पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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हाईकोर्ट ने समिति के नेताओं को मांगपत्र पंजाब सरकार को सौंपने के आदेश दिए और सरकार को निर्देश दिए कि वह 19 मार्च तक बताए कौन सी मांगे पूरी हो सकती है और कौन सी नहीं। जो पूरी नहीं हो सकती उसका कारण क्या है। साथ ही कहा कि सरहद पर जो हालात हैं उन्हें देखते हुए किसी भी स्थिति में सेना की सप्लाई प्रभावित नहीं होने दी जा सकती।
कोर्ट ने किसानों को कहा, आपको समझना होगा देश पहले है और आपकी मांग बाद मे। कोर्ट ने कहा रेलवे ट्रैक खाली करो और जो निर्धारित जगह है वहां प्रदर्शन कर सकते हो। कोर्ट ने एजी पंजाब, किसान नेताओं व याचिकाकर्ता के वकील को चेंबर में बुलाया और उनका पक्ष जाना। एक घंटे बाद किसान नेताओं ने कहा कि देश हित में उन्होंने रेलवे ट्रैक खाली करने का निर्णय लिया है। चीफ जस्टिस ने पंजाब एजी अतुल नंदा को कहा कि 1 घंटे में हमने किसानों के साथ बैठकर बातचीत करके हल निकाला है क्या पंजाब सरकार ऐसा नहीं कर सकती थी।
चीफ जस्टिस के सामने नेताओं पर आरोप
संघर्ष समिति के नेताओं ने कोर्ट से बाहर आकर बताया कि उन्होंने चीफ जस्टिस को जानकारी दी है कि इंद्रजीत सिंह जीरा और कुलबीर सिंह जीरा किसानों की जमीनें हड़प रहे हैं और उन पर केस दर्ज करवा रहे हैं। उन्होंने कहा इसकी जांच हाईकोर्ट के वर्तमान जज से करवाई जाए। इस पर चीफ जस्टिस ने उन्हें अपनी मांगे हलफनामे के माध्यम से सौंपने के आदेश दिए हैं।