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सुरक्षा-सतर्कता के साथ खुले स्कूल, कंधे पर बैग व मास्क पहने दिखे छात्र, तस्वीरों में देखें माहौल

Mon, 19 Oct 2020 07:17 PM IST
ajay kumar अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब
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पंजाब में खुले स्कूल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सात माह बाद पंजाब में 9वीं से 12वीं तक के स्कूल खुल गए हैं। सभी स्कूलों में कोरोना के बचाव के लिए जारी सरकारी निर्देशों का पालन किया गया। बच्चे मास्क पहन स्कूल पहुंचे। स्कूलों में सैनिटाइजर और साबुन की व्यवस्था रही। अबोहर में भी मानक संचालन प्रक्रिया के तहत स्कूल खुले गए।

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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बच्चे अभिभावकों की लिखित अनुमति के बाद स्कूल पहुंचे। पहले दिन बच्चों को कोरोना से बचाव के बारे में बताया गया। कक्षाओं में छात्रों के बीच छह फुट की दूरी रही। छात्र मास्क पहनने के अलावा एक अतिरिक्त मास्क, पानी की बोतल और सैनिटाइजर भी साथ लाए। स्कूल प्रिंसिपल राजेश सचदेवा ने बताया कि मेन गेट पर ही सभी विद्यार्थियों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग अनिवार्य किया गया। 
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहीं लुधियाना के स्कूलों में छात्रों की कम संख्या देखने को मिली। इससे कोरोना के खौफ का अंदाजा लगाया जा सकता है। पहले दिन सरकारी व निजी स्कूलों में 20 प्रतिशत छात्र ही पहुंचे। वहीं स्कूलों का जायजा लेने जिला शिक्षा अधिकारी(डीईओ) भी सरकारी स्कूल पहुंचे। बच्चों की कम संख्या देख वे इतने हैरान हुए कि अध्यापकों को अभिभावकों को जागरुक करने का फरमान सुना दिया।

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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पहले दिन पीएयू स्थित सरकारी स्कूल में महज चालीस छात्र ही पहुंचे। किसी कक्षा में एक तो किसी में 10 छात्र ही पढ़ाई करते दिखे। अन्य स्कूलों का भी यही हाल रहा। वहीं अभिभावकों का मन छात्रों को स्कूल भेजने का नहीं है। अभिभावकों का कहना कि सरकार एक तरफ कह रही है कि कोरोना की दूसरी लहर आ सकती है। वहीं ऐसे समय में स्कूलों को खोला जा रहा है। ऐसे माहौल में वे अपने बच्चों को स्कूल भेजकर खतरा मोल नहीं लेना चाहते हैं।
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर के स्कूलों में सोमवार को न तो प्रार्थना सभा हुई और न ही कैंटीन खोली गई। वहीं सीमित संख्या में ही विद्यार्थी स्कूल पहुंचे। स्कूलों में सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया गया। स्कूलों में पंजाब सरकार द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया गया। एसओपी के अनुसार ही स्कूलों को शिफ्टों में लगाया गया। सरकारी सीसे स्कूल सहंसरा के प्रिंसिपल सतीश कुमार ने बताया कि महामारी से बचाव का पूरा प्रबंध किया गया है। बच्चों को थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही प्रवेश दिया गया है।
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जिला शिक्षा अधिकारी सतिंदरबीर सिंह ने कहा कि कोरोना काल में खुले स्कूलों में महामारी से निपटने का पुख्ता इंतजाम किया गया है। अभिभावकों की सहमति के बाद ही बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिया गया है। वहीं स्कूलों को स्वच्छता के सख्त निर्देश हैं। लुधियाना की तरह जालंधर के स्कूलों में भी पहले दिन छात्रों की कम संख्या दिखाई दी। सोमवार को आने वाले छात्रों की संख्या मात्र 3 से 4 प्रतिशत तक ही रही। वहीं कई स्कूलों में एक-दो छात्र ही बैठे दिखे। पहले दिन छात्रों की कम संख्या से यह साबित हो गया है कि माता-पिता जोखिम लेकर अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं।
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जालंधर के नेहरू गार्डन सीनियर सेकेंडरी सरकारी स्कूल में बच्चों की संख्या कम रही। इस स्कूल में 9वीं से 12वीं तक के कुल 20 सेक्शन हैं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 1000 के करीब है। यहां पर पहले दिन मात्र 30 बच्चे ही पहुंचे। प्रिंसिपल गुरिंदरजीत कौर ने कहा कि हमने स्कूल में सभी टीचरों को बुलाया है। वहीं जो बच्चे स्कूल आ रहे हैं उन्हें पढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं के सहारे शिक्षा दी जा रही है।
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पठानकोट में भी पहले दिन स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति नाममात्र रही। कई स्कूलों में एक भी छात्र नहीं पहुंचा। बताया जा रहा है कि स्कूलों में अभिभावकों से स्वयं स्वीकृति पत्र पर हस्ताक्षर जरूरी किए जाने के चलते बच्चों की संख्या कम रही। बठिंडा में सोमवार को 15 फीसदी विद्यार्थी ही पहुंचे। इस दौरान बच्चों को मास्क बांटे गए और सैनिटाइज करने के बाद उन्हें स्कूलों में प्रवेश दिया गया। जिला शिक्षा अफसर सेकेंडरी मनिंदर कौर ने बताया कि जिले में 204 सरकारी स्कूल खोले गए हैं। इनमें 9वीं से लेकर 12वीं तक कक्षाओं का संचालन किया गया। पहला दिन होने की वजह से विद्यार्थियों की संख्या कम रही। 
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