पीजीआई चंडीगढ़ के गायनी विभाग में कठपुतली से होने वाली इस थैरेपी को नया नाम दिया गया है पपेट थैरेपी। यह नया फार्मूला तैयार किया जा रहा है पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ एजुकेशन एंड मेडिकल रिसर्च (पीजीआई) चंडीगढ़ द्वारा।
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गजब: कठपुतलियां करेंगी गर्भवती महिलाओं की हेल्प
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पीजीआई के गायनी डिपार्टमेंट की ओपीडी के काउंसलिंग रूम में नर्सिंग स्टाफ गर्भवती महिलाओं को शैडो पपेट शो के जरिये बताएगा कि उनके टेस्ट से उनके गर्भ में पलने वाले शिशु पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा।
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यह प्रोजेक्ट फिलहाल प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया है और जल्द इसको लागू किया जाएगा। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ नर्सिंग एजुकेशन (नाइन) की लेक्चरर डॉक्टर अविनाश कौर राणा ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को प्री नेटल टेस्ट में कई भ्रांतियां होती हैं।
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मसलन, थैलेसीमिया के टेस्ट के लिए सैंपल लेने के लिए सूई भीतर जाती है तो वह गर्भ में पलने वाले शिशु को टच न कर जाए। शैडो पपेट से दिखाया जाएगा कि किस तरह से सैंपल लिया जाता है।
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शैडो के माध्यम से यह जानकारी भी दी जाएगी कि किस प्रकार से गर्भवती के गर्भ में पलने वाला बच्चे को डॉक्टर ऑब्जर्व करते हैं। शैडो बनाकर ही दिखाएंगे कि थैलेसीमिया कैसे होता है, क्या कारण हैं। इसे दिखाने के लिए दो बड़े गोलों (शैडो) का प्रयोग किया जाएगा।
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इसमें से एक रेड ब्लड सेल और दूसरी व्हाइट ब्लड सेल होती है। इन दोनों की रोचक बातचीत दिखाई जाएगी कि रेड ब्लड सेल से जीवनदान मिलता है और रेड ब्लड सेल को बेहतर करने के लिए गर्भवती को क्या करना चाहिए।
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पपेट थियेटर ग्रुप के शुभाशीष नेओगी ने कहा कि पपेट थैरेपी के लिए नर्सिंग स्टाफ को ट्रेंड किया जा रहा है। फिलहाल ‘नाइन’ की बीस नर्स को ट्रेंड किया जा रहा है। उनको सिखाया जा रहा है कि शैडो के जरिये गर्भवती के गर्भ में बच्चे की स्थिति भी दिखाई गई है। नर्सिंग स्टाफ को तैैयार करने वाली इस टीम में सुभाशीष नेओगी, सरिता देवी, सुरेखा धामी हैं।
सुभाशीष नेओगी ने कहा कि प्री नेटल टेस्ट में कई ऐसी बातें हैं जिनको सरल और मनोरंजक माध्यम से महिलाओं को समझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शैडो पपेट के जरिये गर्भधारण करने के बाद और डिलीवरी के बाद कैसे केयर की जानी है इसकी भी जानकारी दी जाएगी।