रमजान का पवित्र महिना चल रहा है और इसमें लड़कियां कुरान पढ़ती हैं। जानिए यह कैसे मनाया जाता है और लोग रोज क्यों रखते हैं, शायद जानते नहीं होंगे।
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रमजान मुबारक
- फोटो : अमर उजाला
30 मई से रमजान का महीना शुरू हो गया था, वहीं इस बार 30 साल बाद जून के महीने में रमजान आया। चंडीगढ़ में सेक्टर-26 स्थित नूरानी मस्जिद के मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने बताया कि गर्मी की शिद्दत और दिन में सुबह से लेकर शाम 14 से 15 घंटे लंबा समय इस पवित्र रमजान की विशेषता होगी। रमजान का महीना बेहद पाक और रहमतों वाला होता है।
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ramzan
कासमी ने बताया कि इस दौरान 30 दिन तक रोजे रखे जाते हैं। सूर्य निकालने से पहले और सूर्य के डूबने तक किसी भी तरह की चीज खाने पीने परहेज करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही आंख, दिल और पूरा शरीर को बुराइयों से बचाना भी जरूरी है। रमजान के रात में एक विशेष नमाज होती है जिसे तराबीह कहा जाता है। यह सबसे लंबी 20 रकाआत दो-दो करके जमात के साथ मस्जिदों में पढ़ी जाती है।
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रमजान मुबारक
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कासमी ने बताया कि रमजान शरीफ में शब ए कद्र की रात का विशेष महत्व होता है। रमजान की 21, 23, 25, 27 और 29 में से एक रात शब ए कद्र होती है। इसलिए इन रातों में खास इबादत पढ़ी जाती है। जिसके लिए ऐतिकाल किया जाता है। मोहम्मद अनस कासमी ने कहा कि रजमान शरीफ में विशेष तौर पर हुक्म है कि दान करो। बुराइयों से बचो। यह महीना दुआओं का भी है और कुरान का भी।
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मस्जिद में नमाज पढ़ते लोग
- फोटो : अमर उजाला
कासमी ने बताया कि रमजान के पवित्र माह में मुस्लिम समुदाय की दिनचर्या बदल जाती है। रोजा रखने के साथ ही पांच वक्त की नमाज और कुरान शरीफ की तराबी मन को एकदम बदल देता है। कई मुस्लिम दिनभर कुरान शरीफ पढ़ते रहते हैं। सिटी ब्यूटीफुल में भी रमजान पर काफी लोग रोजा रखते हैं। रोजा रखने के दौरान कई धार्मिक गतिविधियां होती हैं।
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मस्जिद में नमाज पढ़ते लोग
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नगर निगम चंडीगढ़ के मनोनीत पार्षद हाजी मोहम्मद खुर्शीद अली ने बताया कि रमजान के महीने में घर का माहौल धार्मिक हो गया है। बेटियां कुरान शरीफ पढ़ रही हैं। खुर्शीद की पत्नी हुश्न बानो कहती हैं कि वे हर रोज सुबह दो बजकर 30 मिनट पर उठती हैं। शहरी तैयार करने के बाद वे सभी घर वालों को जगाती हैं। फिर तहाज्जुद की नमाज अदा करती हैं।
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मस्जिद में नमाज पढ़ते लोग
- फोटो : अमर उजाला
बानो कहती हैं कि इससे बहुत सवाब (पुण्य) मिलता है। सबसे अच्छी बात यह है कि शहरी के वक्त परिवार के सभी लोग एक साथ होते हैं। दोनों बेटियां भी इस पाक महीने में कुरान पढ़ती हैं। रामदरबार में रहने वाले हाजी अब्दुल रईस ने बताया कि वे छह भाईयों और उनके परिवार के साथ इकट्ठे रहते हैं। रईस का कहना है कि रमजान के पवित्र महीने का इंतजार रहता है। उपवास रखना। धर्म पूर्वक रहना। यही दिनचर्या है।
रईस बताते हैं कि छोटे बच्चों को छोड़कर पूरा परिवार रोजा रखता है। घर में सभी लोग एक-दूसरे का हाथ बंटाते हैं। बेगम शाहजहां का कहना है कि पूरा परिवार रमजान में रोजा रखता है। अल्लाह की इबादत करते हैं, ताकि परिवार समाज और देश में अमन और सलामती रहे। सेक्टर-26 स्थित नूरानी मस्जिद के मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने बताया कि रमजान का महीना बेहद पाक और रहमतों वाला होता है।