पंजाब में एक ऐसे महाराजा हुए हैं, जिनके साल में दो जन्मदिन मनाए जाते हैं। दो पुण्यतिथियां हैं और दो स्थानों को उनका जन्मस्थान माना जाता है। देखिए, कौन हैं ये महाराजा।
ये महाराजा हैं शेरे-पंजाब रणजीत सिंह। हर साल 2 और 13 नवंबर को इनका जन्मदिवस मनाया जाता है। 27 और 29 जून को इनकी बरसी मनाई जाती है। उनका जन्म गुजरांवाला में हुआ या बडरूखा में। सबके जवाब प्रमाणिक दस्तावेजों सहित हमारे सामने है।
शोधकर्ता सुरेंद्र कोछड़ ने बताया कि जरूरत महज सिख विद्वानों के एकमत होकर इन सवालों के सही जवाब पर मोहर लगाने की है। जब तक इन सवालों के जवाब सामने नहीं आ जाते तब तक महाराजा रणजीत सिंह से संबंधित इतिहास को पूर्ण नहीं माना जा सकता।
महाराजा रणजीत सिंह की 176वीं बरसी पर इतिहास शोधकर्ता सुरेंद्र कोछड़ ने बताया कि 59 वर्ष तक जिंदा रहे महाराजा ने 23 हिंदू, सिख तथा मुस्लिम महिलाओं से शादी की, जबकि उनके पुत्र महाराजा दलीप सिंह ने निजी डायरी में लिखा कि उसे गर्व है कि 42 रानियों का सुपुत्र हैं।
महाराजा रणजीत सिंह के आठ सुपुत्रों, शहजादा खड़क सिंह, ईशर सिंह, शेर सिंह, तारा सिंह, मुल्ताना सिंह, कश्मीरा सिंह, पिशौरा सिंह तथा शहजादा दलीप सिंह में से किसी एक का भी ऐसा वारिस बरसी के कार्यक्रम के दौरान मौजूद नहीं है, जिसकी रगों में रणजीत सिंह का खून दौड़ रहा हो।
कोछड़ ने कहा कि मौजूदा समय में कुछ लोग महाराजा रणजीत सिंह के वंशज होने का दावा करते हुए उनकी संपत्ति हथियाने के इरादे से जिस प्रकार इतिहास को तोड़-मोड़ कर पेश कर लोगों को गुमराह करने के प्रयास कर रहे हैं, ये सिख इतिहास के लए अच्छे संकेत नहीं हैं।
ऐसी कार्रवाईयों से सिख राज्य तथा विशेष तौर पर महाराजा रणजीत सिंह से संबंधित सम्पूर्ण सिख इतिहास पर प्रश्न-चिन्ह लगने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। सिख विद्वानों तथा विशेष तौर पर श्री अकाल तख्त साहिब व एसजीपीसी को ऐसे लोगों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।