इस पिता को कोटि-कोटि नमन। अशक्त बेटे की जिंदगी में न केवल रंग भरे, बल्कि उसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए समय से पहले नौकरी से रिटायरमेंट भी ले ली। रिपोर्टः दीपक शाही, चंडीगढ़
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विकलांग बेटे को सफल बनाने को उठाया ऐसा कदम, सभी चौंके
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अशक्त सुमित ने होश संभाला तो जिंदगी पहेली बन गई। हौसला डगमगाने लगा लेकिन पिता की उम्मीद ने की ताकत दी। पिता ने ही सहारा दिया। चलने के लिए पिता ने पैर और खाने के लिए हाथ दिए। जिंदगी आगे बढ़ी तो पिता ने टीचर के रूप में पढ़ाई का सपना दिखाकर कुछ करने को कहा। जब बुलंद हौसला मिला तो सुमित ने भी दमखम दिखाया। इसका परिणाम आज सबके सामने है।
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सुमित एक सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। पिछले तीन साल से सुमित एक आस्ट्रेलियन कंपनी के लिए सॉफ्टवेयर डेवलप कर रहे हैं। 32 वर्षीय सुमित को आज काम से फुरसत नहीं मिलती। इस सफलता के पीछे उनके पिता डीडी मेहता की मेहनत और लगन है। जन्म से शारीरिक रूप से अक्षम सुमित के लिए उनके पिता ने कभी दिन-रात, सुबह-शाम को नहीं देखा। अगर देखी तो सुमित के अंदर आगे बढ़ने की ललक।
विकलांग बेटे को सफल बनाने को उठाया ऐसा कदम, सभी चौंके
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सुमित का कहना है कि मेरे पिता मेरी परछाई है, उन्हीं के प्रयास से आज मुझे शारीरिक अक्षमता नहीं खलती। चाहे कोई पार्टी या कोई बड़ा आयोजन डीडी मेहता अपने बेटे को अपनी गोद में लेकर जाने को शर्मिंदगी नहीं बल्की अपना मान समझते हैं। पिता के प्रयासों की बदौलत सुमित ने प्रोग्राम डेवलप किया है जो संगीत शास्त्रीय संगीत सीखने में मददगार होगा। इसे imusictution पर ऐप और आई पैड के माध्यम से देख सकते हैं। इसका दूसरा वर्जन भी सुमित जल्द लॉन्च करने वाले हैं।
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सुमित के पिता डीडी मेहता बताते हैं कि जब सुमित म्यूजिक से विशारद कर रहा था, उस समय वे लालड़ू में एक कंपनी में मैनेजर के पद पर तैनात थे। ऑफिस जाते समय सुमित को म्यूजिक क्लास में छोड़ जाते। ऑफिस से लौटते वक्त उसे घर ले जाते थे। लेकिन कई बार काम अधिक होने के कारण सुमित को घर छोड़ने के बाद दोबारा कंपनी में जाते थे।