोद में हो। जहां चारों तरफ हरियाली, पक्षियों की कानों में मिसरी घोलने वाली मीठी आवाज, पहाड़, शुद्ध हवा और रोमांच का संगम हो। यदि नहीं गए तो अब तैयारी कर लीजिए। गर्मी, बारिश के बाद जो मौसम आया है, वह पिकनिक के लिए बहुत ही बेहतरीन है। जाना कहां है, उसके लिए भी माथापच्ची करने की जरूरत नहीं है। हम आपको ऐसी जगह बताते हैं, जहां एक दिन की पिकनिक मनाकर आप वापस आ सकते हैं। ....तो भी देर किस बात की हो जाइए तैयार।
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पिकनिक स्पॉट
मोरनी का नेचर म्यूजियम
हरियाणा का एक मात्र हिल स्टेशन मोरनी में मुगलकालीन किले को नेचर म्यूजियम में बदल दिया गया है। चंडीगढ़ से करीब 40-45 किलोमीटर यह जगह प्रकृति, कला और जंगल का एक अनूठा संगम है। किले की दीवारों और गुंबद में कुछ इस तरह से स्कल्पचर बनाए गए हैं, मानो आप किसी जानवर के नीचे खड़े हो। मिसाल के तौर पर प्रकृति की उत्पत्ति विकास और विनाश की ओर इशारा करते सात ऐसे म्यूरल बनाए गए हैं, जिन्हें देखकर कोई भी वन्य जीवों पर बढ़ रहे खतरों पर चिंता में पड़ सकता है। यहां पर अपने व्हीकल या बस से आसानी से जाया जा सकता है।
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चंडीगढ़ में सुखना लेक का एक दृश्य
- फोटो : फाइल फोटो
सुखना लेक जैसी लेक यहां भी है
सुखना लेक पर बोटिंग कर के अगर बोर हो चुके हैं तो एक बार मोरनी के टिक्कर ताल का चांस ले सकते हैं। पहाड़ियों के सटी लेक पर बोटिंग के साथ प्रकृति के खूबसूरत नजारे आपकी सारी थकान दूर कर देंगे। खाने के लिए बेहतरीन स्नैक्स बार हैं। इसके लिए दो रास्ते हैं। पहला, नाडा साहिब गुरुद्वारा की तरफ से और दूसरा चंडी मंदिर टोल प्लाजा से राइट टर्न लेकर। चंडीगढ़ से यह करीब 35-40 किलोमीटर दूरी पर है।
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पिकनिक स्पॉट
सोलन की डगशई जेल
चंडीगढ़ से करीब 60 किलोमीटर दूर सोलन स्थित डगशई जेल है। यहां जाने में सिर्फ दो घंटे लगते हैं। यहां अंग्रेजों की सरकारी जेल हुआ करती थी। महात्मा गांधी भी एक दिन इस जेल में रहे थे। कठोर सजा देने के लिए एक अलग से जेलखाना होता था। इसमें इतनी कम जगह होती थी कि कैदी सिर्फ एक जगह पर खड़े होने को मजबूर होता था। न तो बैठ सकता था और न ही हिल सकता। इसे देखने और पढ़ने के बाद आप समझ पाएंगे कि उस दौर में कितनी कठोर सजा और यातनाएं दी जाती थीं। यहां पर पुराने चर्च, कैंटोनमेंट, जेल सहित कई एतिहासिक स्थल हैं।
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कुतुब मीनार से भी ऊंचा है यह 'फतेह बुर्ज'
- फोटो : File Photo
चप्पड़चिड़ी का फतेह बुर्ज
चंडीगढ़ से करीब 12-15 किमी दूर चप्पड़चिड़ी स्थित फतेह बुर्ज की ऊंचाई करीब 328 फीट है, जबकि कुतुब मीनार की ऊंचाई 239.5 फीट। शहर के शोरशराबा और प्रदूषण से दूर नया पर्यटन स्थल विकसित हो गया है। सालों पहले यहां पर बाबा बंदा सिंह बहादुर ने सरहिंद के सूबेदार वजीर खान को मौत के घाट उतारकर छोटे साहिबजादों की मौत का बदला लिया था। इसकी कोई एंट्री फीस नहीं है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां ओपन एयर थिएटर के साथ कैफेटेरिया भी है। बुर्ज के दरवाजे हेरिटेज स्टाइल के हैं। बुर्ज के नजदीक ही एक तालाब भी बनाया गया है।
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आनंदपुर साहिब का विरासत-ए-खालसा
चंडीगढ़ से करीब 80 किलोमीटर दूर आनंदपुर साहिब में स्थित विरासत-ए-खालसा में सिख इतिहास और पंजाबी सभ्याचार का विस्तृत विवरण मिलता है। इसे देखने के बाद हर किसी का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। यहां पर वीडियो और आडियो के जरिए सिख धर्म की स्थापना और बाद में बने खालसा पंथ से जुड़ी घटनाओं को देख और सुन सकते हैं। बहुत ही शांत जगह है। अंदर एक लेक है। यहां पर बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं। पंजाब शिक्षा विभाग हर साल अपने स्टूडेंट को विरासत-ए-खालसा की सैर कराते हैं।
मोहाली का छतबीड़ जू
पिकनिक के लिए छतबीड़ जू भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। कुल 110 रुपये में पूरे दिन यहां पर जानवरों के बीच अपना समय व्यतीत कर सकते हैं। 60 रुपये एंट्री फीस है और 50 रुपये लायन सफारी के हैं। बर्ड शाखा में सुंदर-सुंदर पक्षी हैं। चार हाथियों का एक झुंड है। अमन और दिया टाइगर की जोड़ी है। हर 500 मीटर की दूर पर खाने की कैंटीन है। बैठने के लिए शेड है। टाइमिंग सुबह नौ से शाम पांच बजे तक है।