34 साल बाद भी नहीं भूलता 6 जून 1984 का वो भयानक दिन, जब ऑपरेशन ब्लू स्टार पूरा हुआ और गोल्डन टेंपल में हर तरफ लाशें ही लाशें बिछी थीं। तीन दिन बाद जरनैल सिंह भिंडरावाले की मौत के साथ ऑपरेशन ब्लूस्टार खत्म हुआ था।
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operation blue star
इस ऑपरेशन में 83 सैनिक मारे गए थे जिसमें 3 सेना के अफसर थे। इसके साथ ही कुल 248 लोग घायल हुए और 492 लोग मारे गए थे। दरअसल उस समय पंजाब को भारत से अलग करके अलग से खालिस्तान राष्ट्र बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी थी इसलिए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था।
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जरनैल सिंह भिंडरावाले सिखों की धार्मिक संस्था दमदमी टकसाल का लीडर था। उसकी कट्टर विचारधारा ने लोगों पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया था इसलिए उसे संस्था की कमान सौंपी गई थी। भिंडरावाले ने गोल्डन टैम्पल परिसर में बने अकाल तख्त में अपना मुख्यालय बना लिया और अकाल तख्त पर कब्जा कर लिया था।
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अकालतख्त पर कब्जे करने का विरोध भी हुआ, लेकिन भिंडरावाले ने इसकी चिंता नहीं की और हिंसा का दौर जारी रहा। भिंडरावाले की इच्छा थी कि हिन्दू पंजाब छोड़ कर चले जाएं जो कि दिल्ली सरकार को चुनौती थी। इंदिरा गांधी को भी जल्द से जल्द किसी फैसले पर पहुंचना था, क्योंकि उनकी मुश्किलें बढ़ती जा रही थीं।
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Operation Blue Star
आखिरकार इंदिरा गांधी ने 1 जून 1984 के दिन अमृतसर को सेना के हवाले कर दिया और ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू किया। इस ऑपरेशन को मेजर जनरल कुलदीप सिंह बरार को सौंपी गई थी। ऑपरेशन के दौरान मंदिर परिसर में रह रहे लोगों को बाहर आने के लिए कहा गया, लेकिन 5 जून तक तक सिर्फ 129 लोग ही बाहर आए।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
5 जून, 1984 को शाम 7 बजे सेना की कार्यवाई शुरू हुई और रात भर दोनों तरफ से गोलीबारी हुई। 6 जून की सुबह अकालतख्त में छिपे आतंकियों को बाहर निकालने के लिए टैंकों को गोल्डन टेंपल में ले जाया गया। शाम तक गोलीबारी होती रही। अकालतख्त को काफी नुकसान हुआ और फिर देर रात मिली जरनैल सिंह भिंडरावाले की लाश।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
भारत सरकार के श्वेतपत्र के अनुसार, ऑपरेशन ब्लू स्टार में 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल हुए। इसी श्वेतपत्र के अनुसार 493 चरमपंथी या आम नागरिक मारे गए, 86 घायल हुए और 1592 को गिरफ़्तार किया गया, लेकिन इन सब आंकड़ों को लेकर अब तक विवाद चल रहा है।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
सिख संगठनों का कहना है कि हज़ारों श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद थे और मरने वाले निर्दोष लोगों की संख्या भी हज़ारों में है। इसका भारत सरकार खंडन करती आई है। वहीं इस कार्रवाई से सिख समुदाय की भावनाओं को बहुत ठेस पहुंची।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
कई प्रमुख सिख बुद्धिजीवियों ने सवाल उठाए कि स्थिति को इतना ख़राब क्यों होने दिया गया कि ऐसी कार्रवाई करने की ज़रूरत पड़ी? सरकार की इस बर्बर कार्रवाई से खफा कई प्रमुख सिखों ने या तो अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया या फिर सरकार द्वारा दिए गए सम्मान लौटा दिए।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
सिखों और कांग्रेस पार्टी के बीच दरार उस समय और गहरा गई जब दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने कुछ ही महीने बाद 31 अक्तूबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी। इसके बाद भड़के सिख विरोधी दंगों से कांग्रेस और सिखों की बीच की खाई और गहरा गई।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
तीस वर्ष पुराने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार पर ब्रिटेन के दस्तावेजों से एक खुलासा हुआ। पता चला कि तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री मारग्रेट थ्रैचर ने स्वर्ण मंदिर को खालिस्तानी आतंकियों से मुक्त कराने की सैन्य कार्रवाई में भारत की मदद की।
हालांकि ऑपरेशन ब्लू स्टार में सेना का नेतृत्व करने वाले तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल केएस बरार ने ब्रिटेन की किसी भूमिका से इंकार किया है, लेकिन 33 वर्षों की अवधि के बाद गोपनीयता कानून से बाहर आए इन साक्ष्यों की अनदेखी भी नहीं की जा सकती।