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20 साल से व्हीलचेयर पर, 31 ऑपरेशन 183 टांके, 'खेल रत्न' दीपा मलिक के बारे में 10 अनकही बातें

Fri, 30 Aug 2019 10:41 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
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एथलीट दीपा मलिक - फोटो : एएनआई
20 साल से व्हीलचेयर पर हैं। 31 ऑपरेशन हुए और 183 टांके लगे थो, पर दीपा मलिक ने हिम्मत नहीं हारी। पढ़िए 'खेल रत्न' के गजब के जुनून और हौसले की कहानी...
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एथलीट दीपा मलिक
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एथलीट दीपा मलिक को राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड से सम्मानित किया। दीपा मलिक रियो पैरालंपिक 2016 में शॉट पुट में सिल्वर मेडल जीतने वालीं पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। वहीं खेल रत्न अवार्ड पाने वाली पहली भारतीय महिला पैरा एथलीट बन गई हैं। दीपा मलिक ने एशियन गेम्स में भी सिल्वर मेडल जीता था। अपनी उपलब्धियों के लिए दीपा मलिक को पद्मश्री अवार्ड से भी नवाजा गया था।
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एथलीट दीपा मलिक
30 सितंबर 1970 को हरियाणा के सोनीपत में भैंसवाल गांव में जन्मीं दीपा मलिक को 29 साल की उम्र में लकवा मार गया था। उनकी कमर के नीचे का पूरा हिस्सा पैरालाइज्ड है। रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर होने की वजह से वह चल नहीं पाती हैं। दीपा मलिक जिस समय ट्यूमर जैसी बीमारी से जंग लड़ रही थीं, उसी समय उनके पति कारगिल में देश के लिए जंग लड़ रहे थे। दीपा की स्पाइनल ट्यूमर सर्जरी हुई और उनको 183 टांके लगे।

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एथलीट दीपा मलिक
दीपा रिटायर्ड कर्नल बीके नागपाल की बेटी हैं। उनकी शादी भी एक फौजी से हुई। पति सेना अधिकारी कर्नल विक्रम सिंह हैं। दीपा की दो बेटियां हैं, देविका और अंबिका है। दीपा ने 36 साल की उम्र में अपने खेल की शुरुआत की थी। दीपा को शॉटपुट के अलावा भी कई गेम्स में महारथ हासिल है। वे जेवलिन थ्रो, डिस्कस थ्रो, स्विमिंग और मोटर स्पोर्ट्स से भी जुड़ी हुई हैं। एक स्पोर्ट्स पर्सन होने के अलावा दीपा एक एंटरप्रेनर भी रही हैं।
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एथलीट दीपा मलिक
दीपा ने 7 सालों तक कैटरिंग और रेस्टोरेंट बिजनेस भी किया है। इसके अलावा दीपा एक मोटिवेशनल और इंस्पिरेशनल स्पीकर भी हैं। दीपा मलिक ने अपनी उम्र से ज्यादा स्वर्ण पदक जीत कर जज्बे, जोश और जीवटता की मिसाल पेश कर दी है। दीपा ने 2009 में शॉट पुट में अपना पहला पदक(कांस्य) जीता था। इसके अगले ही साल ऐसा कमाल किया कि इंग्लैंड में शॉटपुट, डिस्कस थ्रो और जेवलिन तीनों में गोल्ड मेडल जीते।
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एथलीट दीपा मलिक
उस साल दीपा के सितारे बुलंदी पर रहे और उसने चाइना में पैरा एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता। वहां कांस्य जीतने वाली दीपा पहली भारतीय महिला बनीं। दीपा खेल में ही आगे नहीं है, वह सामाजिक कार्य करने के साथ-साथ लेखन भी करती हैं। दीपा गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए कैंपेन चलाती हैं और सामाजिक संस्थाओं के कार्यक्रमों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं। दीपा को लिखने का शौक है और वह अपनी बायोग्राफी लिख चुकी हैं।

 
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एथलीट दीपा मलिक
दीपा ने 2011 में वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। उसी साल शरजहां में वर्ल्ड गेम्स में दो कांस्य पदक जीते। वर्ष 2012 में मलेशिया ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जेवलिन व डिस्कस थ्रो में दो स्वर्ण पदक जीते। 2014 में चाइना ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप बीजिंग में शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीता। उसी साल इंच्योन एशियन पैरा गेम्स में रजत पदक जीकर रिकॉर्ड बनाया। यह साल भी दीपा मलिक के लिए बेहतर रहा है।

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एथलीट दीपा मलिक
पैरालंपिक में रजत से पहले ही दुबई में ओशिआनिया एशियन चैंपियनशिप में जेवलिन थ्रो में स्वर्ण व शॉटपुट में कांस्य पदक जीता। दीपा ने अब तक संन्यास की नहीं सोची है। उन्हें उम्मीद है कि 2022 के कॉमनवेल्थ खेलों में उनकी इवेंट शामिल होगी। नहीं तो एशियाई खेलों में वह जरूर पदक हासिल करेंगी। दीपा मलिक टोकियो पैरालंपिक में नजर नहीं आएंगी। उनकी शॉटपुट इवेंट को इन खेलों मेंशामिल नहीं किया गया है।

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एथलीट दीपा मलिक - फोटो : ANI
अब उन्होंने एडवेंचर स्पोर्ट्स में समुद्र पार करने की ठानी है। उन्होंने मालद्वीव जाकर इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। अगले साल वह 50 वर्ष की हो जाएंगी। उन्होंने लक्ष्य निर्धारित किया है कि अपने जीवन के 50वें वर्ष में वह समुद्र पार कर नया रिकार्ड बनाएंगी। पैरालंपिक में शामिल होने के लिए उन्होंने डिस्कस थ्रो शुरू कर दिया, लेकिन डॉक्टर ने मना कर दिया कि उनकी शारीरिक हालत ऐसी नहीं है कि वह इसे आगे जारी रख पाएं।
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एथलीट दीपा मलिक
दीपा को राष्ट्रपति रोल मॉडल अवार्ड-2014, लीडर एशिया एक्सीलेंस अवार्ड-2014, लिम्का पीपल ऑफ द ईयर अवार्ड-2014, कांगो करमवीर पुरस्कार-2014, एमेजिंग इंडिया अवार्ड-2013, कर्मवीर चक्र अवार्ड-2013, अर्जुन अवार्ड-2012, एक्सीलेंस अवार्ड फॉर स्पोर्ट्स-2012, महाराणा मेवाड़ अरावली स्पोर्ट्स अवार्ड-2012, मिसाल ए हिम्मत अवार्ड-2012, महाराष्ट्र छत्रपति अवार्ड स्पोर्ट्स-2009-10, हरियाणा कर्मभूमि अवार्ड-2008, स्वावलंबन पुरस्कार महाराष्ट्र-2006 आदि से नवाजा जा चुका है।
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