रेप केस बढ़ते जा रहे हैं। इसके पीछे एक मुख्य कारण लोगों के मन में इसे लेकर कई भ्रांतियां भी हैं। जानिए, कानून की नजर में 'रेप' की पूरी परिभाषा।
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देखिए कौन-कौन सी हरकतें ऐसी हैं, जो कानून की नजर में रेप
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इंडियन पेनल कोड की धारा-375 के तहत रेप को परिभाषित किया गया है। कानून के तहत अगर किसी महिला के साथ कोई पुरुष जबरन शारीरिक संबंध बनाता है तो वह रेप होगा। महिला के साथ किया गया यौनाचार या दुराचार दोनों ही रेप के दायरे में होगा।
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महिला के शरीर के किसी भी हिस्से में (मुंह, कान, नाक आदि) अगर पुरुष अपना निजी अंग डालता है तो वह भी रेप के दायरे में होगा। महिला के निजी अंग में अगर पुरुष अपने शरीर का कोई भी हिस्सा (उंगली आदि) या कोई भी ऑब्जेक्ट डालता है तो वह भी रेप ही माना जाएगा।
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महिला के कपड़े उतारना या बिना उतारे ही उसे सेक्स करने के लिए पोजिशन में लाया जाता तो वह भी रेप के दायरे में होगा। महिला की उम्र अगर 18 साल से कम है और सेक्स में उसकी सहमति है तो भी वह रेप होगा। गौरतलब है कि पहले यह उम्र सीमा 16 साल थी।
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नाबालिग लड़की की सहमति को सहमति नहीं माना जाएगा। अगर कोई शख्स किसी महिला को डरा कर सहमति ली हो या उसके किसी नजदीकी को जान की धमकी देकर सहमति ली गई हो तो भी वह सहमति नहीं मानी जाएगी औऱ ऐसा संबंध रेप होगा। अगर कोई महिला प्रोटेस्ट न कर पाए तो इसका मतलब सहमति है, ऐसा नहीं माना जाएगा।
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महिला ने अगर यह समझते हुए सहमति दी है कि आरोपी उसका पति है या भविष्य में उसका पति बन जाएगा, जबकि आरोपी उसका पति नहीं है तो भी ऐसी सहमति से बनाया गया संबंध रेप होगा। यानी समाज के सामने शादी करने का वादा, घर या मंदिर में चुपचाप मांग में सिंदूर भर देना या वरमाला पहनाकर खुद को पति बताने का झांसा दे कर बनाया गया संबंध भी रेप के दायरे में होगा।
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जब महिला की सहमति ली गई, उस वक्त उसकी दिमागी हालात ठीक नहीं हो या फिर उसे बेहोश करके या नशे की हालत में सहमति ली गई हो या फिर उस हालत में संबंध बनाए गए हों तो वह सहमति सहमति नहीं मानी जाएगी। आईपीसी की धारा-90 में बताया गया है कि वैसी सहमति का कोई मतलब नहीं है, जिसमें गलत वादे या धोखे से सहमति ली गई हो। शादी का वादा कर संबंध बनाए जाने के मामले को रेप के दायरे में इसी प्रावधान के साथ देखा जाता है।
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रेप के केस में पीड़िता की उम्र को प्रूव करना केस को किसी भी मुकाम पर पहुंचाने के लिए बहुत जरूरी है। 10वीं के एजुकेशनल सर्टिफिकेट में लिखी उम्र सबसे बड़ा प्रूफ है। अगर 10वीं का सर्टिफिकेट मौजूद नहीं है तो पढ़ाई की शुरुआत के वक्त स्कूल आदि में लिखाई गई उसकी उम्र का सर्टिफिकेट। वह भी न हो तो कॉर्पोरेशन व पंचायत आदि का सर्टिफिकेट मान्य होता है। इन तीनों के न होने पर बोन एज टेस्ट कराया जाता है।
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बोन एज टेस्ट से किसी लड़की की उम्र को सटीक नहीं आंका जा सकता। अगर लड़की की उम्र 16 साल बताई गई हो तब बोन एज टेस्ट से उसकी उम्र 14 से लेकर 18 साल तक आंकी जा सकती है। ऐसे में लड़की की उम्र को 18 साल माना जाता है और उसे बालिग करार दिया जा सकता है। कानून के मुताबिक जो लड़की बालिग है, वह शारीरिक संबंध बनाने के लिए सहमति दे सकती है और तब वह रेप नहीं माना जाएगा।
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रेप और छेड़छाड़ के मामले में लड़की का बयान अहम सबूत है। अगर बयान पुख्ता है और उसमें कोई विरोधाभास नहीं है तो किसी दूसरे अहम सबूत की जरूरत नहीं है। ऐसे मामले में शिकायत के बाद पुलिस को अधिकार है कि वह आरोपी को गिरफ्तार कर ले। आरोपी को ट्रायल के दौरान अपने बचाव का मौका दिया जाता है। इस दौरान वह अपने को बेगुनाह साबित करने के लिए गवाह और सबूत पेश कर सकता है।
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कोई बालिग है और अपनी मर्जी से संबंध बनाता है तो वह उसका अधिकार है। लेकिन इस आड़ में अगर उसका पार्टनर धोखा देता है तो उस पर केस चल सकता है। अगर शादी का झांसा देकर सहमति ली जाए और संबंध बनाए जाएं और बाद में शादी के वादे से मुकर जाया जाए तो वह रेप होगा।
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अगर कोई महिला अपने पति से कानूनी तौर पर अलग रह रही हो और उस दौरान पति उसके साथ जबरदस्ती करता है तो वह रेप होगा। अगर पत्नी की उम्र 15 साल से कम है औऱ उसके साथ संबंध बनाए जाते हैं तो वह भी रेप के दायरे में होगा। लेकिन पत्नी की उम्र अगर 15 साल से ऊपर है तो पति के खिलाफ जबर्दस्ती करने पर भी रेप का केस नहीं हो सकता।
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रेप के लिए आईपीसी की धारा-376 के तहत कम से कम 7 साल और ज्यादा से ज्यादा उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया गया है। आईपीसी की धारा-376 ए के तहत प्रावधान किया गया है कि अगर रेप के कारण महिला वेजिटेटिव स्टेज (मरने जैसी स्थिति) में चली जाए तो दोषी को अधिकतम फांसी की सजा हो सकती है।
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गैंगरेप के लिए 376 डी के तहत सजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें कम से कम 20 साल और ज्यादा से ज्यादा उम्रभर के लिए जेल (नेचरल लाइफ तक के लिए जेल) का प्रावधान किया गया। अगर कोई शख्स रेप के लिए पहले भी दोषी करार दिया गया हो और दोबारा रेप या गैंग रेप के लिए दोषी पाया जाता है तो 376-ई के तहत उसे उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा हो सकती है।
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चंडीगढ़ में पुलिस रिकार्ड में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक इस साल 01 जनवरी से लेकर 25 अक्तूबर तक रेप के 67 केस दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल 64 मामले ही दर्ज हुए थे। रेप के बहुत कम मामले पुलिस रिकार्ड में दर्ज होते हैं। अधिकांश मामलों में लड़कियां या तो चुप हो जाती है या समाज में बदनामी के डर से दबा लिए जाते हैं।