फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेटी ने पति संग मिलकर खत्म कर दी थी पूरी फैमिली...एक साथ 8 हत्याएं, अब एक और कांड

Fri, 13 Jul 2018 12:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर(हरियाणा)
विज्ञापन
1 of 7
रेलू राम पूनिया हत्याकांड
एक बेटी ने अपने पति के साथ मिलकर अपने ही मां-बाप, भाई और बच्चों समेत 8 लोगों की हत्या कर दी गई थी। अब उसी पति ने एक और कांड कर दिया है। जिसने पुलिस विभाग तक के होश उड़ा दिए हैं और अब एक नया सच सामने आया है।
विज्ञापन

2 of 7
रेलू राम पूनिया हत्याकांड
यह हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। क्योंकि परिवार का हत्यारा, मृतक का दामाद संजीव फरार हो गया है। वह पैरोल पर आया था, लेकिन 14 दिन की समय सीमा खत्म होने के बाद भी वह जेल नहीं लौटा। अब पता चला है कि उसने पुलिस को चकमा दिया है। वह हरियाणा में यमुनानगर के चंगनौली स्थित अपने घर गया ही नहीं। वहीं जांच में पता चला है कि संजीव को पैरोल से फरार कराने की साजिश उसके चचेरे भाई नितिन कुमार ने रची थी।
विज्ञापन

3 of 7
रेलू राम पूनिया हत्याकांड
संजीव ने जेल में सरकारी फोन से नितिन को फोन कर उसकी पैरोल कराने को कहा था। इसके बाद नितिन ने अपने खर्च पर वकील हायर किया। पैरोल पर आने के बाद संजीव सहारनपुर में ही अपने घर रहा। 31 मई तक वहीं रहा, उसके बाद वहां से संजीव चला गया। यह बात पूछताछ के दौरान नितिन ने डिटेक्टिव स्टाफ को बताई। वीरवार को डिटेक्टिव स्टाफ ने सहारनपुर की लक्ष्मणपुरी कॉलोनी निवासी नितिन को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

4 of 7
रेलू राम पूनिया हत्याकांड
डिटेक्टिव इंचार्ज जयपाल आर्य ने बताया कि नितिन ने ही संजीव की पैरोल के लिए पहले वकील हायर किया। इसके बाद चंगनौली के पूर्व सरपंच बलदेव व उसके बेटे कुलबीर के साथ मिलकर पूरी प्लानिंग तैयार की। इसके लिए जमानतियों को एक-एक लाख रुपये के चेक दिए गए। इस पैसे का इंतजाम भी नितिन ने ही किया था। आर्य ने बताया कि संजीव की तलाश में टीमें दबिश दे रही है। उसका अभी तक पता नहीं लगा है। पूछताछ में उसने कबूला कि संजीव को फरार कराने में वह शामिल था।  
विज्ञापन

5 of 7
jail
ये था मामला  
हिसार के पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया सहित परिवार के आठ सदस्यों का हत्यारोपी संजीव जेल में बंद था। संजीव को 16 मई से लेकर 31 मई तक जेल से जमानत मिली थी। परंतु 31 मई के बाद संजीव जेल में वापस नहीं लौटा। कुरुक्षेत्र जेल के डीएसपी सुभाष चंद ने उसका इंतजार करने के बाद 10 जून को थाना बिलासपुर में उसके खिलाफ केस दर्ज कराया था। इस मामले में बाद में पुलिस ने पूर्व सरपंच सहित कई लोगों पर केस दर्ज किया था।
विज्ञापन

6 of 7
knife
गौरतलब है कि 23 अगस्त 2001 को अंबाला के प्रभुवाला गांव में पूर्व विधायक रेलूराम और उनके परिवार के 8 लोगों की हत्या कर दी गई थी। मृतकों में रेलूराम पूनिया के अलावा उनकी पत्नी कृष्णा, बेटे सुनील, बहू शकुंतला, बेटी प्रियंका, 4 साल के पोते लोकेश, ढाई साल की पोती शिवानी और डेढ़ महीने की प्रीति शामिल थे। 31 मई 2004 को सेशन जज की अदालत ने मृतक की बेटी सोनिया और दामाद संजीव को फांसी की सजा सुनाई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
court
2 अप्रैल 2005 को हाईकोर्ट ने सजा को उम्रकैद में बदला। 15 फरवरी 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने सेशन जज की सजा बरकरार रखने का फैसला दिया। 23 अगस्त 2007 को समीक्षा याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज हुई। सेशन जज ने 26 नवंबर 2007 को फांसी देने की तारीख मुकर्रर की। सोनिया और संजीव ने राष्ट्रपति के पास दया के लिए याचिका लगाई। 3 अप्रैल 2013 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दया याचिका खारिज कर दी थी। जनवरी 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की फांसी की सजा उम्रकैद में बदल दी थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें