‘सांसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम...’। मीरा बाई के इस भजन पर कुचिपुड़ी नृत्यांगना शालू जिंदल ने कदम ताल मिलाई तो सभी की सांसें थम गई।
विज्ञापन
सांसों की माला पे सिमरूं में पी का नाम...देख जब थम गई सांसें
2 of 6
टैगोर थियेटर में परफॉर्म करती शालू जिंदल
- फोटो : अमर उजाला
मीरा के इस भजन में भगवान कृष्ण के प्रति उनका असीम प्रेम दर्शाया गया है। सूफी गायक नुसरत फतेह अली खान ने सूफी संत अमीर खुसरो और मीरा के इन बोलों को मिलाकर इस भजन को बनाया था।
विज्ञापन
सांसों की माला पे सिमरूं में पी का नाम...देख जब थम गई सांसें
3 of 6
टैगोर थियेटर में परफॉर्म करती शालू जिंदल
- फोटो : अमर उजाला
इसी गीत पर क्लासिकल डांसर शालू ने कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। प्राचीन कला केंद्र की ओर से टैगोर थियेटर में आयोजित 46वां नृत्य एवं संगीत सम्मेलन 24 मार्च तक आयोजित की जा रही है।
सांसों की माला पे सिमरूं में पी का नाम...देख जब थम गई सांसें
4 of 6
टैगोर थियेटर में परफॉर्म करती शालू जिंदल
- फोटो : अमर उजाला
टैगोर थियेटर में सोमवार को कुचिपुड़ी नृत्यांगना शालू जिंदल और बांसुरी वादक पंडित चेतन जोशी ने प्रस्तुति दी। इन दोनों कलाकारों की प्रस्तुतियों को देखने के लिए कई कलाप्रेमी पहुंचे थे।
विज्ञापन
सांसों की माला पे सिमरूं में पी का नाम...देख जब थम गई सांसें
5 of 6
टैगोर थियेटर में परफॉर्म करती शालू जिंदल
- फोटो : अमर उजाला
शालू जिंदल ने कुचिपुड़ी नृत्य की प्रस्तुति सुप्रभातम् से की। यह पद भगवान वेंकटेश्वर की आराधना में गाए जाते हैं। इसके बाद जिंदल ने ‘सांसों की माला’ में मीरा के भगवान कृष्ण के प्रति असीम प्रेम को प्रदर्शित किया।
सांसों की माला पे सिमरूं में पी का नाम...देख जब थम गई सांसें
6 of 6
टैगोर थियेटर में परफॉर्म करती शालू जिंदल
- फोटो : अमर उजाला
क्लासिकल डांस एक तपस्या है, इसमें बहुत अनुशासन होता है। रोजाना अभ्यास करना पड़ता है। यह भगवान की भक्ति करने जैसा है, इससे मिलने वाली उर्जा से ही अन्य काम करने की शक्ति मिलती है। बिना डांस मुझे जीवन में काफी खालीपन सा लगता है। यह कहना है शालू जिंदल का।