जानिए एक ऐसे शिक्षक के बारे में जो अपनी सैलरी खर्च कर, हर साल 10 लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाता है। और वह ऐसा 9 सालों से करता आ रहा है।
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Ajay Lohan Hisar
- फोटो : अमर उजाला
अजय लोहान पिछले 9 सालों से स्कूल से मिलने वाली अपनी तनख्वाह को बच्चों पर ही खर्च कर देते हैं। जरूरतमंद व गरीब बच्चों को किताब कॉपी बांटकर उनके दिल को बड़ा सुकून मिलता है।
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अजय से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, "मैं बस स्कूल का पैसा स्कूल पर व बच्चों पर ही लगा देता हूं। जो बच्चे पैसे की कमी की वजह से स्कूल की किताबें या स्टेशनरी नहीं ले पाते उनके लिए ज़रूरी चीज़ें खरीद लेता हूं।"
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अजय लोहान पिछले 9 सालों से कभी भी कुर्सी पर नहीं बैठे हैं। कक्षा में हमेशा खड़े रहकर पढ़ाने वाले अजय ने अपने लक्ष्य के बारे में बताते हुए कहा कि वे शिक्षा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपना व अपने गांव का नाम रोशन करना चाहते हैं।
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जिस मुहीम को हरियाणा सरकार ने अब शुरू किया है उस मुहीम को अजय लोहान पिछले कई सालों से चला कर बालिका शिक्षा को बढ़ावा दे रहे है। गरीब लड़कियां शिक्षा से वंचित न रहे इसके लिए वो अपने खर्चे से 10 लड़कियों को पढ़ाकर अतुल्य कार्य कर रहे हैं।
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अजय लोहान के प्रयासों का लोहा प्रसिद्ध कंप्यूटर व सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस ने भी माना है। अजय बच्चों को कंपनी के हेड ऑफिस लेकर गए थे, उस दौरान बच्चों की प्रतिभा से प्रभावित होकर इंफोसिस ने 10 कंप्यूटर भी देने का फैसला लिया जिससे आज बच्चे तकनिकी शिक्षा का लाभ ले रहे है।
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जिस स्कूल के बच्चे अंग्रेजी समझ भी नहीं पाते थे, अब वे अंग्रेजी में बात करते हैं। पिछले 9 सालों में इनका बोर्ड का परिणाम सत प्रतिशत तो रहता ही है साथ ही जिले के सरकारी स्कूलों में भी अर्बन क्षेत्र में 8 सालों से प्रथम रहा है।
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अजय के जिस स्कूल में पहले 400 बच्चे थे पढ़ते थे, वहीं अब यह आकड़ा 1512 तक पहुंच गया है।
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अजय लोहान को उनके प्रयासों के लिए हरियाणा गौरव अवार्ड, बेस्ट स्टेट मोटिवेशन अवार्ड, बेस्ट टीचर अवार्ड, प्राणनाथ प्रणामी अवार्ड , हरियाणा संस्कृति संरक्षक अवार्ड , बेस्ट पार्लियामेंट आर्गेनाईजेशन अवार्ड व कक्षा तत्परता कार्यक्रम के तहत उत्कृष्ठ सेवाओं के लिए गोल्ड़ मेडल मिल चुका है।
अजय लोहान ने नारनौंद के जिस राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में अपनी सेवाएं दी हैं उनके पिता भी उसी स्कूल में शिक्षक रह चुके हैं। अजय के पिता स्वर्गीय रामनिवास लोहान इसी स्कूल में राजनीती शास्त्र के प्राध्यापक रह चुके हैं। अजय कहते हैं कि पिता से मिली प्रेरणाओं के चलते ही वे शिक्षक बने।