रेवाड़ी में छात्रा के साथ गैंगरेप करने वाले तीन आरोपियों में से एक नीशू को गिरफ्तार करने के बाद 8 ऐसे खुलासे हुए, जिन्हें जानकर हर कोई हैरान रह गया।
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रेवाड़ी गैंगरेप
नीशू, कोठड़े का मालिक और डॉक्टर गिरफ्तार
हरियाणा के रेवाड़ी में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित छात्रा के साथ गैंगरेप मामले में पुलिस ने तीनों आरोपियों में से एक आरोपी नीशू को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही घटनास्थल कोठड़े के मालिक दीनदयाल और हालत खराब होने पर पीड़िता का इलाज करने पहुंचे डॉक्टर संजीव कुमार को भी पुलिस ने पकड़ लिया है। मामले की जांच कर रही एसआईटी चीफ नाजनीन भसीन ने प्रेस कांफ्रेंस करके इसकी जानकारी दी। अभी अन्य दो आरोपी पकड़े नहीं गए हैं, उसके लिए छापेमारी की जा रही है।
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रेवाड़ी गैंगरेप
योजना बनाकर किया गया गैंगरेप
एसआईटी के मुताबिक, वारदात योजना बनाकर अंजाम दी गई। हैरानी की बात ये है कि तीनों आरोपी पीड़िता और उसके परिजनों के जानकार हैं। आरोपी पंकज को डेढ़ साल पहले पीड़िता के पिता की बदौलत ही सेना में नौकरी मिली थी। इसके बाद ही उसका पीड़िता के घर आना-जाना हो गया। इस दौरान पंकज का दोस्ताना पीड़िता के पड़ोसी नीशू से हुआ। मनीष दोनों का जानकार था, इसलिए तीनों ने मिलकर वारदात अंजाम दी।
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रेवाड़ी गैंगरेप
नीशू की मामले में अहम भूमिका, उसी ने कोठड़े की चाबी उपल्ब्ध कराई
नीशु ने ही कोठड़े की चाबी के लिए दीनदयाल से संपर्क किया था। नीशु की भी इस वारदात अहम भूमिका रही है, क्योंकि वह मुख्य आरोपी पंकज का दोस्त है। इसलिए यह सब साजिश के तहत किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले में कोठड़ा मालिक दीनदयाल को पता था कि आरोपी कोठड़े का गलत इस्तेमाल करेंगे। बावजूद इसके उसने उन्हें चाबी दी।
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रेवाड़ी गैंगरेप
डॉक्टर संजीव ने इलाज के बाद पीड़िता के परिजनों को खबर नहीं दी
एसआईटी चीफ ने बताया कि पीड़िता को मौके पर पहुंचकर उपचार देने वाला चिकित्सक संजीव कुमार है। वह एक गांव में क्लीनिक चलता है। आरोपियों ने छात्रा की हालत बिगड़ने के बाद संजीव को फोन करके घटनास्थल पर बुलाया था। इसके बाद चिकित्सक ने छात्रा को इंजेक्शन दिए। इस जघन्य मामले की सूचना पुलिस और परिजनों को नहीं दी।
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रेवाड़ी गैंगरेप
दो दिनों तक गांव में घूमते रहे आरोपी
मामले में पुलिस अब जितना हाथ-पैर मार रही है, उतनी सक्रियता वारदात के बाद दिखाती तो दुष्कर्म के दरिंदे पुलिस की गिरफ्त में होते। दरअसल, 12 सितंबर को वारदात के बाद आरोपी दो दिनों तक गांव में घूमते रहे। इसके बावजूद रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी नहीं की। जबकि आरोपियों ने परिजनों को जान से मारने की भी धमकी दी थी। हालांकि धमकी की शिकायत के बाद परिजनों को सुरक्षा मुहैया करा दी गई थी।
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रेवाड़ी गैंगरेप
महिला थाने में पीड़िता की शिकायत फाड़ दी थी
पीड़ित छात्रा के परिजनों का आरोप है कि जब वे रेवाड़ी के महिला थाने पहुंचे तो उनको डांटकर भगा दिया गया। उनकी शिकायत फाड़ दी। महिला थाना पुलिस ने कनीना का मामला बताते हुए पल्ला झाड़ लिया था। इसके बाद उन्होंने पुलिस के आला अधिकारियों को अवगत कराया तब शिकायत ली। इस तरह पीड़िता के परिजन छह-सात घंटे एफआईआर कराने के लिए भटकते रहे। शुक्रवार को मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई। एसआईटी ने पुलिस की लापरवाही की भी जांच की बात कही है।
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रेवाड़ी गैंगरेप
