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बीबीए छोड़ थामी बंदूक, सेना से रिटायर पिता ने बताई बेटे के बदमाश बनने की वजह, शव लेने से इंकार

Mon, 25 Mar 2019 01:01 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लाडवा (कुरुक्षेत्र)
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बदमाश जबरा का एनकाउंटर
बिजनेसमैन बनना चाहता था, पर उसने बीबीए छोड़कर बंदूक थाम ली। सेना से रिटायर पिता ने बेटे के शातिर बदमाश बनने की वजह बताई, लेकिन उन्होंने उसका शव लेने से इंकार कर दिया।
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बदमाश जबरा का एनकाउंटर
करनाल जिले के गांव मुगल माजरा और बड़ के बीच पड़ने वाले जंगल में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में पांच लाख रुपये का इनामी शामिर बदमाश जब्बर उर्फ जबरा मारा गया। सूचना मिली थी कि जबरा दिल्ली नंबर की कार में करनाल की ओर जा रहा था। पुलिस को देखकर जबरा ने गांव मुगल माजरा की ओर गाड़ी मोड़ दी। जंगल में उसने पुलिस की गाड़ी पर फायर किया, गोली गाड़ी के शीशे पर लगी। पुलिस ने भी जवाबी फायर किया तो जबरा की कार सड़क से नीचे उतर क्षतिग्रस्त हो गई। वह कार से उतरकर दौड़ा और पुलिस पर फायर किया। पुलिस की जवाबी फायरिंग में बदमाश जबरा को चार गोलियां लगने से उसकी मौत हो गई।
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बदमाश जबरा का एनकाउंटर
जबरा हत्या के मामले में उम्रकैदी था और पैरोल पर आने के बाद फरार चल रहा था। शातिर बदमाश जबर सिंह ऊर्फ जबरा की करतूतों से उसके सगे-संबंधी भी परेशान थे। आए दिन जबरा की करतूतों की वजह से पुलिस की पूछताछ और जांच पड़ताल से परिजन भी परेशान हो चुके थे। लेकिन जबरा का पोस्टमार्टम के बाद शव देने घर पहुंचे पुलिसकर्मियों को परेशानी तब बढ़ी, जब उसके पिता और भाई ने शव लेने से इंकार कर दिया। आखिरकार पुलिस के समझाने के बाद चाचा हरविंद्र सिंह शव लेने को तैयार हुए। शव सौंपने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली। इसके बाद चाचा ने ही जबरा का अंतिम संस्कार किया।

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बदमाश जबरा का एनकाउंटर
एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया ने बताया कि जबरा पर कुरुक्षेत्र और करनाल में तीन मर्डर, लूट, डकैती सहित 12 मामले दर्ज थे। फरवरी 2015 में कुरुक्षेत्र में एक हत्या के मामले में जबरा को उम्रकैद की सजा भी सुनाई थी। इस मामले में वह पैरोल पर आया था, तभी से फरार था। 29 जुलाई 2018 को जबरा ने बदमाश कृष्ण दादुपुर के साथ अंजनथली गांव में बबली की गोली मारकर हत्या की थी। 17 जनवरी, 2019 को बबली के भाई नरेश के साले विकास उर्फ पिंटू की भी जीटी रोड पर सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी। 22 जनवरी, 2019 को जिला पुलिस ने कृष्ण दादुपुर खुर्द और जबरा लाडवा पर 5-5 लाख रुपये का इनाम रखा था। सन्नी पर दो लाख रुपये का इनाम रखा हुआ है। दूसरे बदमाश कृष्ण दादुपुर की तलाश जारी है। करनाल के बुटाना के बबली हत्याकांड के बाद वो काफी चर्चित हुआ था।
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बीबीए में दाखिला लिया था, बिजनेसमैन बनने के लिए
जबरा मूल रूप से कुरूक्षेत्र के गांव मेहरा का निवासी था और तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा था। उसके पिता मंजीत सिंह रिटायर्ड फौजी हैं, जो गांव मेहरा से लाडवा की महावीर कॉलोनी में आकर रहने लगे थे। महावीर कालोनी में ही उसके पिता ने दूध की डेयरी खोलकर दूध बेचने का काम कर रखा था, जिसे उसके पिता व बड़ा भाई देखते थे। जबरा का बड़ा भाई और बहन विवाहित हैं, जबकि जबरा अविवाहित था। पिता ने बताया कि जबरा ने साल 2010 में करनाल के डीएवी पीजी कॉलेज में बीबीए (बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिस्ट्रेशन) में दाखिला लिया था। वह बिजनेस एडमिनिस्ट्रेटर बनने आया था, लेकिन केवल दो साल की पढ़ाई के बाद ही उसका मन भर गया और मारपीट के मामलों में शामिल होने लगा। इसके बाद वह कृष्ण दादुपुर और दिलबाग के संपर्क में आ गया। यहां से उसने शराब के कारोबार में कदम रखा।

 
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बदमाश जबरा का एनकाउंटर
गोली चलाते समय हाथ भी नहीं कांपते थे
जब्बर सिंह ही कुछ ही वर्षों में जबरा बन गया था। वह अपने साथ पिस्तौल, रिवॉल्वर आदि रखने लगा था। जुर्म की दुनिया में वह इतना घुस गया था कि किसी पर गोली चलाते समय उसके हाथ नहीं कांपते थे और उसने एक के बाद एक तीन हत्याएं कर दीं। लूट, डकैती की और एक गैंग खड़ी कर ली। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि जबरा बड़ा शातिर था, वह न तो अपने पास फोन रखता था और न ही किसी अन्य को अपने साथ रखता था। वह अकसर अकेला रहता था, ताकि उसकी लोकेशन न पता लग सके। उसने हत्या, डकैती, लूट समेत 12 वारदात को अंजाम दिया और आतंक का पर्याय बन गया। जबरा का आतंक इतना था कि हरियाणा पुलिस को उस पर 5 लाख रुपये तक का इनाम रखना पड़ा। आखिरकार बदमाश को जो अंत होता है, उसका भी वही हुआ। सरकारी गोली से मौत।
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करनाल से ही शुरू और यहीं पर खत्म
जब्बर सिंह से जबरा वह करनाल में ही बना। शराब के धंधे में घुसा तो पैसे कमाए और बदमाश बन गया। शराब ठेकेदारों के साथ मारपीट तो करता ही था। अवैध रूप से दूसरे एरिया में शराब डालने का काम भी करने लगा। लेकिन करनाल ही धरती पर जबरा का अंत भी हो गया। 20 सितंबर 2014 में जबरा पर पहला मामला दर्ज हुआ मारपीट करने का। इसके बाद एक के बाद एक उसने तीन हत्याएं कीं। इनमें सबसे पहली हत्या लाडवा में ही एक व्यक्ति की 26 फरवरी 2015 को की थी। अगले दिन ही पुलिस ने जबरा को गिरफ्तार कर लिया था और उसे जेल भेज दिया। इसके बाद वह पैरोल पर बाहर आया और फिर लूट, डकैती, हत्याएं करने लगा। पुलिस की स्पेशल टीम पिछले चार माह से जबरा और कृष्ण दादुपुर का पीछा कर रही थी।
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जबरा और कृष्ण दोनों ही खतरनाक बदमाश थे, करनाल पुलिस ने उसका डटकर सामना किया और आमने-सामने की फायरिंग में वह मारा गया। फेसबुक में वह अकसर अपनी व अवैध हथियारों की फोटो डालता रहता था। अवैध हथियार की फोटो डालकर लिखता था, जो चाहिए ले लो। उसने फेसबुक पर लिखा हुआ था वेल्हा जट पंगा लेन नू। अब पुलिस कृष्ण दादुपुर की तलाश कर रही है।
- सुरेंद्र सिंह भौरिया, एसपी, करनाल
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