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किसानों का दिल्ली कूच: शंभू पर जंग की तरह चल रही तैयारी, हाइड्रा-पोपलेन मशीनें पहुंचीं.. देखें तस्वीरें

Tue, 20 Feb 2024 03:28 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

शंभू सीमा पर दिल्ली कूच के लिए तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। मिट्टी से भरे कट्टे ट्रैक्टरों में लोड करवाए जा रहे हैं।
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किसानों ने शुरू की दिल्ली कूच की तैयारी - फोटो : संवाद
किसान आंदोलन को सात दिन हो चुके हैं। केंद्र सरकार की ओर से मसूर, उड़द, अरहर (तूर), मक्की और कपास की फसल पर अनुबंध की शर्त पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी का प्रस्ताव किसानों ने नामंजूर कर दिया है। अब किसानों ने दिल्ली कूच की तैयारी शुरू कर दी है।

13 फरवरी से शंभू बॉर्डर पर ट्रैक्टर-ट्रालियों में डेरा जमाए किसान बैठे हैं। हर बीतते दिन के साथ बार्डर पर किसानों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है। बॉर्डर से पहले करीब चार किलोमीटर तक ट्रैक्टर-ट्रालियों का लंबा काफिला जुटा है, जिनमें अस्थायी ठहराव बनाकर किसान बैठे हैं। 
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किसान आंदोलन - फोटो : संवाद
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि केंद्र सरकार करार नहीं, एमएसपी की पूरी कानूनी गारंटी दे। इससे कम हमें कुछ भी मंजूर नहीं है। वहीं, किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि सरकार के साथ वार्ता जारी रखेंगे लेकिन 21 फरवरी की सुबह 11 बजे दिल्ली कूच किया जाएगा।
 
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किसान आंदोलन - फोटो : संवाद
वहीं रविवार को केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई बैठक के बाद से किसानों में बैचेनी है। किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार समय निकालने के लिए उलझा रही है। जब मांग 23 फसलों पर एमएसपी देने की है, तो फिर दालों, कपास व मक्की पर एमएसपी पांच वर्षों के लिए ठेके पर देने का प्रस्ताव कैसे मान सकते हैं। किसानों ने कहा कि बस अब उन्हें अपने नेताओं के इशारे का इंतजार है। 

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किसान आंदोलन - फोटो : संवाद
शंभू सीमा पर दिल्ली कूच के लिए तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। मिट्टी से भरे कट्टे ट्रैक्टरों में लोड करवाए जा रहे हैं। हाइड्रा, पोपलेन जैसी मशीनें भी लाई जा रही हैं। वाटर कैनन बॉय नवदीप जलबेड़ा को ये जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि किसानों ने अभी ये स्पष्ट नहीं किया है कि वे घग्गर में से जाएंगे या घग्गर पुल पर बोरियां डालेंगे।
 
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किसान आंदोलन - फोटो : संवाद
गुरदासपुर से पहुंचे किसान सतविंदर सिंह ने कहा कि बैठकें करके केंद्र सरकार बस समय निकाल रही है, लेकिन किसान अटल है और हकों की प्राप्ति करके ही पीछे हटेगा। किसान नेताओं की बैठक केंद्र की ओर से दिए ऑफर पर विचार करने के लिए चल रही हैं। लीडरों के कह देने का इंतजार है।
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