हम आपको बताने जा रहे हैं देश की पहली महिला लेफ्टिनेंट के बारे में, जो जहाज उड़ाती थी और उस पर सबको नाज था, लेकिन एक अनहोनी ने...
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हरिता देओल
उनकी जान ले ली और अधूरे रह गए उनके सारे सपने। ‘मुझे अपनी बेटी पर नाज है। मेरी एक और बेटी होती तो उसे भी पायलट ही बनाती। आज भी उसे याद कर आंखें भर आती हैं।’ यह बातें कहते हुए कमलजीत का गला रुंध जाता है। सेक्टर-32 डी की रहने वाली कमलजीत देश की पहली लेफ्टिनेंट महिला पायलट हरिता कौर देओल की मां हैं।
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हरिता देओल
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के हाथों अपनी बेटी को मरणोपरांत प्राइड आफ एमसीएम अवार्ड मिला तो वह फख्र महसूस कर रही थीं। देश की पहली लेफ्टिनेंट महिला पायलट का जन्म चंडीगढ़ में हुआ। उनका परिवार वर्तमान में सेक्टर-32 डी में रहता है। एमसीएम डीएवी कालेज फार वुमन सेक्टर-36 के गोल्डन जुबली समारोह में कमलजीत देओल को खास मेहमान बनाया गया था।
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हरिता देओल
अवार्ड मिलने के बाद अमर उजाला से रूबरू कमलजीत कौर बेटी के बारे में बात करती हुईं अतीत में खो जाती हैं। वह बताती हैं कि वक्त कैसे पंख लगाकर उड़ जाता है, पता ही नहीं चलता। ऐसा लगता है कि अभी मेरी बेटी मुझे आवाज देगी। पुकारेगी कहेगी मां खाना खाया या नहीं। आप कितनी दुबली हो गई हो। बिलकुल अपना ध्यान नहीं रखतीं। वह हर वक्त मेरी चिंता करती थी। ईश्वर ने पता नहीं क्यों इतनी जल्दी उसे मुझसे छीन लिया।
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हरिता देओल
कमलजीत बताती हैं कि उस मनहूस तारीख को मैं कभी नहीं भूल सकती, जिसने मुझे नासूर दिया। हरिता देओल भारतीय वायु सेना में कार्यरत थीं। वह भारतीय वायु सेना में अकेले उड़ान भरने वाली देश की पहली महिला पायलट थीं। वह शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के अधिकारियों के रूप में वायु सेना में शामिल होने वाली पहली सात महिला कैडेटों में से एक थी। 25 दिसंबर, 1996 को आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के बुक्कापुरम गांव के पास निकट विमान दुर्घटना में उसका निधन हो गया था।
बेटी होती तो उसको यह अवार्ड पाकर बहुत खुश होती
कमलजीत ने बताया कि कॉलेज से मिले इस अवार्ड को पाकर उनकी बेटी बेहद खुश होती, क्योंकि यह कॉलेज हमेशा उसके करीब था। मुझे यह अवार्ड लेकर अच्छा लगा, शायद बेटी को भी बहुत अच्छा लगता। कमलजीत ने बताया कि उनकी बेटी हर पल को जिंदादिली से जीती थी। जब भी वह कुछ भी काम करने की सोचती थी, उसे पूरा जरूर करती थी। उन्होंने कहा कि देश में अब हर बेटी को ऐसा होना चाहिए, ताकि वे अपने सपनों को पूरा कर सके।