राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नीरजा भनोट और फोगाट बहनों के लिए कुछ ऐसा कहा, जिसका लड़कियों ने जवाब दिया। देखिए तस्वीरें...
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
राष्ट्रपति कोविंद ने जैसे ही उदाहरण देना शुरू किया, लड़कियों ने तालियां बजाकर उनका हौंसला बढ़ाया और प्रतिक्रिया व्यक्त की। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को चंडीगढ़ स्थित एमएसीएम डीएवी कॉलेज फॉर वुमन के गोल्डन जुबली कार्यक्रम में पहुंचे।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
कार्यक्रम में रामनाथ कोविंद ने कहा कि नीरजा भनोट, फोगाट बहनों, कल्पना चावला और मैरीकॉम जैसी उड़ान भरो। उनकी तरह सपने देखो और उन्हें पूरा करने का हौंसला दिखाओ। फिर देखो, दुनिया तुम्हारे कदमों में होगी। सारा जहां झुककर सलाम करेगा। राष्ट्रपति के मुंह से यह बात सुनकर ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सभी लड़कियों ने खड़े होकर महामहिम का अभिवादन किया।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
महामहिम ने कहा कि बेटियों को आजादी मिलेगी तभी वह पंख फैलाकर उड़ेंगी। देश ही नहीं पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन करेंगी। यह आजादी सामाजिक और पारिवारिक दोनों पहलुओं पर जरूरी है। जब-जब परिवार ने बेटियों को वैचारिक और सामाजिक स्वतंत्रता दी, उन्होंने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। फोगाट बहनें इसकी मिसाल हैं, जिन्हें उनके पिता ने रुढ़िवादी समाज में रहते हुए भी बेटों की तरह पाला।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
राष्ट्रपति ने कहा कि चंडीगढ़ से कई बड़े नाम उभरकर आए हैं, लेकिन अगर मुझे किसी एक का नाम लेना हो तो मैं नीरजा भनोट का नाम लूंगा। 1986 में नीरजा ने अपनी जान देकर 359 हवाई यात्रियों की जान बचाई थी। इसके लिए चंडीगढ़ ही नहीं, पूरा देश उन्हें नमन करता है। बेटियां समाज की सोच बदल रही हैं। पिछले सप्ताह ही फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी ने अकेले फाइटर प्लेन उड़ाकर नारी शक्ति का नया उदाहरण पेश किया है।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
महामहिम ने कहा कि पीवी सिंधू, सानिया मिर्जा, अरुणा रेड्डी समेत कई ऐसे नाम हैं, जिन्हें अगर उनके परिवार ने आजादी न दी होती तो हमारे देश को बड़ी कामयाबी नहीं मिलती। परिवार की जिम्मेदारी के साथ भी कैसे विजेता बना जाता है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण मैरीकॉम हैं। मैरीकॉम ने परिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद खेलना और जीतना नहीं छोड़ा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चंडीगढ़ शहर की भी जमकर तारीफ की।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार यहां आना काफी सुखद रहा। राष्ट्रपति रॉक गार्डन की तारीफ करना नहीं भूले। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ का रॉक गार्डन रिसाइक्लिंग की एक बड़ी मिसाल है। यहां जाकर यह देखने वाला है कि कैसे बेकार सामान और कबाड़ को ऐसा रूप दिया गया कि वह मिसाल बन गया। चंडीगढ़ के बारे में राष्ट्रपति ने कहा कि यह हरित, स्वच्छ और स्वस्थ भारत की एक मिसाल है। इसके लिए शहरवासियों का भरपूर योगदान है।