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छोटे से गांव से निकले, दुनिया के नंबर वन पहलवान बने, 'खेल रत्न' बजरंग पूनिया की पांच अनकही बातें

Fri, 30 Aug 2019 11:21 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झज्जर(हरियाणा)
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बजरंग पूनिया
एक छोटे से गांव से निकले और दुनिया के नंबर वन पहलवान बन गए। इसी बहादुरी और हौसले के लिए अब उन्हें खेल रत्न अवार्ड दिया गया। जानिए बजरंग पूनिया के बारे में अनकही बातें-
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बजरंग पूनिया
विश्व के नंबर एक पहलवान बजरंग पूनिया, हरियाणा के झज्जर जिले के गांव खुदान के रहने वाले हैं। इन्हें भारत सरकार की ओर से खेल रत्न अवार्ड दिया गया है। हाल ही में वह दुनिया के नंबर वन पहलवान घोषित किए गए। बजरंग पूनिया ने ताजा विश्व रैंकिंग में 65 किग्रा फ्रीस्टाइल कैटेगरी में नंबर वन रैंक हासिल की। कुश्ती की शीर्ष संस्था यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) ने अपनी ताजा रैंकिंग जारी की, जिसमें बजरंग पूनिया 96 नंबर के साथ पहले नंबर पर हैं।
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बजरंग पूनिया
बजरंग पूनिया भारत के एकमात्र पहलवान हैं, जो अपने वर्ग की वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप-10 में शामिल हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियर गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले बजरंग ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। बजरंग को विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में जापान के 19 वर्षीय ताकुटो ओटोगुरो के हाथों 9-16 की शिकस्त झेलनी पड़ी। इस हार के साथ पहली बार विश्व कुश्ती चैंपियनशिप खिताब जीतने का उनका सपना अधूरा रह गया।

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बजरंग पूनिया
साथ ही एक सत्र में तीन बड़े खिताब जीतने का सपना भी टूट गया, लेकिन उन्होंने अपने नाम एक खास उपलब्धि दर्ज करा ली है। वह विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बन गए। इससे पहले उन्होंने 2013 में फ्रीस्टाइल कुश्ती के 60 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता था। विश्व चैंपियनशिप में भारत के लिए स्वर्ण पदक अब तक सुशील कुमार ने ही जीता है, उन्होंने 2010 में मास्को में 66 किलो वर्ग में यह कमाल किया था।
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बजरंग पूनिया
बजरंग पूनिया ने साल 2019 में जॉर्जिया में त्बिलिसी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास रचा। इस पदक के साथ पांच गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतने वाले बजरंग इकलौते पहलवान बन गए। ऑस्ट्रेलिया में अप्रैल 2018 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स से शुरू हुआ मेडल जीतने का सफर लगातार जारी है। बजरंग पूनिया ने अप्रैल 18 से अभी तक छह टूर्नामेंट खेले और इन सभी में मेडल जीते हैं।
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बजरंग पूनिया
बजरंग का लगातार मेडल जीतने का सफर- अप्रैल 2018 में ऑस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल, अगस्त 2018 में जर्काता में हुए एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल, अक्टूबर 2018 में हंगरी में हुई विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में रजत पदक, अप्रैल 2019 में चीन में हुई एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल, मई 2019 में बुल्गारिया में हुए अली अलीयेव अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल, अगस्त 2019 में जॉर्जिया में हुए तिबल अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीता
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बजरंग पूनिया
बजरंग पूनिया सात साल की उम्र से ही पूनिया कुश्ती के दांव पेच सीखने लगे थे। कुश्ती के लिए बजरंग को उनके पिता ने काफी प्रोत्साहित किया। उनके भाई का नाम हरेंद्र सिंह पू्निया है। साल 2015 में उनका परिवार खेल प्रधिकरण के क्षेत्रीय केंद्र में भाग लेने के लिए सोनीपत चला गया और यहीं रहने लगा। बजरंग पूनिया मौजूदा समय में भारतीय रेल में टीटीई के पद पर तैनात हैं।

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बजरंग पूनिया
पूनिया को 11 मार्च 2019 को पद्मश्री अवार्ड से नवाजा गया था। उन्हें साल 2015 में अर्जुन अवार्ड मिला था और अब खेल रत्न अवार्ड मिला है। पूनिया के करियर की बात करें तो, उन्होंने 60 किलोग्राम भार वर्ग में  साल 2013 में दिल्ली में आयोजित एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वहीं साल 2013 में ही वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप्स में हंगरी के बुडापेस्ट में बजरंग ने ब्रॉन्ज अपने नाम किया था। ग्लासगो में साल 2014 में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन किया गया।
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बजरंग पूनिया
भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया ने 61 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया था। इसके अलावा 2014 एशियन गेम्स, 2014 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप्स में भी देश के लिए रजत पदक जीत चुके हैं। वहीं साल 2017 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेल 2018 में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच चुके हैं। एशियन गेम्स 2018 में बजरंग पूनिया ने फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में जापान के पहलवान तकातानी डियाची को 11-8 से हराकर गोल्ड मेडल जीता।
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