नोटबंदी को 32 दिन हो गए है, जिन्होने काला धन रखा था वो तो रो ही रहें है लेकिन इनसे मिलिए इन्होने कोई क्राइम नहीं किया फिर भी हालत खराब है।
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786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
दरअसल ये वो लोग है, जिन्होने 1000-500 के फैन्सी नंबरों के नोट को जमा किया था। सेक्टर-50 के नरिंदर पाल सिंह 1989 से 786 नंबर के नोट जमा कर रहे हैं। उनके पास इन नोटों की ढेरों कलेक्शन हैं।
786 नंबर वाले करीब साढ़े 14 लाख रुपए के नोट वे जमा कर चुके हैं। लेकिन इस रिकॉर्ड में से साढ़े 3 लाख रुपए की करंसी अब उनके लिए किसी काम की नहीं रही। उनके पास 786 नंबर वाले 500 रुपए के 400 से ज्यादा नोट हैं, जबकि 1000 के उनके पास 130 नोट।
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786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
पंजाब स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक से रिटायर नरिंदर पाल ने बताया कि बैंक में काम करते-करते उन्हें ये शौक पड़ा था। उनके पास कई लोग 786 नंबर वाले नोट मांगने आते थे। फिर उन्हें भी शौक पड़ा और उन्होंने कलेक्शन शुरू कर दी। 2001 में पहली बार उनके रिकॉर्ड को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह मिली। फिर उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में आया।
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786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
लुधियाना में हीरो डी.एम.सी. हार्ट इंस्टीच्यूट में बिलिंग सुपरवाइजर के पद पर काम कर रहे विनोद सिंह नेगी को 500 व 1 हजार के नोट बंद करने की घोषणा मानो बिजली के झटके की तरह लगी हो। क्योंकि कई वर्षों से उसने 500 व 1000 रुपए के नोट जिनकी सीरीज के आखिर में 786 छपा था, एकत्रित किए थे।
उसके इस शौक में उसके दोस्तों ने भी मदद की, जिसके चलते उसके पास 1000 के 68 व 500 रुपए के 91 नोट (कुल रकम 1 लाख 13 हजार) जमा हो चुके थे।
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लुधियाना में श्रीसाईं फाइनेंस कंपनी के मालिक करण वालिया को 786 नंबर वाले 500 और 1000 के नोट एकत्र करने का शौक था। इसके चलते वालिया को जब भी कहीं से 786 नंबर वाला नोट मिलता था, तो वह उसे अपने ही रख लेते थे। इस तरह वह पिछले करीब पंद्रह वर्षों से 500 और 1000 के नोट एकत्र कर साढ़े तीन लाख रुपए जमा कर चुके हैं।
लुधियाना में श्रीसाईं फाइनेंस कंपनी के मालिक करण वालिया को 786 नंबर वाले 500 और 1000 के नोट एकत्र करने का शौक था। इसके चलते वालिया को जब भी कहीं से 786 नंबर वाला नोट मिलता था, तो वह उसे अपने ही रख लेते थे। इस तरह वह पिछले करीब पंद्रह वर्षों से 500 और 1000 के नोट एकत्र कर साढ़े तीन लाख रुपए जमा कर चुके हैं।
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786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
सनसिटी रोहतक निवासी नरेंद्र छिल्लर 2006 से 786 नंबर वाले 50, 100, 500 1000 के नोट जमा कर रहे हैं। अब 500 1000 के नोट बंद होने के बाद उन्हें बड़ा झटका लगा। शुभ मानते हुए 10 वर्ष में उन्होंने 786 नंबर वाले 500 1000 के 40 नोट जमा किए थे। जरूरत के समय भी उन्हें खर्च नहीं किया था, लेकिन मोदी सरकार के फैसले के बाद उनकी 10 वर्ष की मेहनत पर पानी फिर गया।
500 और 1000 रुपए के नोटों को बंद करने की घोषणा के बाद करनाल के करीब 26 वर्षीय विष्णु को बड़ा झटका लगा। उन्होंने जब से पढ़ाई के बाद कामकाज करना शुरू किया।
तभी से विष्णु ने यह 786 नंबर लिखे नोटों को इकट्ठा करना शुरू किया, क्योंकि विष्णु को 500 के हरे पीले रंग और 1000 रुपए के पिंक रंग के यह पुराने नोट काफी पसंद थे।