मशहूर सूफी गायक सतिंदर सरताज जब पीयू पहुंचे तो उन्होने अपने कई फेमस गानों के पीछे की असली कहानी बताई। आप भी पढ़िए...
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Satinder Sartaj
दरअसल, मशहूर सूफी गायक और अभिनेता सतिंदर सरताज को पंजाब यूनिवर्सिटी का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है। वीसी प्रोफेसर अरुण कुमार ने सम्मान समारोह में उनकी ताजपोशी की गई। साथ ही उन्हें पीयू की एल्यूमिनाई एसोसिएशन का ऑरनरी सदस्य बनाया गया।
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इस मौके पर सतिंदर भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि पीयू उनका दूसरा घर है। यहां की मिट्टी में जो खुशबू है, वह कहीं ओर महसूस नहीं होती। यहां आकर वह सतिंदर सरताज नहीं, सतिंदर पाल सिंह ही रहना चाहते हैं।
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रोती हुई लड़की देखकर गीत बनाया
सरताज ने कहा कि उनके काफी गीत पीयू से प्रेरित हैं। कुछ गीत उन्होंने सुनाए भी, जो पीयू केबारे में लिखा था। उन्होंने कहा कि एक बार पीयू की मार्केट में खड़ा था, तो एक लड़की को रोते हुए देखा। तब एक गीता लिखा, कुड़ियों रोया ना करो। यह गीत सरताज ने अपनी एक एलबम में गाया, जो काफी मशहूर हुआ।
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मेरी चोरी हुई बाइक ढूंढ दो, इनाम पक्का
सरताज से जब पूछा कि क्या वह बाइक मिली, जो चोरी हुई थी? तो सरताज ने कहा कि अभी तक नहीं मिली। एफआईआर भी दर्ज कराई थी। जो बाइक ढूंढकर देगा, उसका इनाम पक्का। दरअसल, सरताज जब पीयू में पढ़ते थे, तो उनकी यामहा चोरी हो गई थी। इस पर उन्होंने एक गीत भी बनाया था, जिसमें यामाहा बाइक का जिक्र था। यह गीत काफी मशहूर हुआ था।
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लाइब्रेरी में बीतता था ज्यादा समय
सरताज ने कहा कि लाइब्रेरी खुलने से पहले ही वहां पहुंच जाता और बंद होने के बाद जब तक धक्के देकर नहीं निकाल दिया जाता था, तब तक वहीं रहता था। पीयू की लाइब्रेरी पर भी सरताज ने एक गीत बनाया था, जो उन्होंने सुनाया भी।
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सरताज ने छात्रों से कहा कि समय खराब न करें। मेहनत करके कुछ हासिल करो। पीयू से जो मिल सकता है, वह और कहीं से नहीं। उन्होंने एक किस्सा भी सांझा किया कि एक बार फीस के पैसे नहीं थे, तो उनके टीचर ने फीस दे दी। ऐसा मददगार संस्थान कहां मिलेगा। उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा कि पीयू से जितना ज्ञान बटोर सकते हो, बटोर लो।
‘दुनिया के लिए सरताज, मेरा तो सतिंदर ही है’
प्रोफेसर पंकज माला शर्मा स्टेज पर पहुंची और सरताज ने पैर छुए। प्रोफेसर उन्हें गले लगाते बोलीं-सरताज दुनिया के लिए होगा, मेरा तो सतिंदर ही है। 16 साल पहले जब पीयू के म्यूजिक विभाग में पढ़ने आया था, तब भी ऐसा ही था और आज भी ऐसा ही है। प्रोफेसर शर्मा ने बताया कि गुजरात में भूकंप पीड़ितों की मदद केलिए सतिंदर सरताज ने अपनी साथी स्टूडेंट्स केसाथ मिलकर म्यूजिक विभाग का एक कार्यक्रम कराया और उससे जमा चंदे को राहत कार्य के लिए दिया।