रेवाड़ी में गैंगरेप के 6 दिन बाद पीड़िता ने बोलने की कोशिश की, इससे पहले वह कुछ कह पाती फूट-फूट कर रोने लगी। फिर मां का हाथ पकड़कर बोली...
दर्द इतना था कि थोड़ा सा बुदबुदा सकी, खाना खाने की इच्छा जताई। यह सुनते ही मां भी फूट-फूट कर रोने लगी। फिर वो दौड़कर गई और बेटी के लिए खाना, जूस लेकर आई। माहौल एक बार तो गमगीन हो गया, पर पीड़िता को खाना खिलाने के लिए सभी ने अपनी भावनाओं पर काबू रखा। कुछ समय आराम करने के बाद उसकी काउंसिलिंग शुरू की गई।
जब काउंसलर ने उससे बातचीत की तो उसने होठ खोले। यह पूछने पर कि अब तुम कैसा महसूस कर रही हो, तो धीमी आवाज में कुछ बुदबुदाने के बाद छात्रा रोने लगी। फिर काउंसलर ने कहा कि इस हादसे को तुमको भूलना होगा अन्यथा शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। इस पर छात्रा के आंखों से आंसू टपक पड़े। इसके बाद मां ने काउंसिलिंग रुकवा दी।