2 साल की मेहनत के बाद एक लड़की ने महिलाओं के प्रति बढ़ते सेक्सुअल अपराध पर लगाम लगाने के लिए एक कमाल के गैजेट का अविष्कार किया गया है। देखिए इसकी खूबियां...
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महिलाओं को शारीरिक शोषण से बचाएगा सेंसर स्टीकर
सिटी ब्यूटीफुल की बेटी ने महिलाओं के प्रति बढ़ते सेक्सुअल अपराध पर अंकुश लगाने का नायाब तरीका सेंसर स्टीकर के रूप में तैयार किया है। इसके यूजर्स पर किसी भी तरह का शारीरिक हमला या यौन उत्पीड़न करने की कोशिश होती है तो स्टीकर के माध्यम से कनेक्ट 5 लोगों को तत्काल अलर्ट चला जाएगा।
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महिलाओं को शारीरिक शोषण से बचाएगा सेंसर स्टीकर
इस सेंसर स्टीकर को बचाव के साथ सुबूत के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यूजर अपनी ेसुविधा के हिसाब से सेट भी कर सकता है। यह डिवाइस ब्लूटूथ के माध्यम से स्मार्टफोन से कनेक्ट होगा। इससे 5 लोगों को मैसेज जाएगा, जो डिवाइस से जुड़े होंगे। डिवाइस को चंडीगढ़ की इंजीनियर मनीषा मोहन ने कैंम्ब्रीज स्थित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में अपनी मास्टर डिग्री के समय तैयार किया।
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कैसे काम करता है सेंसर स्टीकर
यह सेंसर दो मोड़ यानी निष्क्रिय मोड़ में मैन्युअल रूप से काम करता है। यानी जब खतरे का डर हो तो लड़की आसपास के लोगों को बटन दबाकर अलर्ट कर देगी। फास्ट अलार्म बटन दबते ही यह दोस्तों को कॉल करना शुरू कर देगा। सक्रिय मोड़ में यह संवेदक बाहरी संकेतों के माध्यम से खतरे का अनुमान लगाता है।
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महिलाओं को शारीरिक शोषण से बचाएगा सेंसर स्टीकर
उदाहरण के लिए, यदि कोई शरीर से कपड़े निकालने की कोशिश कर रहा है, तो सेंसर अपने स्मार्टफोन को एक संदेश भेजेगा, ताकि सेंसर यह सुनिश्चित करे कि लड़की संकट में है या नहीं। भेजे गए इस संदेश का जवाब 30 सेकंड के भीतर नहीं आता है तो आसपास के लोगों को सतर्क करने के लिए, फोन जोर से ध्वनि शुरू कर देगा। अगर लड़की 20 सेकंड के भीतर इस अलार्म को बंद नहीं करती है, तो एप यह मान लेगा कि लड़की मुसीबत में है और वह परिवार और दोस्तों को संकेत भेजना शुरू कर देगा।
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डिवाइस तैयार करने में लगे 2 वर्ष
मनीषा ने बताया कि उनको मास्टर थीसिस के लिए निडर- यौन उत्पीड़न को रोकने और उसके बचने के तरीके बताने की थीम मिली थी। इसके चलते उन्होंने इस सेंसर स्टीकर को तैयार किया। इस डिवाइस को पूरी तरह से तैयार करने में कुल 2 वर्ष का समय लगा है। इस पर पूरी तरह से किया रिसर्च सफलतापूर्ण रहा है।
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ऐसे किया डिवाइस तैयार
मनीषा ने बताया कि डिवाइस के माध्यम से न केवल महिलाओं बल्कि बच्चों, स्कूल जा रही लड़कियों और शारीरिक रूप से विकलांग आदि को भी शारीरिक शोषण से सुरक्षित किया जा सकता है। मोहन ने बताया इस डिवाइस को तैयार करने के लिए करीब 38 डॉलर यानी करीब 2500 रुपये लगे। फिलहाल इस पर रिसर्च पुरी हो चुकी है। अब कौन-सी कंपनी इस डिवाइस को लांच करती है इसे लेकर विचार-विमर्श चल रहा है।
से हुई इंस्पायर
मनीषा ने कहा कि महिलाओं के यौन उत्पीड़न, शारीरिक हमले, बलात्कार के मामले बढ़ने लगे हैं। कुछ ऐसा होना चाहिए जिससे शिकार होने वाली महिला के परिजनों को पहले ही वारदात की भनक लग जाए। जिसके बाद निर्भया केस एक ऐसा मोड़ रहा, जिसने मनीषा को एक ऐसी डिवाइस बनाने के लिए प्रेरित किया। चेन्नई में इंजीनियरिंग का अध्ययन करने के अनुभव के बाद से कुछ ऐसा बनाने की सोच रही थी।