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तस्वीरें: इस शख्स की पीएम मोदी ने की तारीफ, वैन में बनाई लाइब्रेरी, गरीब बच्चों तक पहुंचाते हैं किताब

Sun, 25 Oct 2020 01:35 PM IST
ajay kumar सुशील कुमार अमर उजाला, चंडीगढ़
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मन की बात में चंडीगढ़ के संदीप का जिक्र।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में चंडीगढ़ के संदीप कुमार का नाम यूं ही नहीं लिया। उनकी तपस्या व त्याग से पीएम खुद भी प्रभावित हैं। संदीप की मेहनत का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि आपके पेन की रिफिल खत्म हो जाती है और आप उसे फेंक देते हैं, उसी खाली पेन में रिफिल डालकर संदीप गरीब विद्यार्थियों तक पहुंचाते हैं। 
 
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संदीप ने तैयार की लाइब्रेरी।
आपके एक फोन पर वह किताबें व स्टेशनरी का सामान मुफ्त में घर तक पहुंचाते हैं। यह काम आसान नहीं है लेकिन जोश व जज्बा संदीप में कूट-कूटकर भरा हुआ है। लगभग तीन साल से संदीप कुमार 20 हजार विद्यार्थियों का भविष्य गढ़ रहे हैं। उनके इस कार्य से प्रभावित होकर 200 स्वयंसेवक उनसे जुड़े हैं जो उनकी मदद कर रहे हैं। यह स्वयंसेवक अधिकारी, शिक्षक, वकील आदि पेशों से जुड़े हैं।
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ऐसे शुरू हुआ सफर
 संदीप कुमार मूलतः हरियाणा के भिवानी के रहने वाले हैं। वहीं से इंटर तक की पढ़ाई की। उसके बाद जेबीटी का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के दौरान हरियाणा के कई सरकारी स्कूलों में पहुंचे तो उनका मन दुखी होने लगा। क्योंकि सरकार की योजनाएं उन गरीब बच्चों तक नहीं पहुंच रही थी। किसी के पास किताबें नहीं थी तो किसी के पास पेंसिल व पेन। 

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संदीप
वहीं से संदीप का मन बदलना शुरू हो गया। शाम को घर पहुंचते थे तो वह परेशान होते थे। उसी के साथ ठान लिया कि अब वह समाजसेवा की ओर कदम बढ़ाएंगे। उन्होंने जेबीटी का प्रशिक्षण पूरा किया और जनवरी 2017 से गरीब बच्चों की मदद के लिए जुट गए। सेक्टर- 39 में अपने भाई के साथ वह रहते हैं। धीरे-धीरे लोगों से किताबें मुफ्त में लेना शुरू किया और कुछ स्कूलों में जाकर कैंप लगाना शुरू कर दिया। उनके कार्य से प्रभावित होकर लोग जुड़ते चले गए। उन्होंने ट्राईसिटी ( चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली) के अधिकांश कॉलेजों व स्कूलों में कैंप लगाए।
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संदीप
वैन को लाइब्रेरी के रूप में प्रयोग किया और हर स्कूल तक गए। अब तक वह 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों को किताबें, स्टेशनरी आदि पहुंचा चुके हैं। यह विद्यार्थी कक्षा एक से लेकर परस्नातक तक के हैं। डॉक्टरी की पढ़ाई में जुटे लुधियाना के कुछ विद्यार्थियों को भी किताबें पहुंचाई। क्योंकि यह किताबें बाजार से महंगी मिल रही थी जो उन्हें मुफ्त में पहुंचाई गई।
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- फोटो : फाइल फोटो
फोन कीजिए, किबातें घर पर मिलेंगी
संदीप ने सोशल मीडिया आदि के जरिये अपना नंबर सार्वजनिक किया। संदेश दिया कि कोई भी किताब उनके पास है, जो दान करना चाहते हैं, वह उन्हें बताएं वह लेने आएंगे ताकि वह गरीब विद्यार्थियों तक पहुंचा सके। घरों से किताबें लेने के बाद किसी की मांग पर वह विद्यार्थियों को घरों पर जाकर किताबें मुहैया भी करवाते हैं। यही नहीं आपके घर में पेन की रिफिल खत्म हो गई है तो उस पेन में वह रिफिल डालकर जरूरतमंदों तक पहुंचाते हैं। पेंसिल भी इसी तरह एकत्रित करते हैं। यदि आपकी कॉपी के आधे पेज खाली हैं तो उसी कॉपी को नया करके विद्यार्थियों तक पहुंचा रहे हैं।
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- फोटो : फाइल फोटो
खुड्डा लहौरा में बनाया कार्यालय व पुस्तकालय
संदीप पूरा समय इसी समाजसेवा में लगे हैं लेकिन वह कंसलटेंसी व ई-कॉमर्स का भी कार्य करते हैं। उसके जरिये कुछ पूंजी जुटाते हैं। उसका 60 फीसदी भाग गरीब बच्चों की इसी सेवा में लगाते हैं। उन्होंने खुड्डा लहौरा में एक कार्यालय व पुस्तकालय बनाया। उसका किराया 13 हजार रुपये है। यह रकम चुकाना आसान नहीं है लेकिन संदीप हिम्मत नहीं हार रहे। कहते हैं आखिरी दम तक इस कार्य को जारी रखेंगे। उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन से कहा है कि लाइब्रेरी के लिए उन्हें यदि जगह मुहैया करवा दी जाए तो लाभार्थियों का आंकड़ा लाखों में पहुंच सकता है।

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- फोटो : फाइल फोटो
महिलाओं को मुफ्त में उपलब्ध करा रहे सैनेटरी पैड
संदीप कुमार का सफर विद्यार्थियों को शिक्षित करने तक का ही नहीं है, वह उन महिलाओं के भी स्वास्थ्य की चिंता करते हैं जो गरीब हैं और महावारी के समय सैनेटरी पैड नहीं खरीद पाती। उन्हें तमाम बीमारियों से न गुजरना पड़े, इसलिए उन्हें सैनेटरी पैड भी मुहैया करवा रहे हैं। धनास की कच्ची कालोनी, पुलिस कालोनी, नयागांव की माली कालोनी, मोहाली की दसपुर, मुल्लापुर आदि कालोनियों की महिलाओं को यह सुविधा मुहैया करा रहे हैं। यह सैनेटरी पैड वह मुफ्त में दे रहे हैं। हजारों महिलाओं को यह लाभ मिला है। स्ट्रीट वेंडर महिलाओं को भी वह सैनेटरी नैपकिन देते हैं।
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- फोटो : फाइल फोटो
दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए रिकॉर्ड कर रहे हैं किताबें
लॉकडाउन में सबकुछ बंद था लेकिन संदीप ने इस समय का सदुपयोग किया और दिव्यांग विद्यार्थियों की पीड़ा को जानते हुए किताबें रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया। अब तक 40 किताबें रिकॉर्ड की हैं। यह स्नातक की हैं। नेत्रहीन विद्यार्थियों को यह ऑडियो मुहैया करवा रहे हैं। इस कार्य को वह आगे भी जारी रखेंगे।
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