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पुलिस की निर्दयता देखिए, लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

Mon, 07 Sep 2015 08:11 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़
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शांति से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे लोग। पुलिस ने रास्ते में रोक लिया और दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। देखिए पुलिसिया कहर की तस्वीरें।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनका चुनाव से पहले का वायदा याद दिलाने के लिए शांति मार्च कर रहे सरकारी कर्मचारियों पर अफसरों ने जनरल डायर की बदनाम शैली में हमला करवाया। करीब एक हजार निहत्थे कर्मचारियों पर पुलिस कर्मियों का दल पीठ पीछे से लाठियां लेकर टूट पड़ा। इस दल का नेतृत्व कर रहे सेक्टर-11 के थाना प्रभारी नरेंद्र पटियाल खुद भी महिलाओं और बुजुर्ग कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ लाठियां बरसा रहे थे। इस हरकत ने अंग्रेजों के जमाने की पुलिस की याद ताजा कर दी।

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अफसरों के आदेश पर पुलिस ने यह कहर रविवार दोपहर करीब दो बजे सेक्टर-25 के रैली ग्राउंड के बाहर बरपाया। पुलिस के हमले में महिलाओं और उम्र दराज लोगों को ज्यादा चोट आई क्योंकि वे भाग भी नहीं सके। इस हमले में कुल 12 लोग घायल हुए, जिनमें एक फोटोग्राफर भी शामिल है। एक महिला की तो पैर की हड्डी में फ्रेक्चर है। घायलों को सेक्टर-16 के अस्पताल में ले जाया गया।

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प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की ओर से ड्यूटी मजिस्ट्रेट एसके जैन को तैनात किया गया था। हाउसिंग इंप्लाइज सोसाइटी के बैनर तले सरकारी कर्मचारी रविवार सुबह पहले से तय स्थान सेक्टर-25 के रैली ग्राउंड में पहुंच गए। रैली में कर्मचारियों ने प्रशासन को एक घंटे का समय दिया कि कोई अधिकारी यहां पर आकर उनकी मांग सुने लेकिन जब कोई अधिकारी नहीं आया तो कर्मचारियों ने गवर्नर हाउस जाकर ज्ञापन देने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने दोपहर डेढ़ बजे शांतिपूर्वक पैदल मार्च शुरू किया।
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प्रदर्शनकारी रैली ग्राउंड से बाहर निकले। पुलिस ने नवोदय स्कूल के सामने पंजाब विश्वविद्यालय को जाने वाली सड़क पर बेरिकेड्स और वाटर केनन तैनात कर दिए। प्रदर्शनकारी सेक्टर-25 की तरफ मुड़ कर शांति पूर्वक आगे बढ़ने लगे। इसी दौरान पुलिस का एक बड़ा दल पीछे से आया और बिना कोई चेतावनी दिए लाठियां लेकर कर्मचारियों पर टूट पड़ा। पुलिस का अप्रत्याशित हमला देख ज्यादातर कर्मचारी भाग खड़े हुए। मगर जो महिलाएं और उम्र दराज लोग नहीं भाग सके उन पर पुलिस वालों का कहर टूट पड़ा।

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पुलिस की यह अमानवीय हरकत देख सेक्टर-25 के लोगों ने पुलिस वालों पर पथराव कर महिलाओं और बुजुर्गों को बचाया। पुलिस वालों ने न सिर्फ कर्मचारियों को पीटा बल्कि गाली गलौच भी की। लाठीचार्ज की सूचना मिलने पर एसडीएम सेंट्रल प्रिंस धवन और एसपी परमिंदर सिंह मौके पर पहुंचे। इस पर कर्मचारियों ने नरेंद्र पटियाल को सस्पेंड करने की मांग की और नारेबाजी शुरू कर दी। एसपी ने कर्मचारियों से कहा कि वे पुलिस के खिलाफ लिखित शिकायत दें तो जांच करवाई जाएगी।
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हाउसिंग इंप्लाइज सोसाइटी के उपध्याक्ष नरेश कोहली ने बताया कि पुलिस की इस बर्बरता ने जलियांवाला बाग की घटना की याद ताजा करवा दी। थाना प्रभारी नरेंद्र पटियाल के खिलाफ एसपी और एसडीएम को लिखित शिकायत दे दी है। नरेंद्र मोदी की रैली से पहले प्रशासन कर्मचारियों को मना लेना चाहता है। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने घोषणापत्र में कर्मचारियों को मकान दिलाने का वायदा किया था।

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कर्मचारियों ने घोषणा की है कि वह यह वायदा याद दिलाने के लिए मोदी की रैली में काले बिल्ले लगाकर प्रदर्शन करेंगे। बर्बर लाठीचार्ज के बाद मामला और बिगड़ते देख प्रशासन ने झुकते हुए सोमवार दोपहर 12:30 बजे सोसाइटी के पदाधिकारियों की बैठक बुला ली है। गृहसचिव उनके साथा बैठक करेंगे।
घायलों के नाम: निर्मल सिंह, शिव चरण, भूपेंद्र सिंह, कमल, कुलविंदर सिंह, श्रवण सिंह, सिमरो देवी, प्रवीण कुमार का भी नाम शामिल है। ज्वाइंटर एक्शन कमेटी के अध्यक्ष भाग सिंह कैरो का आरोप है कि थाना प्रभारी ने महिलाओं को अपशब्द भी कहे।
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