पंजाबी संगीत बुलंदियां देने वाले प्रख्यात गायक, जोकि राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुके हैं, आज खुद के इलाज के लिए मोहताज है। देखिए, इन कलाकार को। -रिपोर्ट: दीपक शाही
विज्ञापन
राष्ट्रपति अवार्ड विजेता गायक, आज इलाज के लिए मोहताज
2 of 6
ये गायक हैं शरीफ ईदू, जोकि आज मनीमाजरा में तंगहाली के दौर से गुजर रहे हैं। 70 की उम्र में बीमारी से जूझ रहे ईदू के पास आज इलाज तक को पैसे नहीं हैं। सरकार से इलाज के लिए कई बार गुहार भी लगाई, मगर हर बार निराशा ही हाथ लगी। अपनी गायकी के बदले में उन्हें बड़े पैमाने पर सम्मान और पुरस्कार तो मिले, लेकिन जीवन के आखिरी पड़ाव पर उन्हें उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
राष्ट्रपति अवार्ड विजेता गायक, आज इलाज के लिए मोहताज
3 of 6
लकवे के कारण तीन साल से ईदु ऑन बेड हैं। उठकर चलना तो दूर वह ठीक से बोल भी नहीं पाते। बेड पर पड़े अपने हाल पर बेबस ढाडी गायक की आंखें तब भर आती हैं, जब वह अपने कमरे की अलमारी में पड़े स्मृति चिह्नों और मेडलों को देखते हैं। उन्हें इस बात का मलाल है कि लोक गायकी के क्षेत्र में उनके योगदान को सरकारी अमले ने भुला दिया। यही वजह है कि उन्हें न नौकरी मिली और न ही उनके बेटों की किसी तरह की आर्थिक मदद।
राष्ट्रपति अवार्ड विजेता गायक, आज इलाज के लिए मोहताज
4 of 6
लोक गायकी के अलावा शरीफ ईदू सारंगी वादन में दक्ष रहे हैं। सारंगी वादन के लिए भी उन्हें कई बार सम्मान मिला था। शरीफ ईदू जैसे गायकों की मानें तो पंजाबी लोक संगीत आज हाशिये पर है। बदलते दौर के साथ वे यह सोचकर चिंतित हैं कि ढाडी जैसी लोक संगीत की विद्या को संरक्षण के तहत सरकारी स्तर से बढ़ावा नहीं दिया गया तो इसकी पहचान खत्म हो जाएगी।
विज्ञापन
राष्ट्रपति अवार्ड विजेता गायक, आज इलाज के लिए मोहताज
5 of 6
11 साल की उम्र से ढाडी और सारंगी वादन को अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले शरीफ ईदू नौकरी के लिए वर्षों पहले राजीव गांधी से भी मिले थे। उन्होंने आश्वासन भी दिया था, लेकिन नौकरी नहीं मिली।
राष्ट्रपति अवार्ड विजेता गायक, आज इलाज के लिए मोहताज
6 of 6
जब बीकेएन छिब्बर गवर्नर थे, उन्होंने ईदु की कला को देखते हुए मनीमाजरा के गवर्नमेंट स्कूल में बतौर संगीत शिक्षक रखवाया था। उनके हटने के बाद शरीफ ईदू को स्कूल से निकाल दिया गया। अभी वह मात्र 15 दिन ही स्कूल में बच्चों को ढाडी और सारंगी की ट्रेनिंग दे पाए थे। उसके बाद वह चंडीगढ़ के एडवाइजर से लेकर पंजाब के सभी मंत्रियों से मिले, लेकिन उनकी किसी ने एक न सुनी और उनकी कला गुमनामी के अंधेरे में खोती गई।