संत निरंकारी मिशन के प्रमुख बाबा हरदेव सिंह की जिंदगी में माता सविंदर कैसे आई थीं, इसके बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे। माता का एक सच जानकर आप उन्हें सेल्यूट करेंगे।
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माता सविंदर कौर
- फोटो : अमर उजाला
संत निरंकारी मिशन की पांचवीं सद्गुरु माता सविंदर हरदेव महाराज हमारे बीच नहीं रहीं। 5 अगस्त 2018 को पांच बजकर पांच मिनट पर दिल्ली के बुराड़ी स्थित निरंकारी कॉलोनी में माता सविंदर का निधन हुआ। बताया जा रहा है कि वह काफी समय से बीमार थीं।
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सविंदर कौर
- फोटो : अमर उजाला
बीमारी के चलते ही उन्होंने 17 जुलाई 2018 को मिशन के छठवें सद्गुरु के रुप में अपनी छोटी बेटी सुदीक्षा को जिम्मेदारी सौंपी दी थीं। इस दौरान माता सविंदर ने कहा था कि अब भी बाबा हरदेव महाराज की इच्छानुसार बहुत कुछ करना बाकी है।
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savinder kaur
बता दें कि 1975 में निरंकारी संत समागम में एक सादे समारोह में बाबा हरदेव सिंह के साथ माता सविंदर की शादी हुई थी और वो भी बिना दहेज के। इसके साथ ही निरंकारी मिशन ने बिना दहेज के शादियां कराने संकल्प लिया गया। यह शादी मिशन के लिए मिसाल बनी और आज भी यह परंपरा जारी है।
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सविंदर कौर
- फोटो : अमर उजाला
इसी संकल्प का पालन करते हुए माता सविंदर ने अपनी बेटियों की शादी भी साधारण तरीके से की। माता सविंदर कौर का जन्म फर्रूखाबाद के एक व्यापारी मनमोहन सिंह के घर 12 जनवरी, 1957 को हुआ, लेकिन परिवार के नजदीकी हरियाणा के यमुनानगर जिले के गुरमुख सिंह ने उन्हें गोद ले लिया। क्योंकि उनकी कोई संतान नहीं थी। इस तरह सविंदर कौर यमुनानगर आ गईं।
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सविंदर कौर
- फोटो : अमर उजाला
यहीं रहकर उन्होंने अपनी पढ़ाई की। ग्रेजुएशन करने के बाद वे दिल्ली चली गई। क्योंकि गुरमुख सिंह का परिवार निरंकारी मिशन से जुड़ा था, इसलिए वे भी इससे जुड़ गईं। इस तरह माता सविंदर कौर परिवार वालों के साथ सत्संग में जाती रहती थीं। आगे चलकर वे एक श्रद्धालु की तरह मिशन से जुड़ गई और सेवा भाव करने लगीं।
इस बीच उनकी मुलाकात बाबा हरदेव सिंह जी से हुई। बातचीत आगे बढ़ी और परिवार वालों ने उनकी शादी तय कर दी। लोगों को दहेज के खिलाफ प्रेरित करने के लिए उस समय निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी और माता सविंदर जी ने बिना दहेज के शादी की। 13 मई 2016 को कनाडा में एक सड़क हादसे में निरंकारी बाबा हरदेव सिंह का निधन हो गया था।