वारदात के दूसरे दिन शहीद नेवी अफसर के अंतिम संस्कार में शामिल हुए आरोपी
सामूहिक दुष्कर्म के बाद आरोपियों को शिकन नहीं थी। वारदात के दो दिन बाद भी आरोपी गांव में घूमते रहे। वहीं, वारदात के बाद दूसरे दिन 13 सितंबर को नेवी के अधिकारी के अंतिम संस्कार में भी आरोपी शामिल हुए। आरोपियों के गांव निवासी और नौसेना के अधिकारी अंडमान निकोबार में शहीद हो गए थे। 13 सितंबर की देर शाम तक शव आने की वजह से उसी दिन अधिकारी का अंतिम संस्कार किया गया था। तीनों आरोपी नौसेना अधिकारी के अंतिम संस्कार में शामिल हुए और उसके बाद अगले दिन से फरार हो गए।
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रेवाड़ी गैंगरेप
मामला अखबारों में प्रकाशित होने के बाद भागे
12 सितंबर की रात को पुलिस ने पीड़िता और उसके परिजनों के कई घंटों तक चक्कर लगवाने के बाद देर रात को मामला दर्ज किया। मामला रेवाड़ी महिला थाना पुलिस में जीरो एफआईआर होने के कारण रेवाड़ी पुलिस मामले को महेंद्रगढ़ पुलिस का मानकर निश्चिंत बैठी थी। वहीं, महेंद्रगढ़ पुलिस मामले में पीड़ित को रेवाड़ी के महिला थाने में भेजकर निश्चिंत थी। दोनों जिलों की पुलिस ने एक-दूसरे पर मामला टालने का काम किया। जब 14 सितंबर को मामला मीडिया में हाइलाइट हुआ तो पुलिस सक्रिय हुई। मामले के तूल पकड़ने के बाद एडीजीपी श्रीकांत जाधव ने शुक्रवार को रात दस बजे एसआईटी का गठन करके जांच मेवात एसपी को सौंपी। एसआईटी गठन के बाद पुलिस सक्रिय हुई।
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रेवाड़ी गैंगरेप
कदम-कदम पर मिली पुलिस की लापरवाही, वारदात स्थल को बताया था झज्जर में
मामले में हर कदम पर पुलिस की लापरवाही सामने आ रही है। 12 सितंबर की रात को जब पीड़िता महिला थाने पहुंची तो मामला कनीना थाने का बताकर वहां जाने को कहा। इसके बाद वारदात स्थल को भी झज्जर पुलिस पर डालने का प्रयास किया। बात जब आला अधिकारियों तक बात पहुंची तो रेवाड़ी पुलिस को जांच का निर्देश दिया गया। आरोपी छात्रा को कनीना कस्बे से बैठाकर गांव में बने एक कोठड़े में लेकर गए थे। यह कोठड़ा झज्जर जिले के गांव बहुझौलरी के पास है। यहां से झाड़ली प्लांट नजदीक है। इसके बाद पुलिस ने वारदात स्थल का निरीक्षण किया तो कहा कि कोठड़ा झज्जर जिले की सीमा में आता है। इस बात को लेकर कहा गया कि इसकी जांच झज्जर पुलिस को दे दी जाए। इसी बीच मामला आला अधिकारियों के संज्ञान में आया तो उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इतनी बड़ी वारदात के बाद भी सीमा विवाद करना बेहद गंभीर है। इसके बाद मामला कोसली थाना क्षेत्र में माना गया और मामले में जिला पुलिस महेंद्रगढ़ पुलिस के साथ काम करने में जुट गई।
कोठड़े में खाने-पीने की थी पूरी व्यवस्था
छात्रा से आरोपियों ने जिस कमरे में दुष्कर्म किया उसमें वह तमाम सुविधाएं मौजूद थीं जो किसी पार्टी के लिए चाहिए होती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ट्यूबवेल मालिक इस कमरे में अक्सर शराब पार्टी करता था। इसके बारे में गांव वाले पहले से जानते थे। 12 सितंबर की वारदात के बाद पुलिस की सीन ऑफ क्राइम टीम मौके का निरीक्षण कर चुकी है। इसके बाद पुलिस ने कोठड़े को सील किया था। रविवार को कोठड़े की जांच की तो वहां रेफ्रिजरेट के साथ गैस चूल्हा, रोटियां बनाने के लिए चकला-बेलन सहित अन्य सामान व मसाले मिले। कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतलें मिली हैं। माना जा रहा है कि कोल्ड ड्रिंक को वारदात वाले दिन लाया गया होगा। कोठड़े में शराब की कोई बोतल नहीं मिली है, लेकिन बाहर कई खाली गिलास मिले हैं। कोठड़े के बाहर पानी की टंकी के पास एक ग्लब्स मिला है। माना जा रहा है आरोपियों ने छात्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद जब चिकित्सक को बुलाया होगा तो इसका प्रयोग किया होगा।