पंजाब के 'सुपरकॉप' और पूर्व डीजीपी केपीएस गिल के नाम से जहां अपराधी कांपते थे, वहां वे कई बार विवादों में भी रहे। जानिए उनके बारे में सब कुछ।
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केपीएस गिल दो बार बनें पंजाब पुलिस के मुखिया
- फोटो : Getty Images
किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे
पूर्व डीजीपी केपीएस गिला का शुक्रवार को निधन हो गया। वे 82 साल के थे और दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। वहीं पर उन्होंने आखिरी सांस ली। बताया जा रहा है कि केपीएस गिल लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वह किडनी से जुड़ी बीमारियों के कारण परेशान थे। किडनी फेल होने के कारण ही उनकी मौत हुई।
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पंजाब के पूर्व DGP केपीएस गिल नहीं रहे
24 साल की उम्र में ज्वॉइन की थी पुलिस
केपीएस गिल 24 साल की उम्र में पुलिस सेवा में आए। गिल ने भारतीय पुलिस सेवा में अपने कैरियर की शुरुआत पूर्वोत्तर के राज्य असम से की। वे यहां 28 साल रहे। शुरुआती दिनों में ही उन्होंने खुद को एक सख्त अधिकारी के रूप में स्थापित कर लिया। पंजाब पुलिस के प्रमुख के रूप में 1990 के दशक में वह पूरे देश में प्रसिद्ध हुए थे।
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पद्म भूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया था
80 के दशक में जब पूरा पंजाब आतंकवाद की आग में झुलस रहा था, तब उन्होंने खालिस्तानी आतंकवादियों से काफी सख्ती से निपटा था। उन्होंने राज्य में आतंकवाद की कमर तोड़ने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके लिए उन पर मानवाधिकार उल्लंघन के भी आरोप लगे हैं। गिल को उनकी सेवा के लिए 1989 में पद्म भूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया था। केपीएस गिल 1995 में पुलिस फोर्स से रिटायर हुए थे।
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आतंकवाद निरोधी मामलों के सलाहकार रहे
रिटायर होने के बाद गिल भारत सरकार के आतंकवाद निरोधी मामलों के सलाहकार भी रहे। उनको पंजाब सरकार में सुरक्षा सलाहकार बनाया गया था। गिल को छत्तीसगढ़ की रमन सरकार ने भी नक्सली समस्या के समाधान के लिए सुरक्षा सलाहकार बनाया था, लेकिन उन्हें ज्यादा काम करने का मौका नहीं मिला। गिल इंडियन हॉकी फेडरेशन (IHF) के प्रेसिडेंट भी थे। इस दौरान भारतीय हाकी टीम ने कई ऊंचाईयों को छुआ और मेडल जीते।
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पंजाब में ही नहीं छत्तीसगढ़ में भी दिखाया कमाल
गिल ने 2006 में सुरक्षा सलाहकार रहते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को बस्तर की तीन सड़कों का निर्माण करने का सुझाव दिया था। ये सड़के थीं- दोरनापाल-जगरगुंडा, सुकमा कोंटा और नारायणपुर-ओरछा, लेकिन वे बन नहीं पाई। केपीएस गिल ने अफगानिस्तान में युद्ध के माहौल में भी 218 किलोमीटर देलारम-जरंज हाईवे का निर्माण चार साल में कराया था।
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सख्त मिजाज के लिए जाने जाते थे गिल
केपीएस गिल दो बार डीजीपी बने। पहली बार उन्हें 1984 में पंजाब की पुलिस का जिम्मा दिया गया। साल 1988 से 1990 तक वो पंजाब पुलिस के डीजीपी रहे। इसके बाद 1991 से 1995(रिटायरमेंट तक) फिर से उन्हें डीजीपी बनाया गया। केपीएस गिल को उनके सख्त मिजाज के लिए भी जाना जाता था। वे कोई भी फैसला लेने में देर नहीं लगाते थे।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार की अगुवाई की थी
गिल ने ही ऑपरेशन ब्लू स्टार की अगुवाई की थी। ऑपरेशन ब्लू स्टार के चार साल बाद गोल्डन टेंपल से आतंकियों को बाहर निकालने के लिए ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ किया गया था, जिसका नेतृत्व केपीएस गिल ने किया था। इस ऑपरेशन के दौरान 43 खालिस्तानियों को मार गिराया गया था और 67 ने सरेंडर किया था, लेकिन गुरुद्वारे को ज्यादा नुकसान नहीं होने दिया गया।
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नरेंद्र मोदी के सुरक्षा सलाहकार बने थे
केपीएस गिल साल 2002 के गुजरात दंगों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षा सलाहकार बने थे। केपीएस गिल साल 2000 से 2004 तक आतंकवाद के मोर्चे पर श्रीलंकाई सरकार के भी सलाहकार रहे। उनकी सलाह के मुताबिक, लिट्टे से निपटने के लिए श्रीलंकाई सुरक्षा बलों ने योजनाएं बनाई। वे पंजाब पुलिस की तर्ज पर लिट्टे आतंकियों का सफाया करते थे।
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गिल पर कई जानलेवा हमले हुए
गिल फल्टलाइन्स पत्रिका प्रकाशित करते थे और इंस्टीट्यूट ऑफ कॉन्फलिक्ट मैनेजमेंट नामक संस्था चलाते थे। उन्होंने 'द नाइट्स ऑफ फाल्सहुड' नामक एक किताब भी लिखी। केपीएस गिल पर कई जानलेवा हमले हुए हैं। साल 1999 में दिल्ली में रिछपाल सिंह नाम का आतंकी उन्हें मारने के लिए अफगानी पासपोर्ट पर पाकिस्तान के रास्ते दिल्ली पहुंचा था, जिसे दबोच लिया गया था।
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गिल को देखने को दो नजरिए रहे
केपीएस गिल को देखने को दो नजरिए रहे। जहां कुछ लोग उन्हें हीरो के तौर देखते हैं, वहीं कुछ लोग उन पर मानवाधिकार के हनन का दोषी करार देते हैं। साल 1996 में केपीएस गिल रेप के भी दोषी करार दिए गए। 1988 में एक पार्टी के दौरान उन पर रेप साबित हुआ। केपीएस गिल इंडियन हॉकी फेडरेशन के भी अध्यक्ष रहे और इस दौरान उनपर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगे।
आईएएस महिला से की थी छेड़छाड़ की थी
पंजाब की एक वरिष्ठ महिला अधिकारी ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। मामले में 17 साल बाद गिल को दोषी ठहराया गया। अदालत ने इस मामले में गिल पर भारी जुर्माना लगाया और जेल की सजा भी सुनाई। बाद में जेल की सजा माफ कर दी गई, लेकिन तमाम विवादों के बावज़ूद एक सफल पुलिस अधिकारी की उनकी छवि बेदाग रही है।