ये अफ्रीकन इंटेलिजेंट ग्रे पैरट है। विशेषज्ञों के मुताबिक ये 40 भाषाएं बोल सकता है। इसकी कीमत 50 हजार रुपये है। फेस्टिव सीजन में गिफ्ट में देने के लिए ये उपलब्ध है। देखिए। रिपोर्ट: दीपक शाही
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Pics: 40 भाषाएं जानने वाला 50 हजार का अफ्रीकन तोता देखिए
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ये अफ्रीकी तोता भारत में पाए जाने वाले ग्रीन पैरट से कहीं ज्यादा फुर्तीला, चंचल और मानवीय माहौल में ढलने वाला है। इस अफ्रीकी मियां मिठ्ठू की ब्रीडिंग इंडिया के कोलकाता, मुंबई, बंगलूरू सरीखे महानगरों में शुरू हो गई है। जहां से यह पूरे भारत के वन्य जीव प्रेमियों तक पहुंच रहा है। अब तो लोग फेस्टिव सीजन में इसे एक-दूसरे को गिफ्ट भी कर रहे हैं।
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वन्य जीवों को संरक्षण देने के कार्य में जुटे चंडीगढ़ के सेक्टर-20 निवासी विनोद कुमार (सोनू) का कहना है कि ग्रे पैरट मानवीय माहौल में बेहद आसानी से ढल जाता है।
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सबसे पहले यह अफ्रीका के जंगलों में मिला। फिर वहां के लोगों ने इसे पालना शुरू कर दिया। इसकी समझदारी को देखते हुए ही बाकी देशों के वन्य जीव प्रेमियों का लगाव भी इसकी तरफ बढ़ रहा है।
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चंडीगढ़ का ग्रे पैरट तीन भाषाएं हिंदी, अंगेजी व पंजाबी बोलता है। विनोद ने बताया कि यह पैरट उनके पास ढाई साल से है। उसे उन्होंने कोलकाता से मंगवाया था। प्यार से उसे वह स्कूबी बुलाते हैं।
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ग्रे पैरट जब बाइक पर सैर करने जाता है तो विनोद उसे अपने कंधे पर पट्टे के सहारे बिठा लेते हैं। फिर मियां मिट्ठू बाइक की सवारी करते हैं। जिस पट्टे में उन्हें बांधा जाता है उसकी कीमत 5 हजार रुपये है।
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ग्रे पैरट की खासियत यह है कि वह पिंजरे में नहीं रहता। मालिक का पूरा प्यार, दुलार अकेले ही पाना चाहता है। यदि घर में किसी दूसरे पालतू के प्रति मालिक का लगाव बढ़े तो यह इसे अच्छा नहीं लगता और वह अपने तरीके से नाराजगी भी जाहिर करता है।
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विशेषज्ञ बताते हैं कि अफ्रीकी ग्रे पैरट करीब 40 भाषाएं तक बोलने की क्षमता रखता है। उसे इसके लिए प्रशिक्षण देना भारत के ग्रीन पैरट को प्रशिक्षित करने से कहीं ज्यादा आसान है। ग्रीन पैरट की शब्दों को याद रखने की क्षमता केवल 50 शब्दों तक ही सीमित है जबकि ग्रे पैरट में 800 से अधिक शब्दों को याद रख सकता है।
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ग्रे पैरट को खाने में फल-सब्जियों के साथ चिकन, मटन व आमलेट भी पसंद है। मालिक के साथ बाइक व कार में सैर करना भी इसकी पसंद में शुमार है। यदि मालिक इसे किसी दूसरे को बेच दे तो यह दूसरे मालिक को आसानी से पसंद नहीं करता।
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कई बार तो यह दाना पानी तक छोड़ देता है। इसलिए वन्य जीव प्रेमी ऐसे पैरट को तभी खरीदना पसंद करते हैं जब यह बच्चा हो। इस पैरट का दिमाग 5-7 साल के बच्चे जितना विकसित होता है। यह अफ्रीका के कोंगो में पाया जाता है।