भारतीय महिला टीम को जिस खिलाड़ी के कारण ओलंपिक का टिकट मिला, उसी को बाहर कर दिया गया है। इसके पीछे का कारण खराब खेल नहीं, कुछ और है।
विज्ञापन
2 of 7
भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी रीतू रानी
- फोटो : फाइल फोटो
रीतू को टीम से बाहर करने की वजह कोच व कप्तान के बीच खींचातानी माना जा रहा है। इस बात का अंदेशा लगभग डेढ़ माह पहले ही हो गया था जब 23 मई को चार देशों के टूर्नामेंट में डरबन जाने वाली भारतीय महिला हाकी टीम से रीतू रानी की जगह सुशीला चानू को टीम का कप्तान बनाया गया था। हालांकि उस समय कहा गया था कि रीतू रानी को विश्राम दिया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह थी कि रीतू 2011 से लगातार भारतीय टीम की कप्तान थीं।
विज्ञापन
3 of 7
भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी रीतू रानी
- फोटो : फाइल फोटो
रियो ओलंपिक की तैयारियों को लेकर इस टूर्नामेंट को बड़ा अहम समझा जा रहा था क्योंकि इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाली टीमों में अस्ट्रेलिया की रेंकिंग तीसरे, न्यूजीलैंड की चौथे व जापान की दसवें नंबर पर थी, जबकि भारत का स्थान 13वें नंबर पर था। इतने अहम मुकाबले से रीतू रानी को बाहर करना ही शक पैदा करता था। हालांकि इससे मात्र 12 दिन पूर्व 11 मई को हॉकी इंडिया ने रीतू रानी का नाम अर्जुन अवार्ड के लिए प्रस्तावित किया था, जिसमें कहा गया था कि रियो ओलंपिक में स्थान दिलवाने में रीतू के नेतृत्व की अहम भूमिका थी।
4 of 7
भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी रीतू रानी
- फोटो : फाइल फोटो
मामले को लेकर जब हॉकी इंडिया के अध्यक्ष नरेंद्र बत्तरा से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें रीतू के टीम से बाहर होने का पता नहीं है। उन्होंने बताया कि आधिकारिक तौर पर टीम की घोषणा 12 जुलाई को दिल्ली में होगी। रीतू को कैंप से बाहर करने की बात पर बत्तरा ने कहा कि सभी खिलाड़ियों की कैंप की छुट्टी की गई है और पूरी टीम 11 जुलाई को दोबारा कैंप में पहुंचेगी।
विज्ञापन
5 of 7
भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी रीतू रानी
- फोटो : फाइल फोटो
ओलंपिक खेलने का सपना चूर-चूर: इस तरह टीम से बाहर किए जाने से रीतू का ओलंपिक खेलने का सपना चूर-चूर हो गया है। बताया जाता है कि बुधवार देर शाम ही टीम के कोच ने रीतू को घर जाने के लिए कह दिया था। हालांकि इस संबंध में रीतू रानी से बात नहीं हो पाई है, लेकिन उनके पिता जयपाल ने इस बात की पुष्टि की। जयपाल बताते हैं कि रीतू को टीम में शामिल नहीं करने से क्षेत्र के हाकी प्रेमियों में भारी रोष है और उन्होंने हाकी इंडिया से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
विज्ञापन
6 of 7
भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी रीतू रानी
- फोटो : फाइल फोटो
ओलंपिक तक पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत कीः रीतू के पिता जयपाल बताते हैं कि द्रोणाचार्य अवार्डी कोच बलदेव के मार्गदर्शन में उसने मात्र 12 वर्ष की उम्र में ही रीतू ने हॉकी स्टिक को पकड़ा था और उसका सपना भारतीय महिला टीम को ओलंपिक में पहुंचाने का था। रीतू ने इसके लिए कड़ी मेहनत की। 2014-15 की वुमैन एफआईएच हाकी वैल्ड लीग में रानी ने भारत में हुए दूसरे राउंड में नेतृत्व करते हुए टीम को प्रथम स्थान दिलवाया था और उसने वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल में भी टीम को लीड किया था।
भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी रीतू रानी
- फोटो : फाइल फोटो
पूरा कैरियर उपलब्धियों से भरा रहा: मात्र 14 वर्ष की आयु में ही 2006 में मैड्रिड में संपन्न हुए वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का हिस्सा थीं। पूरी टीम में वह सबसे छोटी थीं। 2009 में रूस में हुए चैंपियन चैलेंज में भारतीय टीम ने जीत हासिल की थी, जिसमें रीतू 8 गोल करके टूर्नामेंट की टोप स्कोरर रही थी। इन्हीं उपलब्धियों को बदौलत उसे 2011 में भारतीय टीम की कप्तान बनाया गया था और उसकी अगुवाई में 2013 के एशिया कप और 2014 की एशियन खेलों में टीम तीसरे स्थान पर रही थी।