गर्मियों के बीच महंगी बिजली का जोरदार झटका लगा है, प्रति यूनिट दो रुपए तक दाम बढ़ गए हैं
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massive power shortage
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से जनता को 5 रुपये यूनिट बिजली देने का एलान अभी मूर्तरूप भी नहीं ले पाया कि उधर, पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) ने सूबे के उद्योगों को जोर का झटका दे दिया है। पावरकॉम ने एक जून से उद्योगों को शाम छह से रात 10 बजे तक दी जा रही बिजली की मौजूदा दर में 2 रुपये प्रति यूनिट का इजाफा कर दिया है।
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कैप्टन अमरिंदर सिंह के सस्ती बिजली मुहैया कराने के एलान के बाद उद्योगपतियों ने भी सस्ती बिजली की मांग उठाई हुई थी, लेकिन फैसला उसके विपरीत आया है। खास बात यह है कि पीएसपीसीएल की ओर से राज्य में पूर्व सरकार के दौरान उद्योगों को जो छूट दी जा रही थी, उसे समाप्त कर दिया है। इस फैसले के बाद से सूबे में उद्योगपति अब शाम छह बजे के बाद अपनी फैक्टरियां बंद करने लगे हैं। शाम होते ही इंडस्ट्रियल एरिया में सन्नाटा पसरने लगा है। सीआईसीयू के अध्यक्ष अवतार सिंह का कहना है कि बिजली के दाम बढ़ाने का फैसला पिछली सरकार के दौरान लिया गया था, लेकिन तब सीआईसीयू की मांग पर तत्कालीन सरकार ने यह फैसला स्थगित कर दिया था।
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2014 से लागू किया फैसला
पीएसपीसीएल ने उस स्थगित फैसले को एक जून, 2017 से ही नहीं, बल्कि एक अप्रैल, 2014 से लागू कर दिया है, जब यह फैसला स्थगित किया गया था। अवतार सिंह ने बताया कि पीएसपीसीएल ने पुराना सर्कुलर ही फिर से जारी कर दिया है, जिसका सीधा अर्थ है कि उद्योगों को बढ़े हुए 2 रुपये प्रति यूनिट का भुगतान भी एक अप्रैल, 2014 से करना होगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद तो फैक्टरी मालिक अगर अपने उद्योग बेच भी दें, तब भी बिजली के बकाया बिल का पूरा भुगतान नहीं कर सकेंगे।
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सबसे ज्यादा नुकसान लुधियाना के उद्योगपतियों को
सीआईसीयू के अध्यक्ष अवतार सिंह ने कहा कि उद्योगों को महंगी बिजली का सबसे ज्यादा नुकसान लुधियाना में इंडक्शन व फोर्जिंग इंडस्ट्री को होगा। ये उद्योग लंबे समय तक डीजल के सहारे चलते रहे थे, लेकिन पिछली सरकार के समय इन्हें सस्ती बिजली मुहैया करवाकर उनमें डीजल का इस्तेमाल रोका गया था। अवतार सिंह ने कहा कि बिजली के दाम बढ़ने से यह उद्योग फिर से डीजल पर लौटने को मजबूर हो जाएंगे।
पीक आवर में उद्योग चलाने पर पेनॉल्टी
सीआईसीयू का कहना है कि सूबे में जब चार हजार मेगावाट तक बिजली की कमी थी, तब बिजली विभाग ने उद्योगों के लिए शाम के समय तीन घंटे का पीक ऑवर लागू किया था। उस पीक ऑवर में उद्योग चलाने पर फैक्टरी मालिक पर पेनाल्टी लगाने का प्रावधान किया गया था, लेकिन अब जबकि सूबे में बिजली सरप्लस है, ऐसी स्थिति में उद्योगों के लिए बिजली के दाम बढ़ाना वाजिब नहीं है। उधर, पीएसपीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि बिजली टैरिफ संबंधी व्यवस्था पंजाब स्टेट पावर रेगुलेटरी कमीशन के आदेश पर ही लागू की जाती है। पीएसपीसीएल सीधे तौर बिजली के दाम नहीं बढ़ा सकता। इस बीच, पीएसपीआरसी के अधिकारियों ने इस विषय पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।