देश के एक बड़े राज्य ने पहले वीआईपी कल्चर खत्म किया और अब विधायकों के लिए ऐसा नियम लागू करने जा रहा है, जानकर देशवासी सरकार को शाबाशी देंगे।
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punjab govt proposal for MLA
दरअसल, पंजाब सरकार सूबे के सभी विधायकों के लिए उनकी अचल संपत्ति सार्वजनिक करना अनिवार्य करने जा रही है। विधायकों को अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान केवल एक बार ही नहीं बल्कि हर साल पहली जनवरी को अपनी अचल संपत्ति की घोषणा करनी होगी। जाहिर है, देश की राजनीति में नजर आने वाले ऐसे मामले, जिनमें कुछ लाख की संपत्ति वाले विधायक-सांसदों की संपत्ति पांचवें साल में करोड़ों में दिखाई देती है, पंजाब की राजनीति में ऐसा नहीं हो सकेगा।
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प्रदेश के संसदीय कामकाज मामलों के विभाग ने उक्त मामले में एक प्रस्ताव तैयार कर पंजाब सरकार के रूल्स आफ बिजनेस 1992 के नियम 37 के तहत कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेज दिया है। उम्मीद है कि आगामी कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी जाएगी। प्रस्ताव में कहा गया है कि पंजाब लेजिसलेटिव असेंबली (सदस्यों के वेतन व भत्ते) एक्ट 1942 में संशोधन करते हुए एक्ट की धारा 3-एए के बाद धारा 3-एएए को शामिल कर लिया जाए।
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इसके तहत विधायकों के लिए हर साल एक जनवरी को अपनी अचल संपत्तियों की घोषणा करना अनिवार्य होगा। प्रस्ताव में यह भी साफ कर दिया गया है कि आगामी कैबिनेट की बैठक में अगर इस संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो सभी विधायकों को वर्ष 2017-18 के लिए अपनी अचल संपत्तियों की तुरंत घोषणा करनी होगी। विभाग ने सूबे के संसदीय कार्यमंत्री और मुख्यमंत्री की ओर से प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद इसे कैबिनेट के समक्ष पेश करने के लिए भेज दिया है।
उल्लेखनीय है कि पंजाब लेजिसलेटिव असेंबली (सदस्यों के वेतन व भत्ते) एक्ट 1942 की धारा 3-ए के तहत सभी विधायकों के वेतन और भत्तों की राशि का निर्धारण किया गया है। इस एक्ट में संशोधन कर धारा-3-एएए शामिल किए जाने के बाद पंजाब विधानसभा के सभी विधायकों के लिए अपनी अचल संपत्ति की हर साल घोषणा करते हुए उसमें हो रही बढ़ोतरी या कटौती से राज्य सरकार और आम लोगों को वाकिफ करना जरूरी हो जाएगा।