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स्कूलों में बच्चों के भविष्य से 'गंदा' खिलवाड़, टीचर्स की काबिलियत का चौंकाने वाला सच

Sun, 28 May 2017 09:18 AM IST
मोनिल शर्मा/अमर उजाला, फतेहाबाद/रोहतक(हरियाणा)
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स्कूलों में बच्चों के ‌भविष्य से 'गंदा' खिलवाड़
देश के स्कूलों में बच्चों के ‌भविष्य से 'गंदा' खिलवाड़ किया जा रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण है, टीचर्स की काबिलियत का ये चौंकाने वाला सच।
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dm in school - फोटो : amarujala
हरियाणा बोर्ड के खराब रिजल्ट के बाद अधिकारियों के सरकारी स्कूलों का दौरा किया तो शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई। हालत यह है कि 10वीं के विद्यार्थी भी यह बता नहीं पाए कि पानीपत की लड़ाई कब और किसके बीच हुई। विद्यार्थियों को प्रदेश के इतिहास की बेसिक जानकारी ही नहीं है।  शुक्रवार को शिक्षा विभाग के एडिशनल डायरेक्टर वीरेंद्र दहिया ने गांधी कैंप के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का दौरा किया।
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rewari school
इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से सवाल-जवाब किए। दहिया अपने दौरे के दौरान 10वीं कक्षा में पहुंचे और छात्रों से अंग्रेजी-हिंदी व्याकरण और इतिहास के बारे में सामान्य सवाल पहुंचे। वीरेंद्र दहिया ने सबसे पहले छात्रों से अंग्रेजी व्याकरण के वर्तमान काल से संबंधित तीन सवाल पूछे। उन्होंने छात्रों को ‘वह जाता है और मुझे तैरना आता है’ को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करने के लिए कहा। बहुत कम विद्यार्थी इसका सही जवाब दे पाए।

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इसके बाद डायरेक्टर ने पानीपत की पहली लड़ाई के बारे में दो सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि पानीपत की पहली लड़ाई कब हुई थी और किस-किस के बीच में हुई थी? इन दोनों सवालों का जवाब छात्र नहीं दे पाए। एक छात्र ने तर्क दिया कि ये तो हमारे सिलेबस का प्रश्न ही नहीं है। इतने आसान सवाल का भी छात्र जवाब नहीं दे पाए तो डायरेक्टर थोड़े मायूस हुए। तब छात्रों से इतिहास की शिक्षिका के बारे में पूछा।
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डायरेक्टर ने हिंदी व्याकरण के सर्वनाम और संज्ञा के बारे में सवाल किया। इसका एक छात्र ने सही जवाब दिया। जय जवान-जय किसान का नारा किसने दिया था, एक करोड़ में कितने जीरो लगते हैं। ये वो प्रश्न हैं शुक्रवार को निरीक्षण में शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर हरचरण सिंह छोकर ने जिले के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करते हुए बच्चों और अध्यापकों से पूछे।
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हैरत की बात ये है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे और मास्साब दोनों ही इन सवालों का जवाब नहीं दे पाए। उनके अध्यापक तो इससे भी बढ़कर निकले, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के अध्यापक राजेश कुमार ने जय जवान-जय किसान का नारा देने वाले का नाम नेता जी सुभाष चंद्र बोस बताया।
पूरी कक्षा में से एक भी बच्चा जवाब देने के लिए खड़ा नहीं हुआ, तो किसी ने बुदबुदाकर कहा, बेरा कोनी।
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School dress
अध्यापकों की ये स्थिति देखकर एकबारगी तो खुद शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर हरचरण सिंह छोकर भी हैरान रह गए।  हालांकि मीडिया की मौजूदगी के चलते उन्होंने अध्यापकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सबके सामने तो कुछ नहीं कहा, लेकिन बाद में सबकी जमकर क्लास ली गई। स्कूलों में निरीक्षण के दौरान उन्होंने एक कक्षा के बच्चों से कई प्रश्न पूछे।

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इधर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्कूलों में खामियां दिखी, उधर जिला शिक्षा विभाग ने भी खराब रिजल्ट वाले स्कूलों के प्रति नजर टेढ़ी कर ली है। उपजिला शिक्षा अधिकारी दयानंद सिहाग ने साफ तौर पर कहा कि विभाग खराब रिजल्ट वाले स्कूलों की सूची तैयार कर रहा है। जिनका रिजल्ट खराब रहा है। उन्हें नोटिस भेजकर खराब कारण पूछा जाएगा। अगर कारण संतोषजनक नहीं रहा तो संबंधित स्कूल के मुखिया के खिलाफ कार्रवाई होगी।

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विभाग ने किया है नया प्रयोग
इस बार शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की कमियों को सुधारने के लिए नया प्रयोग किया है। शिक्षकों से प्रत्येक विद्यार्थी की स्किल पासबुक भरवाई जा रही है ताकि उनकी कमियों पर सुधार किया जा सके।
- वीरेंद्र दहिया, एडिशनल डायरेक्टर
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पहले तो बच्चों से इन सवालों के जवाब की उम्मीद थी। लेकिन अध्यापक की ओर से भी गलत जवाब आना वाकई चिंताजनक है। इस बारे में अन्य अधिकारियों से बात करूंगी, आजकल अध्यापकों की खुद पढ़ने की आदत छूट रही है, ये गलतियां इसी कारण से होती हैं। जल्द ही इस बारे में उचित कार्यवाही की जाएगी।
- संगीता बिश्नोई, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद
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