आप जो अंडा खा रहे हैं, कहीं वह प्लास्टिक का तो नहीं। सावधान हो जाएं और जानें नकली अंडा कैसे तैयार होता है और असली नकली की पहचान कैसे करेंगे।
विज्ञापन
2 of 8
अंडे
कैसे बनता है प्लास्टिक का अंडा
सोडियम अल्जिनेट को गर्म पानी में मिलाकर फिर इस मिश्रण में जलेटिन, ऐलम और बेन्जोइक मिलाया जाता है। अंडे के पीले और सफेद हिस्से दोनों को बनाने में यही मिश्रण इस्तेमाल होता है। पीले हिस्से के लिए मिश्रण में पीला रंग मिला दिया जाता है। अंडे का छिलका बनाने के लिए कैल्शियम क्लोराइड का इस्तेमाल किया जाता है।
विज्ञापन
3 of 8
फ्रिज में अंडे रखना खतरनाक
कैसे पहचाने नकली और असली अंडे
नकली अंडे की परत खस-खस होती है। नकली अंडे का कुसुम तोड़ पर रखने पर बिखर जाता है, जबकि असली अंडे का कुसुम बिखरता नहीं है, एक जगह ही रहता है। नकली अंडे को पकाने पर मांस की गंध आती है। नकली अंडे का पोच नहीं बन पाता है।
4 of 8
अंडे
नकली असली की तुलना में खुरदुरा होता है
नकली अंडे का छिलका थोड़ा सख्त होता है। यह असली अंडे की तुलना में थोड़ा खुरदुरा भी होता है। इसके अलावा छिलके के अंदर एक रबरनुमा लाइनिंग भी होती है। नकली अंडे को हल्के से थपथपाते हैं, तो आपको जो आवाज सुनाई देगी, वह असली अंडे की तुलना में थोड़ी कम करारी होगी।
विज्ञापन
5 of 8
अंडे और दूध
- फोटो : getty images
नकली अंडे पक जाने पर भी पानी में नहीं डूबते
अगर आप नकली अंडा तोड़कर इसे कुछ समय के लिए छोड़ देते हैं, तो अंडे का सफेद और पीला द्रव्य कुछ समय में एक-दूसरे के साथ मिल जाएंगे। ऐसा इसलिए कि वे दोनों एक ही पदार्थ से बने होते हैं। नकली अंडे पक जाने पर भी पानी में नहीं डूबते हैं। खुले में भी छोड़ दें, तब भी इनमें ना तो मक्खियां लगेंगी और ना ही चीटिंया।
विज्ञापन
6 of 8
अंडा
- फोटो : अमर उजाला
नकली अंडे की जर्दी बिना छुए फैल जाएगी
जब आप नकली अंडे को तलते हैं, तो बिना छुए ही अंडे की जर्दी (पीला हिस्सा) फैल जाएगी। आमतौर पर जब आप असली अंडे को तलते हैं, तो इसका पीला हिस्सा पैन में डालने पर भी साबुत बना रहता है। इसे जब तक आप छुएं ना, तबतक यह फैलता नहीं है।
विज्ञापन
7 of 8
अंडे
- फोटो : getty images
स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक हैं
नकली अंडे स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। चूंकि प्लास्टिक पचता नहीं है, इस कारण इससे पेट से संबंधित बीमारियां व अन्य रोग उत्पन्न होते हैं तथा आदमी को बीमार कर सकता है। इनमें निर्माण में काफी कम खर्च होते हैं। एक नकली अंडे के निर्माण में एक रुपये से ज्यादा लागत नहीं आयेगी।
कैंसर होने का खतरा होता है
आर्टिफिशियल अंडे का बाहरी खोल कैल्शियम कार्बोनेट से तैयार होता है। इसके अंदर सोडियम एलिग्नेट, एलम, जिलेटिन और कैल्शियम क्लोराइड भरकर तैयार किया जाता है। इस तरह के अंडों का लगातार सेवन करने से कैंसर जैसी घातक बीमारी की आशंका रहती है।