संत निरंकारी मिशन के बाबा हरदेव सिंह के निधन के बाद गद्दी संभाली थी, 25 महीने बाद खुद ही छोड़ दी और आज वे भी इस दुनिया को छोड़कर चली गईं। मिशन के लाखों करोड़ों अनुयायी शोकग्रस्त हैं।
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माता सविंदर कौर
- फोटो : अमर उजाला
मिशन की पांचवी प्रमुख माता सविंदर हरदेव ब्रह्मलीन हो गई हैं। 5 अगस्त 2018 को दिल्ली में बुराड़ी स्थित निरंकारी भवन में उन्होंने आखिरी सांस ली। वे पिछले काफी समय से बीमार थीं, इसलिए 17 जुलाई को उन्होंने गद्दी छोड़ दी और अपनी बेटी सुदीक्षा को छठा प्रमुख बना दिया।
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बाबा हरदेव सिंह निरंकारी मिशन
- फोटो : फाइल फोटो
मई 2016 में बाबा हरदेव सिंह के निधन से निरंकारी मिशन के अनुयायियों को सदमा लगा, तो माता सविंदर कौर बाबा के सपनों को पूरा करने के लिए गद्दी संभाली थी। उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए माता ने मिशन को आगे बढ़ाया, लेकिन अचानक लिए गए उनके एक फैसले ने अनुयायियों को फिर निराश कर दिया।
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बाबा हरदेव सिंह निरंकारी मिशन
- फोटो : फाइल फोटो
मिशन की पहली महिला प्रमुख बनने के 25 महीने बाद खुद ही गद्दी त्यागने का ऐलान कर दिया। वजह ये कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था, काफी समय से बीमार चल रही थीं। अब मिशन की जिम्मेदारी आई 13 मार्च, 1985 को दिल्ली में जन्मी बाबा और सविंदर हरदेव की सबसे छोटी बेटी सुदीक्षा पर।
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बाबा हरदेव सिंह निरंकारी मिशन
- फोटो : फाइल फोटो
मनोविज्ञान में ऑनर्स के साथ ग्रेजुएशन कर चुकीं माता सुदीक्षा मिशन के कार्यों से लगातार जुड़ी हुई हैं। दिसंबर 2016 से वह विदेश विभाग की बतौर इंचार्ज रहीं। तब से वह 60 से अधिक देशों में मिशन की गतिविधियों का मार्गदर्शन करती आ रही हैं। इनकी बहनें समता और रेणुका भी मिशन के साथ कार्यरत हैं।
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बाबा हरदेव सिंह निरंकारी मिशन
- फोटो : फाइल फोटो
बाबा हरदेव से सविंदर कौर की शादी
मिशन के तीसरे प्रमुख रहे बाबा हरदेव सिंह का जन्म 23 फरवरी, 1954 को दिल्ली में हुआ था। 1980 में पिता की मौत के बाद उन्हें निरंकारी मंडल का मुखिया बनाया गया था। इसके पूर्व वह 1971 में निरंकारी सेवा दल में शामिल हुए थे। 1975 में उन्होंने फर्रुखाबाद की सविंदर कौर से शादी की थी।
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बाबा हरदेव सिंह निरंकारी मिशन
- फोटो : फाइल फोटो
1929 में निरंकारी मिशन की स्थापना
1929 में बाबा बूटा सिंह द्वारा संत निरंकारी मिशन की स्थापना की गई थी। इस मिशन की 27 देशों में 100 शाखाएं चल रही हैं। भारत में भी तकरीबन हर राज्यों में लाखों की संख्या में उनके अनुयायी हैं। बाबा हरदेव सिंह को विश्व में मानवता की शांति के लिए कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ भी सम्मानित कर चुका है। निरंकारी मंडल की ओर से बुराड़ी स्थित मैदान में हर साल नवंबर में वार्षिक समागम का आयोजन किया जाता है। इसमें भारत समेत दुनिया भर के लाखों भक्त भाग लेते हैं।
निरंकारी मिशन के प्रमुख बाबा हरदेव सिंह नहीं रहे
- फोटो : फाइल फोटो
कौन थे बाबा हरदेव सिंह निरंकारी
बाबा हरदेव सिंह का जन्म 23 फरवरी, 1954 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली के संत निरंकारी कॉलोनी स्थित रोजेरी पब्लिक स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की थी। उसके बाद 1963 में उन्होंने पटियाला के बोर्डिंग स्कूल यादविंद्र पब्लिक स्कूल में दाखिला लिया। दिल्ली यूनिवर्सिटी से उन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने 1971 में एक सदस्य के रूप में निरंकारी सेवा दल ज्वॉईन कर लिया। 1975 में एक वार्षिक निरंकारी संत समागम के दौरान दिल्ली में उनकी शादी सविंदर कौर से हुई। अपने पिता की मौत के बाद 1980 में वे संत निरंकारी मिशन के मुखिया बने। उन्हें सतगुरू की उपाधि दी गई।