प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी को मुलाकात के दौरान एक बेहद खास तोहफा भेंट किया, जो देखने में बहुत खूबसूरत है।
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मोदी ने ट्रंप और उनकी पत्नी को दिया ये खास तोहफा
ये था, पंजाब को होशियारपुर में बना शानदार नक्काशी वाला श्रृंगार बॉक्स। होशियारपुर की पहचान बन चुके इनले वर्क से सजा यह श्रृंगार बॉक्स होशियारपुर फगवाड़ा रोड पर रहने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता दस्तकार पिता-पुत्र रूपन मठारू और कमलजीत मठारू ने तैयार किया है। 7 माह की कड़ी मेहनत के बाद यह सुंदर बारीक नक्काशीदार श्रृंगार बॉक्स तैयार किया गया।
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इस बॉक्स को पिछले साल मार्च महीने में सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज एंपोरियम नई दिल्ली भेजा गया था, जोकि सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा संचालित है। अमर उजाला से बात करते हुए दस्तकारी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता रूपन मठारू और कमलजीत मठारू ने बताया कि उन्हें काफी समय से इस बॉक्स के बिकने का इंतजार था।
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लेकिन यह नहीं पता था कि यह बॉक्स अमेरिका के व्हाइट हाउस की शोभा बढ़ाएगा और और खुद प्रधानमंत्री मोदी उसे अमेरिकी राष्ट्रपति को भेंट देंगे। इस बाक्स की कीमत 155000 रुपये लगाई गई है। शीशम की लकड़ी से बने इस श्रृंगार बॉक्स में अत्यंत सूक्ष्म इन ले वर्क की नक्काशी की गई है। यह करीब 2 फुट चौड़ा, सवा फुट लंबा और लगभग कितनी ही ऊंचाई वाला है।
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कमलजीत के पिता रूपन मठारू ने बताया कि उनकी छह पीढ़ियां इस दस्तकारी क्या काम करती आ रही है। उनके दादा और पिता ने इस काम को नहीं अपनाया था और वह दोनों ही चंडीगढ़ क्षेत्र सरकारी आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज में इंस्ट्रक्टर हुआ करते थे। उन्होंने बताया कि 1980 में अपने पिता की असमय मृत्यु के बाद में अपने दादा के साथ अपने पैतृक गांव बूथगढ़ लौट आए।
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आर्थिक तंगी के चलते उन्हें दसवीं के बाद अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी और वह इस दस्तकारी की अपनी पैतृक व्यवसाय परंपरा से जुड़ गए। उन्होंने बताया कि दशकों पहले इनले के इस दस्तकारी कार्य में हाथी दांत का इस्तेमाल होता था लेकिन उस पर प्रतिबंध लगने के बाद हाथी दांत की जगह प्लास्टिक इनले का बारीक नक्काशी का काम किया जा रहा है।
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रूपन मठारू ने बताया कि दोबारा काम शुरू करने में काफी दिक्कत है आई और एक बार तो वह हौसला हार ही बैठे थे, लेकिन उन्हें नया जोश तब मिला, जब उन्हें 1989 में दस्तकारी के लिए राज्य पुरस्कार से नवाजा गया। इसके बाद 1994 में उन्हें केंद्र सरकार की ओर से दस्तकारी के लिए राष्ट्रीय मेरिट पुरस्कार प्रदान किया गया तथा 1997 में दस्तकारी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
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modi and trump
रूपन मठारू ने बताया कि देश की सरकार से मिले इस पुरस्कार के बाद उनका हौंसला बढ़ा, फिर वे पूर्ण समर्पण भाव से दस्तकारी से जुड़ गए। 18 वर्ष का होते ही उनका बेटा कमलजीत भी दस्तकारी में उनका हाथ बटाने लगा। यह कमलजीत की मेहनत ही है कि उसे भी 2009 में दस्तकारी के लिए राष्ट्रीय मेरिट पुरस्कार और उसी साल राष्ट्रीय दस्तकारी पुरस्कार मिला।
रूपन मठारू ने बताया कि वह अमेरिका, चिली और ब्राजील में भारतीय दस्तकारी प्रदर्शनियों में भाग ले चुके हैं, जबकि कमलजीत ने 2013 और 2015 में यूनाइटेड किंगडम और ब्राजील में ऐसे ही प्रदर्शनियों में भाग लिया है। उन्होंने बताया कि वह छोटे पेन स्टैंड से लेकर बड़े बॉक्स और टेबल जैसे इनले वर्क वाले दस्तकारी के 70 सामान बनाते हैं जिनकी कीमत 50 से लेकर करीब 400000 रुपए तक है।