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'सुपरकॉप' गिल की जिंदगी का एक राज, देश में इस जगह से आखिरी सांस तक जुड़े रहे

Sun, 28 May 2017 09:19 AM IST
राजीव अग्रवाल/अमर उजाला, वृंदावन/पंजाब
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पूर्व डीजीपी 'सुपरकॉप' केपीएस गिल ने असम और पंजाब में जिंदगी बिताई, लेकिन देश में एक जगह और ऐसी थी जिससे वे आखिरी सांस तक जुड़े रहे।
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पंजाब में आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक केपीएस गिल ने वृंदावन में रहकर यह लड़ाई लड़ी और ये थी टीबी की बीमारी से। ब्रज क्षेत्र को क्षय रोग से बचाने के लिए प्रोजेक्ट बलराम शुरू करने वाले गिल का वृंदावन से आत्मीय नाता रहा है। वह ब्रजभूमि की सेवाकर अपनी अमिट छाप छोड़ गए हैं। 
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केपीएस गिल वर्ष 2000 में धर्म नगरी से जुड़े तो आखिरी सांस तक यहां के बने रहे। 17 साल पहले वृंदावन आए और इस्कान के एमवीटी गेस्ट हाउस में रहकर मानवता की सेवा शुरू की। 2012 में केशीघाट स्थित लक्ष्मीरानी कुंज को अपना आवास बनाया। वर्ष 2002 में वृंदावन में बलराम प्रोजेक्ट की शुरुआत की। इस योजना में एक चिकित्सा मोबाइल वैन ब्रज के गांव- गांव जाती।

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केपीएस गिल दो बार बनें पंजाब पुलिस के मुखिया - फोटो : Getty Images
लोगों को क्षयरोग से मुक्ति दिलाने के लिए नि:शुल्क दवाइयां बांटी जातीं। हजारों लोग इससे लाभांवित हुए। गोवंश व अन्य जीवजंतुओं की सेवा में भी पूर्व डीजीपी का योगदान रहा। कई साल से केपीएस गिल की सुरक्षा में तैनात रहे ब्रजानंद यादव ने बताया कि आध्यात्म, धर्म व भक्ति के प्रचार प्रसार के लिए केपीएस गिल ने इस्कान भक्तों के साथ कार्य किया। अमेरिकन चांडी माताजी से उनकी निकटता सदैव उनको धर्म नगरी में कार्य करने के लिए प्रेरित करती रही।
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किडनी की बीमारी के चलते हुआ निधन
पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल नहीं रहे। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह 82 वर्ष के थे। डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी किडनी पूरी तरह खराब हो चुकी थी और उन्हें दिल की बीमारी भी थी। शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। गिल को 18 मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका इलाज नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. डीएस राणा के नेतृत्व में चल रहा था।
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